नई दिल्ली। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA की ओर से दाखिल आरोपपत्र के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि अमेरिकी नागरिक के खिलाफ दाखिल चार्जशीट में गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं।
कांग्रेस नेता ने इस घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार से यह भी सवाल किया कि क्या यह फैसला स्वतंत्र जांच के आधार पर लिया गया या फिर किसी बाहरी दबाव का इसमें कोई प्रभाव था। हालांकि, दूसरी तरफ NIA की ओर से कहा गया है कि मामले की जांच अभी जारी है और यदि जांच के दौरान UAPA के तहत अपराध सामने आता है तो आगे पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है।
चार्जशीट से UAPA की धाराएं गायब
मामला मूल रूप से UAPA के तहत दर्ज किया गया था। इसमें अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों पर म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने और कथित तौर पर हथियार तथा अन्य उपकरण उपलब्ध कराने के आरोप लगाए गए थे।
अब NIA ने राउज एवेन्यू अदालत में सात आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है। खास बात यह है कि मौजूदा चार्जशीट में UAPA की धाराओं को शामिल नहीं किया गया है।
एजेंसी ने विदेशियों से संबंधित कानून की कुछ धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं। मामले पर अदालत में आगे की सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की गई है।
जयराम रमेश ने उठाए कई सवाल
UAPA की धाराएं चार्जशीट में नहीं होने को लेकर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या NIA का यह फैसला निष्पक्ष और सही जांच का परिणाम है या इसके पीछे किसी तरह का दबाव रहा है।
जयराम रमेश ने यह भी पूछा कि यदि शुरुआती मामले में आतंकवाद से जुड़े आरोप लगाए गए थे, तो अब चार्जशीट दाखिल करते समय उन धाराओं को क्यों हटाया गया।
कांग्रेस नेता ने सरकार से यह जानने की मांग की कि इस फैसले से भारत को क्या लाभ मिलने की उम्मीद है और क्या किसी विदेशी सरकार के दबाव का इसमें कोई संबंध है।
हालांकि, ये कांग्रेस नेता द्वारा उठाए गए सवाल और राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि के तौर पर कोई निष्कर्ष इस खबर में नहीं निकाला जा सकता।
NIA ने क्या कहा?
मामले में NIA के विशेष लोक अभियोजक की ओर से अदालत को बताया गया कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है।
एजेंसी के मुताबिक, यदि आगे की जांच में UAPA के तहत कोई अपराध सामने आता है तो उस आधार पर पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है।
इसका मतलब यह है कि मौजूदा चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं होने के बावजूद जांच का दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है। आगे मिलने वाले सबूतों के आधार पर आरोपों में बदलाव या अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जा सकती हैं।

सात आरोपियों के खिलाफ मामला
इस मामले में NIA ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक के अलावा यूक्रेन के छह नागरिकों को आरोपी बनाया है।
इनमें हर्बा पेट्रो, स्लीवियाक तारास, इवान सुकमनोव्स्की, स्टेफनकिव मारियन, होंचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर के नाम शामिल हैं।
आरोप है कि ये लोग म्यांमार में सक्रिय जातीय सशस्त्र समूहों से जुड़े प्रशिक्षण और हथियारों की आपूर्ति जैसी गतिविधियों में शामिल थे।
जांच एजेंसी के मुताबिक, इन गतिविधियों का संबंध ऐसे समूहों से बताया गया जिन्हें भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना गया था।
मैथ्यू वैनडाइक की गिरफ्तारी कैसे हुई?
मैथ्यू वैनडाइक को मार्च 2026 में कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था।
NIA की कार्रवाई के बाद उन्हें अदालत के सामने पेश किया गया। मामले में आरोपियों को जांच के सिलसिले में हिरासत में भी रखा गया।
वैनडाइक खुद को युद्ध और सुरक्षा मामलों का विशेषज्ञ बताते रहे हैं और उनकी कंपनी Sons of Liberty International से भी उनका संबंध बताया गया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि उनकी गतिविधियां म्यांमार में सशस्त्र समूहों को प्रशिक्षण देने और सहायता उपलब्ध कराने से जुड़ी थीं। इन आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है।
परिवार ने भी लगाए गंभीर आरोप
इससे पहले मैथ्यू वैनडाइक के परिवार की ओर से चलाए जा रहे सोशल मीडिया अकाउंट से अमेरिकी सरकार से हस्तक्षेप की अपील की गई थी।
परिवार ने दावा किया था कि वैनडाइक निर्दोष हैं और उन्हें जेल में बुनियादी अधिकार नहीं मिल रहे हैं। परिवार की ओर से उन्हें तिहाड़ जेल में रखे जाने का भी दावा किया गया था।
परिवार ने अमेरिकी सरकार से राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप की मांग की थी।
हालांकि, परिवार के इन दावों और NIA की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच अंतिम स्थिति का फैसला न्यायिक प्रक्रिया में होना बाकी है।
UAPA हटने से क्यों बढ़ा विवाद?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस केस की शुरुआत UAPA के तहत हुई, उसमें दाखिल मौजूदा आरोपपत्र में UAPA की धाराएं क्यों नहीं हैं।
कांग्रेस इसी बिंदु को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठा रही है। पार्टी का कहना है कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि धाराएं हटाने का आधार क्या रहा।
वहीं NIA का पक्ष यह है कि जांच जारी है और अगर आगे UAPA के तहत अपराध सामने आता है तो पूरक आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है।
इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि UAPA से जुड़े आरोप हमेशा के लिए समाप्त हो गए हैं।
अब आगे क्या होगा?
अब अदालत में आरोपपत्र पर आगे की कानूनी प्रक्रिया होगी। 1 अक्टूबर को मामले पर अगली कार्रवाई होनी है।
इस दौरान जांच एजेंसी की ओर से जुटाए गए सबूत, आरोपों की प्रकृति और अदालत के समक्ष रखे गए दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।
अगर जांच में UAPA से जुड़ा कोई अपराध सामने आता है तो NIA पूरक आरोपपत्र दाखिल कर सकती है। दूसरी तरफ कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांग रही है।
यानी मामला फिलहाल दो स्तरों पर आगे बढ़ रहा है—एक तरफ अदालत में कानूनी प्रक्रिया और दूसरी तरफ UAPA की धाराओं को लेकर राजनीतिक बहस।

