पणजी। गोवा विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में एक नया सियासी समीकरण सामने आया है। आम आदमी पार्टी (AAP) और गोवा फॉरवर्ड पार्टी (GFP) ने गठबंधन का ऐलान किया है। आप संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस गठबंधन को ‘गोवा फर्स्ट’ नाम दिया है।
केजरीवाल ने दावा किया कि यह गठबंधन गोवा की जनता के सामने भाजपा और कांग्रेस से अलग एक नया राजनीतिक विकल्प पेश करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता दोनों प्रमुख दलों से निराश है और अब वह तीसरे विकल्प की तलाश में है।
गठबंधन के ऐलान के साथ ही गोवा की चुनावी राजनीति में मुकाबला और दिलचस्प होने की संभावना जताई जा रही है।
AAP और Goa Forward Party ने मिलाया हाथ
गोवा में आम आदमी पार्टी और गोवा फॉरवर्ड पार्टी के बीच हुए गठबंधन को अरविंद केजरीवाल ने ‘गोवा फर्स्ट’ नाम दिया है।
केजरीवाल के मुताबिक, गठबंधन का उद्देश्य राज्य की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस के विकल्प के तौर पर सामने आना है। उन्होंने इसे एक गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस गठबंधन बताया।
यह गठबंधन ऐसे समय में सामने आया है, जब गोवा विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां तैयार करने में जुटे हैं। ऐसे में AAP और GFP के साथ आने से विपक्षी राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है।
‘गोवा की जनता तीसरी बार धोखा नहीं खाना चाहती’
गठबंधन की घोषणा के दौरान केजरीवाल ने भाजपा और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने दावा किया कि गोवा की जनता को पहले दो बार राजनीतिक तौर पर निराश किया जा चुका है और अब वह तीसरी बार ऐसा नहीं चाहती।
केजरीवाल के मुताबिक, जनता को भाजपा और कांग्रेस से आगे एक विकल्प की जरूरत है और ‘गोवा फर्स्ट’ उसी विकल्प के तौर पर सामने आया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों प्रमुख दल गोवा की जनता को धोखा दे रहे हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के विधायकों पर भाजपा को सरकार बनाने में मदद करने का आरोप भी लगाया।
हालांकि, ये आरोप केजरीवाल द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
BJP और कांग्रेस पर क्या बोले केजरीवाल?
अरविंद केजरीवाल ने गोवा की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था पर भी निशाना साधा।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार के सामने जनता की समस्याओं के बजाय पैसा और प्रभाव ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। केजरीवाल ने इस राजनीतिक व्यवस्था की तुलना ‘पॉकेट फर्स्ट’ से करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता ‘गोवा फर्स्ट’ है।
उनका दावा था कि गोवा के अलग-अलग क्षेत्रों में माफिया का प्रभाव बढ़ गया है और बिल्डर तथा ठेकेदार राज्य की व्यवस्था को प्रभावित कर रहे हैं।
इन आरोपों पर संबंधित राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
‘बिल्डर और ठेकेदार चला रहे हैं राज्य’
केजरीवाल ने अपने भाषण में गोवा की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने कहा कि राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों में कथित तौर पर माफिया का प्रभाव है और बिल्डर तथा ठेकेदार शासन चला रहे हैं।
केजरीवाल के मुताबिक, आम लोग इस व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं।
इसी दावे को आधार बनाते हुए उन्होंने ‘गोवा फर्स्ट’ गठबंधन को जनता के लिए नया राजनीतिक विकल्प बताया।
‘पहली बार तीसरा विकल्प’
केजरीवाल ने दावा किया कि गोवा की जनता के सामने अब पहली बार एक मजबूत गैर-भाजपा, गैर-कांग्रेस विकल्प मौजूद है।
उन्होंने कहा कि ‘गोवा फर्स्ट’ के जरिए AAP और गोवा फॉरवर्ड पार्टी राज्य की राजनीति में बदलाव का एजेंडा लेकर जनता के बीच जाएंगी।
गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वह अपने राजनीतिक संदेश को कितनी मजबूती से बूथ और विधानसभा स्तर तक पहुंचा पाता है।
गोवा की राजनीति में कितना बदलेगा समीकरण?
गोवा की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक ताकतें रही हैं। ऐसे में AAP और GFP का गठबंधन चुनावी मुकाबले को नया आयाम दे सकता है।
हालांकि, गठबंधन की वास्तविक ताकत चुनावी मैदान में उम्मीदवारों, सीटों के बंटवारे, संगठन की स्थिति और स्थानीय मुद्दों पर निर्भर करेगी।
‘गोवा फर्स्ट’ के सामने एक चुनौती यह भी होगी कि वह भाजपा और कांग्रेस के पारंपरिक वोट आधार के बीच अपनी जगह कैसे बनाता है।
अब आगे क्या?
गठबंधन के ऐलान के बाद अब सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि AAP और GFP किन सीटों पर उम्मीदवार उतारते हैं और सीट बंटवारे का फॉर्मूला क्या रहता है।
इसके अलावा यह भी महत्वपूर्ण होगा कि गठबंधन गोवा के स्थानीय मुद्दों को किस तरह अपने चुनावी अभियान का हिस्सा बनाता है।
केजरीवाल ने जिस तरह ‘गोवा फर्स्ट’ को जनता के सामने तीसरे विकल्प के रूप में पेश किया है, उससे संकेत मिलता है कि गठबंधन का चुनावी अभियान भाजपा और कांग्रेस दोनों को निशाने पर रख सकता है।

