नई दिल्ली। 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह के आयोजन को लेकर इन दिनों फिल्म जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है। वजह है समारोह का पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित होना। इस बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की भव्य सेरेमनी गुजरात के एकता नगर यानी केवड़िया में आयोजित की जाएगी।
जहां एक तरफ इसे देश के अलग-अलग हिस्सों में राष्ट्रीय स्तर के आयोजनों को ले जाने की पहल के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर समारोह का स्थान बदलने को लेकर सवाल और आलोचनाएं भी सामने आई हैं। इसी विवाद के बीच अभिनेता परेश रावल का बयान सामने आया है, जिसने बहस को और गर्म कर दिया है।
‘क्या गुजरात बांग्लादेश या पाकिस्तान में है?’
गुजरात में राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह आयोजित किए जाने की आलोचनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए परेश रावल ने सवालिया अंदाज में कहा कि गुजरात भारत का ही हिस्सा है, फिर वहां ऐसा आयोजन क्यों नहीं होना चाहिए।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा कि गुजरात में भी राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम होने चाहिए। उनका तर्क था कि अगर ऐसे समारोह देश के अलग-अलग राज्यों में आयोजित किए जाएं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है।
परेश रावल ने इसी संदर्भ में पूछा कि क्या गुजरात बांग्लादेश या पाकिस्तान में है। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी समारोह के आयोजन स्थल को लेकर चल रही बहस ने जोर पकड़ लिया।
72 साल पुरानी परंपरा में बदलाव
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों का इतिहास करीब सात दशक पुराना है। 1954 में पहली बार राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह आयोजित किया गया था। इसके बाद लंबे समय तक दिल्ली इस प्रतिष्ठित आयोजन का प्रमुख केंद्र रही।
समारोह में देश के राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कार प्रदान किए जाने की परंपरा भी इसे विशेष महत्व देती रही है। इस बार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 22 सितंबर को पुरस्कार प्रदान करेंगी।
लेकिन 72वें संस्करण में आयोजन स्थल को लेकर पुरानी परंपरा बदल रही है। इस बार समारोह राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के बजाय गुजरात के एकता नगर में होगा।
इसी बदलाव को लेकर एक वर्ग का कहना है कि राष्ट्रीय पुरस्कार समारोह को दिल्ली में ही आयोजित किया जाना चाहिए था। वहीं, दूसरे पक्ष का तर्क है कि राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों को देश के विभिन्न राज्यों तक ले जाना क्षेत्रीय भागीदारी और सांस्कृतिक विविधता को बढ़ावा दे सकता है।

पुरस्कारों में ‘आर्टिकल 370’ का दबदबा
इस साल के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में ‘आर्टिकल 370’ को सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म चुने जाने की जानकारी सामने आई है। फिल्म की मुख्य अभिनेत्री यामी गौतम को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के सम्मान के लिए चुना गया है।
फिल्म को मिले इस सम्मान ने भी चर्चा बटोरी है। ‘आर्टिकल 370’ की कहानी जम्मू-कश्मीर से जुड़े संवेदनशील राजनीतिक और सामाजिक घटनाक्रम की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
ममूटी और कार्तिक आर्यन को संयुक्त सर्वश्रेष्ठ अभिनेता
सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में भी इस बार मुकाबला खास रहा। जानकारी के अनुसार मलयालम अभिनेता ममूटी और बॉलीवुड अभिनेता कार्तिक आर्यन को संयुक्त रूप से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार दिया जाएगा।
ममूटी को ‘ब्रह्मयुगम’ और कार्तिक आर्यन को ‘चंदू चैंपियन’ में उनके अभिनय के लिए यह सम्मान मिलने की बात कही गई है।
इससे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में क्षेत्रीय सिनेमा और हिंदी सिनेमा दोनों की मौजूदगी एक साथ दिखाई देती है।
रणदीप हुड्डा को निर्देशन में सम्मान
अभिनेता रणदीप हुड्डा के लिए भी यह पुरस्कार समारोह खास रहने वाला है। विनायक दामोदर सावरकर पर बनी बायोपिक ‘स्वातंत्र्य वीर सावरकर’ के निर्देशन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ नवोदित निर्देशक का पुरस्कार दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
रणदीप हुड्डा ने इस फिल्म में अभिनय के साथ निर्देशन की जिम्मेदारी भी संभाली थी। ऐसे में राष्ट्रीय पुरस्कार में निर्देशन की श्रेणी में सम्मान मिलना उनके करियर के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
दिल्ली से बाहर आयोजन पर क्यों हो रहा विवाद?
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह का दिल्ली से बाहर जाना ही इस पूरे विवाद की मुख्य वजह है। एक पक्ष इसे राष्ट्रीय आयोजनों के विकेंद्रीकरण के रूप में देख रहा है, जबकि आलोचक आयोजन स्थल बदलने के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं।
परेश रावल ने इस बहस में स्पष्ट रूप से समारोह को गुजरात में आयोजित किए जाने का समर्थन किया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहने चाहिए और देश के दूसरे राज्यों को भी ऐसे आयोजनों की मेजबानी का अवसर मिलना चाहिए।
अब समारोह पर सबकी नजर
22 सितंबर को होने वाला 72वां राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण होगा क्योंकि यह पहली बार दिल्ली से बाहर आयोजित हो रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पुरस्कार प्रदान करेंगी और फिल्म जगत की कई बड़ी हस्तियां इस समारोह का हिस्सा बनेंगी।
अब देखना यह होगा कि समारोह के आयोजन के बाद दिल्ली से बाहर राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार आयोजित करने की पहल को किस तरह की प्रतिक्रिया मिलती है। साथ ही, परेश रावल के बयान के बाद शुरू हुई बहस समारोह के बाद भी जारी रहती है या आयोजन की भव्यता इस विवाद को पीछे छोड़ देती है।

