छत्रपति संभाजीनगर। महाराष्ट्र में MPSC की विभिन्न ऑनलाइन परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार चर्चा में है। अब इस मुद्दे को राजनीतिक समर्थन भी मिलता दिखाई दे रहा है। कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ खड़े होने का ऐलान किया है।
पार्टी ने MPSC के शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की घोषणा की है। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर राज्यभर में अभ्यर्थियों से मुलाकात कर आंदोलन को और मजबूत करने की चेतावनी भी दी गई है।
अभ्यर्थियों से मिले अभिजीत दीपके
CJP की ओर से यह घोषणा छत्रपति संभाजीनगर के वालुज इलाके में अभिजीत दीपके के घर पर MPSC की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के एक समूह से मुलाकात के बाद की गई।
बताया गया कि छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी अपनी चिंताएं और मांगें अभिजीत दीपके के सामने रखीं। अभ्यर्थियों ने कथित पेपर लीक और परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं को लेकर अपनी शिकायतें साझा कीं।
छात्रों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बेहद जरूरी है। उनका तर्क है कि हजारों अभ्यर्थी लंबे समय तक तैयारी करने के बाद परीक्षा में शामिल होते हैं, ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया को लेकर किसी भी तरह का संदेह उनके भविष्य को प्रभावित कर सकता है।
24 सितंबर तक का अल्टीमेटम
CJP ने अपने बयान में कहा है कि MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
पार्टी ने इसके लिए 24 सितंबर तक का समय दिया है। पार्टी के मुताबिक, अगर इस अवधि तक उनकी मांग पूरी नहीं होती है तो अभिजीत दीपके और CJP के अन्य सदस्य राज्यभर का दौरा करेंगे।
इस दौरान MPSC अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को समझने और आंदोलन को व्यापक स्तर पर मजबूत करने की बात कही गई है।
यानी अब यह मुद्दा केवल कुछ परीक्षा केंद्रों या स्थानीय प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय राज्यव्यापी अभियान का रूप ले सकता है।

‘इस्तीफा होने तक अभ्यर्थियों के साथ रहेंगे’
अभ्यर्थियों से मुलाकात के बाद अभिजीत दीपके ने एक वीडियो संदेश भी जारी किया।
उन्होंने कहा कि CJP और वह इस लड़ाई में MPSC अभ्यर्थियों के साथ हैं और तब तक उनके साथ खड़े रहेंगे, जब तक आयोग के शीर्ष अधिकारियों के इस्तीफे की मांग पूरी नहीं हो जाती।
इस बयान के बाद आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा और तेज हो गई है। हालांकि, छात्रों की ओर से उठाए गए पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं के आरोपों की जांच और आधिकारिक निष्कर्ष अलग विषय हैं।
क्या है छात्रों की मुख्य मांग?
MPSC अभ्यर्थियों की मुख्य चिंता परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को लेकर है। प्रदर्शनकारी कथित पेपर लीक और अलग-अलग परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं को लेकर जवाबदेही और कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी से मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो सकता है।
उनकी मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में प्रदर्शन
MPSC अभ्यर्थी राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन कर चुके हैं। आंदोलन के दौरान परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, जवाबदेही और उम्मीदवारों के हितों से जुड़े मुद्दे उठाए जा रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए MPSC की परीक्षाएं सरकारी सेवा में जाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इसलिए परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ा कोई भी विवाद बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को प्रभावित कर सकता है।
यही वजह है कि अब छात्रों के आंदोलन के साथ राजनीतिक संगठन के जुड़ने से इस मामले का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
सरकार और आयोग के सामने चुनौती
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 24 सितंबर तक सरकार और MPSC की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। यदि छात्रों की मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो CJP के राज्यव्यापी दौरे और आंदोलन को समर्थन देने के ऐलान से मामला और गरमा सकता है।
दूसरी ओर, कथित पेपर लीक और परीक्षा अनियमितताओं से जुड़े आरोपों पर तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित संस्थाओं की ओर से जांच और आधिकारिक जानकारी महत्वपूर्ण होगी।
अभ्यर्थियों के लिए सबसे अहम मुद्दा यही है कि परीक्षा प्रक्रिया पर उनका भरोसा कायम रहे और भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़े।
