Maratha Reservation Protest: महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की मांग एक बार फिर आंदोलन के केंद्र में है। जालना के अंतरवाली सराटी में मनोज जरांगे का अनशन शनिवार को आठवें दिन भी जारी रहा। आंदोलन के बीच जरांगे ने अपना रुख और सख्त करते हुए पानी पीने और चिकित्सा उपचार लेने से भी इनकार कर दिया है।
जरांगे का आरोप है कि राज्य सरकार की ओर से पहले दिए गए आश्वासनों को अभी तक जमीन पर लागू नहीं किया गया है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक वह अपना अनशन वापस नहीं लेंगे।
पानी और इलाज क्यों ठुकराया?
जरांगे के मुताबिक, सरकार ने मराठा आरक्षण से जुड़े कई मुद्दों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन उनका दावा है कि उन पर अपेक्षित तरीके से काम शुरू नहीं हुआ। इसी को लेकर उन्होंने अब अपना आंदोलन और कठोर करने का फैसला किया है।
प्रदर्शन स्थल पर डॉक्टरों की टीम ने उनकी स्वास्थ्य जांच करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मेडिकल जांच कराने से भी इनकार कर दिया। इससे पहले सरकार के प्रतिनिधियों की अपील के बाद जरांगे पानी और नस के जरिये तरल लेने के लिए तैयार हुए थे।
हालांकि, अब उन्होंने दोबारा साफ कर दिया है कि मांगों पर अमल होने तक वह कुछ भी लेने और इलाज कराने से इनकार करेंगे।
जरांगे ने कहा कि सरकार को केवल आश्वासन देने के बजाय मांगों को जमीन पर लागू करना होगा।
58 लाख रिकॉर्ड को लेकर क्या है विवाद?
मनोज जरांगे का कहना है कि महायुति सरकार ने करीब 58 लाख मराठों से जुड़े रिकॉर्ड पर काम शुरू करने का आश्वासन दिया था। उनका दावा है कि इन रिकॉर्ड के आधार पर पात्र लोगों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का लाभ दिलाने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जानी थी।
जरांगे का आरोप है कि इस मुद्दे पर अब तक अपेक्षित कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। यही वजह है कि वह सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपना रहे हैं।
हालांकि, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अलग तस्वीर पेश की गई है। राज्य सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने कहा था कि बड़ी संख्या में कुनबी रिकॉर्ड खोजे गए हैं और पात्र लोगों को प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर काम किया जाएगा।
हैदराबाद गजट और ग्रामीणों तक जानकारी का मुद्दा
आंदोलन के दौरान हैदराबाद गजट भी जरांगे की प्रमुख मांगों में शामिल रहा है। उनका आरोप है कि इससे संबंधित प्रक्रिया को लेकर सरकार ने जो आश्वासन दिया था, उस पर अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में आरक्षण से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक घोषणाओं के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की मांग भी आंदोलन से जुड़ी हुई है। जरांगे का कहना है कि सरकार ने इस संबंध में भी आश्वासन दिया था, लेकिन उसका पालन नहीं हुआ।
सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने की थी मुलाकात
गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार के एक प्रतिनिधिमंडल ने जरांगे से मुलाकात कर आंदोलन खत्म करने की अपील की थी। प्रतिनिधिमंडल में मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल, उदय सामंत, विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड और विधायक मकरंद पाटिल शामिल थे।
प्रतिनिधियों ने जरांगे के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई और उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।
विखे पाटिल ने कहा था कि सरकार ने करीब 58 लाख कुनबी रिकॉर्ड खोजे हैं और प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा। लेकिन जरांगे सरकार की कार्रवाई से संतुष्ट नजर नहीं आए और उन्होंने आंदोलन जारी रखने का फैसला किया।
12 सितंबर को मुंबई जाने की चेतावनी
अब आंदोलन का अगला बड़ा पड़ाव 12 सितंबर बताया जा रहा है। जरांगे ने कहा है कि अगर उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ तो वह मुंबई जाएंगे।
उनकी प्रमुख मांगों में पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने से संबंधित सरकारी निर्णय (GR) जारी करना शामिल है। जरांगे चाहते हैं कि पात्र मराठों को कुनबी प्रमाणपत्र मिलने के बाद वे अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण के तहत उपलब्ध लाभ हासिल कर सकें।
यही मुद्दा आने वाले दिनों में महाराष्ट्र सरकार और मराठा आंदोलन के बीच टकराव का प्रमुख कारण बन सकता है।
सरकार के सामने बढ़ती चुनौती
मनोज जरांगे के पानी और इलाज लेने से इनकार करने के बाद सरकार के सामने अब आंदोलन को लेकर चुनौती और बढ़ गई है। एक तरफ सरकार बातचीत और प्रशासनिक प्रक्रिया के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी तरफ जरांगे मांगों के तत्काल क्रियान्वयन पर जोर दे रहे हैं।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार 12 सितंबर से पहले जरांगे की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लेती है या फिर आंदोलन मुंबई तक पहुंचता है।

