जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव-2026 के नतीजों का इंतजार अब खत्म होने जा रहा है। आज 14 सितंबर को प्रदेश के 309 नगरीय निकायों में मतगणना होगी। सुबह 8 बजे से शुरू होने वाली काउंटिंग के साथ ही हजारों उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला सामने आने लगेगा।
इन चुनावों में 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाएं शामिल हैं। कुल 10,167 वार्डों के परिणाम घोषित किए जाने हैं। चुनाव के दोनों चरणों में कुल 72.95 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जिसके बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि शहरों की सरकार पर किस दल का दबदबा रहेगा।
सुबह 8 बजे खुलेगा EVM का राज
राज्य निर्वाचन आयोग की तैयारियों के मुताबिक मतगणना सुबह 8 बजे शुरू होगी। पहले डाक मतपत्रों की गिनती की जाएगी और उसके बाद EVM के वोटों की गणना होगी। मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था भी की गई है।
आज के नतीजे केवल पार्षदों की जीत-हार तक सीमित नहीं रहेंगे। अलग-अलग निकायों में किस पार्टी को बहुमत मिलता है, कौन निर्दलीय मजबूत प्रदर्शन करता है और कहां बागी उम्मीदवार समीकरण बिगाड़ते हैं, इस पर भी राजनीतिक दलों की नजर रहेगी।
10 नगर निगमों पर सबसे ज्यादा नजर
राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर, भरतपुर, अलवर, भीलवाड़ा और पाली नगर निगमों के नतीजे सबसे ज्यादा चर्चा में हैं।
इन बड़े शहरों में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला दोनों दलों की शहरी राजनीतिक पकड़ का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। खासतौर पर राजधानी जयपुर का परिणाम पूरे प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन सकता है।
जयपुर के 150 वार्डों पर खास नजर
जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों के नतीजे आज सामने आएंगे। इसके साथ जयपुर जिले के अन्य 18 नगरीय निकायों के परिणाम भी घोषित होंगे। जिले में कुल 690 वार्ड हैं और मतगणना सुबह 8 बजे से शुरू होगी।
जयपुर में भाजपा और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों का प्रदर्शन भी महत्वपूर्ण रहेगा। कई वार्डों में त्रिकोणीय या बहुकोणीय मुकाबले के कारण अंतिम तस्वीर काफी दिलचस्प हो सकती है।

अलवर में दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
अलवर नगर निगम क्षेत्र में भाजपा की ओर से केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, कैबिनेट मंत्री संजय शर्मा, विधायक जसवंत यादव, रमेश खींची, देवी सिंह शेखावत, खुशवंत सिंह और महंत बालक नाथ जैसे नेताओं के प्रभाव की परीक्षा मानी जा रही है।
कांग्रेस की ओर से भंवर जितेंद्र सिंह, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली और अन्य स्थानीय नेताओं का प्रभाव भी चुनावी परिणामों में दिखाई दे सकता है।
भरतपुर में अलग समीकरण
भरतपुर को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले के तौर पर भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां भाजपा के साथ निर्दलीय और आरएलडी से जुड़े नेताओं का भी स्थानीय प्रभाव चर्चा में रहा है।
कांग्रेस की विधानसभा स्तर पर मौजूदगी को लेकर भी अलग समीकरण है। ऐसे में यहां के नगर निकाय परिणाम स्थानीय राजनीति की तस्वीर को नया संकेत दे सकते हैं।
जोधपुर में गहलोत के गढ़ की परीक्षा
जोधपुर में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं और विधायकों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की राजनीतिक पकड़ भी चर्चा में है।
शहरी निकाय चुनाव में वार्ड स्तर के समीकरण अक्सर विधानसभा चुनाव से अलग हो सकते हैं। इसलिए जोधपुर का परिणाम यह संकेत दे सकता है कि स्थानीय मुद्दों और संगठनात्मक ताकत के आधार पर शहर के मतदाताओं ने किसे प्राथमिकता दी।
कोटा और उदयपुर में भी कड़ा मुकाबला
कोटा में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर जैसे भाजपा नेताओं की मौजूदगी के कारण परिणाम पर विशेष नजर है। कांग्रेस की ओर से शांति धारीवाल सहित अन्य स्थानीय नेताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
उदयपुर में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबले के साथ स्थानीय नेतृत्व और वार्ड स्तर के समीकरण परिणाम तय करने में अहम हो सकते हैं।
बीकानेर, अजमेर और पाली में भी दिलचस्प तस्वीर
बीकानेर में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत भाजपा के कई प्रमुख नेताओं का प्रभाव है। कांग्रेस की ओर से स्थानीय संगठन और प्रत्याशियों के प्रदर्शन पर नजर रहेगी।
अजमेर में विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, मंत्री सुरेश रावत और अन्य भाजपा नेताओं की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई है। वहीं कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व की परीक्षा भी होगी।
पाली में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और अन्य वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक पकड़ पर भी परिणाम के जरिए नजर जाएगी।
भीलवाड़ा और भरतपुर के नतीजे भी अहम
भीलवाड़ा नगर निगम का परिणाम भी भाजपा-कांग्रेस के बीच शहरी समीकरण समझने में महत्वपूर्ण होगा। वहीं भरतपुर में स्थानीय नेताओं, निर्दलीयों और अन्य दलों के प्रदर्शन से बोर्ड बनाने का गणित प्रभावित हो सकता है।
नगर निकाय चुनाव में पार्षदों की संख्या के आधार पर बहुमत का गणित बनता है। इसलिए किसी एक पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिलने की स्थिति में निर्दलीय उम्मीदवारों की भूमिका बढ़ सकती है।
72.95% मतदान ने बढ़ाया सस्पेंस
राजस्थान के दोनों चरणों में कुल 72.95 प्रतिशत मतदान हुआ। पहले चरण में 76.41 प्रतिशत और दूसरे चरण में 70.68 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।
इतने बड़े मतदान के बाद अब राजनीतिक दल अपने-अपने आकलन के आधार पर जीत के दावे कर रहे हैं। हालांकि वास्तविक तस्वीर EVM खुलने के बाद ही साफ होगी।
आज सिर्फ नतीजे नहीं, आगे का बोर्ड भी तय होगा
आज पार्षद पदों के नतीजे आने के बाद नगर निकायों में बोर्ड बनाने की कवायद शुरू होगी। उपलब्ध चुनाव कार्यक्रम के अनुसार महापौर और सभापति के चुनाव 21 सितंबर को तथा उप महापौर, उप सभापति और नगरपालिकाओं के उपाध्यक्ष पदों के चुनाव 22 सितंबर को होंगे।
यानी आज के परिणाम के बाद भी राजनीतिक गतिविधियां पूरी तरह खत्म नहीं होंगी। बहुमत से दूर रहने वाले दलों के लिए निर्दलीय और अन्य विजयी पार्षद महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

