गोंडा/लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गोंडा में दुकान बंद कर घर लौट रहे बर्तन व्यापारी विनोद कुमार साहनी (45) की घेरकर की गई पिटाई और धारदार हथियारों से हमले के बाद मौत हो गई। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। पुलिस ने इस मामले में नामजद आरोपियों में से दो को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस की टीमें जुटी हुई हैं।
मामले ने उस समय राजनीतिक रंग ले लिया, जब लखनऊ में केजीएमयू के शवगृह के बाहर कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद समेत कई नेता धरने पर बैठ गए। वहीं, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
दुकान बंद कर घर लौट रहे थे विनोद
पुलिस के अनुसार, गोंडा के रेक्सड़िया मल्लाहन पुरवा गांव निवासी विनोद कुमार साहनी शाहपुर बाजार में बर्तन की दुकान चलाते थे।
बुधवार रात करीब 8 बजे वह अपनी दुकान बंद करके बाइक से घर लौट रहे थे। इसी दौरान लल्लन यादव की दुकान के पास उनकी बाइक को कथित तौर पर चार बाइकों से आए करीब दस लोगों ने रोक लिया।
आरोप है कि हमलावरों ने विनोद को घेरकर पहले उनके साथ मारपीट की। इसके बाद उन पर कांता और भाला जैसे धारदार हथियारों से हमला किया गया।
हमले में विनोद गंभीर रूप से घायल होकर सड़क पर गिर पड़े। पुलिस के मुताबिक, हमलावर उन्हें मृत समझकर वहां से फरार हो गए।
तीन हमलावरों को पहचानने की बात
घटना के दौरान विनोद ने कथित तौर पर तीन हमलावरों को पहचान लिया था। परिजन उन्हें तत्काल इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
वहां से उन्हें मेडिकल कॉलेज गोंडा भेजा गया। हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने उन्हें लखनऊ रेफर कर दिया।
लखनऊ में इलाज के दौरान विनोद की मौत हो गई। उनकी मौत की खबर मिलते ही परिजनों और समर्थकों में आक्रोश फैल गया।
इसके बाद पुलिस ने पहले दर्ज मुकदमे में हत्या की धारा बढ़ाई और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें गठित कीं।

सोशल मीडिया पोस्ट बना विवाद की वजह?
पुलिस की शुरुआती जांच में हत्या के पीछे सोशल मीडिया पर पोस्ट को लेकर रंजिश की बात सामने आई है।
अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी राधेश्याम राय के अनुसार, विनोद और आरोपियों के बीच सोशल मीडिया पर पोस्ट किए जाने को लेकर विवाद था।
पुलिस अधीक्षक अभिषेक के मुताबिक, मामले में नामजद शुभम उर्फ गोलू सिंह और सुभाष सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि विवाद की शुरुआत किस पोस्ट से हुई थी और घटना से पहले आरोपियों और विनोद के बीच किस तरह का विवाद चल रहा था।
मौत के बाद हत्या की धारा बढ़ी
घटना के बाद विनोद की ओर से दर्ज कराई गई प्रारंभिक शिकायत के आधार पर शुभम सिंह उर्फ गोलू, सुभाष सिंह, आकाश सिंह समेत दस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
विनोद की मौत के बाद मामले में हत्या की धारा बढ़ाई गई। पुलिस अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के साथ-साथ वारदात में इस्तेमाल हथियारों और अन्य साक्ष्यों की तलाश कर रही है।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी आरोपियों की गिरफ्तारी और घटना की पूरी वजह स्पष्ट करना है।
लखनऊ में शवगृह के बाहर नेताओं का धरना
विनोद की मौत के बाद मामला लखनऊ तक पहुंच गया। केजीएमयू के शवगृह के बाहर कई नेताओं और समर्थकों ने धरना दिया।
निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री संजय निषाद, वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी और सपा पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष राजपाल कश्यप धरने में शामिल हुए।
प्रदर्शन को देखते हुए केजीएमयू परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई।
नेताओं ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की।

संजय निषाद ने रखीं कई मांगें
संजय निषाद ने कहा कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक उनकी पार्टी का प्रदर्शन जारी रहेगा।
उन्होंने कथित पुलिस लापरवाही की जांच की मांग करते हुए संबंधित थानाध्यक्ष और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
इसके अलावा मंत्री ने पीड़ित परिवार को मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और सुरक्षा देने की मांग रखी।
उन्होंने आरोपियों की अवैध संपत्तियों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी की। संजय निषाद ने गोंडा के पुलिस अधिकारियों से फोन पर बातचीत की और विनोद की पत्नी से भी बात की।
अखिलेश यादव ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
इस हत्याकांड को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने विनोद कुमार साहनी को श्रद्धांजलि देते हुए मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की।
अखिलेश यादव ने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर राजनीतिक हमला भी बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में अपराध और अराजकता बढ़ी है तथा पुलिस व्यवस्था पर भी राजनीतिक दबाव है।
हालांकि, ये टिप्पणियां राजनीतिक बयान हैं और इनके जरिए लगाए गए आरोपों को पुलिस जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
अब पुलिस के सामने क्या चुनौती?
गोंडा पुलिस के सामने अब फरार आरोपियों को पकड़ने के साथ-साथ हत्या की पूरी साजिश और घटना के पीछे वास्तविक विवाद की पुष्टि करने की चुनौती है।
सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर शुरू हुए विवाद ने आखिर इतना गंभीर रूप कैसे लिया, कितने लोग सीधे तौर पर वारदात में शामिल थे और हमला पहले से सुनियोजित था या अचानक हुआ—इन सवालों के जवाब जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आ सकते हैं।
फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और बाकी नामजद आरोपियों की तलाश जारी है। वहीं, राजनीतिक दलों के प्रदर्शन और नेताओं की मांगों के बीच इस मामले में पुलिस की अगली कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

