पटना। बिहार में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का गुस्सा एक बार फिर सड़क पर दिखाई दिया। दारोगा भर्ती, BPSC 70वीं परीक्षा, BSSC समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़ी 13 सूत्री मांगों को लेकर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पटना में मार्च निकाला। गांधी मैदान से राजभवन की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास रोक दिया, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारी कई भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, लंबित प्रक्रियाओं को जल्द पूरा करने और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। 13 सूत्री मांगों में 1,799 पदों वाली सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को रद्द करने और BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा दोबारा कराने की मांग भी शामिल है।
जेपी गोलंबर पर पुलिस ने रोका, बैरिकेडिंग पर चढ़े छात्र
गांधी मैदान से राजभवन की तरफ बढ़ रहे अभ्यर्थियों को जेपी गोलंबर के पास पुलिस और सुरक्षा बलों ने रोक दिया। प्रदर्शनकारियों को आगे जाने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी।
रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थी बैरिकेडिंग के ऊपर चढ़ गए और आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बन गई। आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोकने की कार्रवाई भी की।
इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारी एग्जीबिशन रोड होते हुए डाक बंगला चौराहे की ओर बढ़े। वहां भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और भारी बैरिकेडिंग के जरिए प्रदर्शनकारियों को आगे जाने से रोका गया।
1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती पर सबसे ज्यादा नाराजगी
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में बिहार पुलिस की 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती भी शामिल है। अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर सवाल उठा रहे हैं और परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, दारोगा भर्ती को लेकर हालिया रिपोर्टों में एक अन्य प्रमुख मुद्दा PET की तारीख में देरी भी सामने आया है। 1 सितंबर की रिपोर्ट में बताया गया था कि अभ्यर्थी 1,799 पदों वाली भर्ती के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा की तारीख जल्द घोषित करने की मांग को लेकर गांधी मैदान में प्रदर्शन कर चुके हैं।
इससे साफ है कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की नाराजगी केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं है, बल्कि वे पूरी प्रक्रिया में स्पष्टता और समयबद्धता चाहते हैं।
BPSC 70वीं परीक्षा दोबारा कराने की मांग
छात्र संगठनों की 13 सूत्री मांगों में BPSC 70वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा दोबारा कराने की मांग भी शामिल है।
अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षा में अनियमितताएं हुईं और इसकी निष्पक्ष जांच की जरूरत है। इसी आधार पर वे परीक्षा को दोबारा कराने की मांग कर रहे हैं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को अंतिम तथ्य नहीं माना जा सकता। किसी भी कथित अनियमितता की वास्तविक स्थिति संबंधित जांच और आधिकारिक निष्कर्षों के आधार पर ही तय होगी।
BSSC समेत कई लंबित भर्तियां भी मुद्दे में
आंदोलन का दायरा केवल दारोगा भर्ती और BPSC तक सीमित नहीं है। प्रदर्शनकारी BSSC की लंबित परीक्षाओं, BET और अन्य भर्ती प्रक्रियाओं को भी जल्द पूरा कराने की मांग कर रहे हैं।
छात्र संगठनों की ओर से परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र, आंसर की और OMR शीट उपलब्ध कराने, नियमित भर्ती कैलेंडर जारी करने और पेपर लीक या परीक्षा में अनियमितता के मामलों में कार्रवाई जैसी मांगें भी रखी गई हैं।
13 सूत्री मांगों में पारदर्शिता पर जोर
अभ्यर्थियों की मांगों में परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने पर खास जोर दिखाई देता है।
उनकी प्रमुख मांगों में:
- BPSC 70वीं परीक्षा दोबारा कराने की मांग
- 1,799 पदों वाली दारोगा भर्ती परीक्षा रद्द करने की मांग
- BSSC की लंबित परीक्षाओं को जल्द कराने की मांग
- भर्ती परीक्षाओं के बाद प्रश्नपत्र और आंसर की जारी करना
- OMR शीट उपलब्ध कराने की व्यवस्था
- निश्चित वार्षिक भर्ती कैलेंडर
- पेपर लीक और कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई
- भर्ती में उम्र सीमा को लेकर स्पष्ट नीति
- डोमिसाइल नीति को स्पष्ट करने की मांग
- लंबित नियुक्तियों को जल्द पूरा करने की मांग
जैसी मांगें शामिल बताई गई हैं।
‘सिर्फ जांच का आश्वासन नहीं, चाहिए ठोस कार्रवाई’
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें बार-बार जांच का आश्वासन मिलता है, लेकिन भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो रहा।
छात्रों का तर्क है कि सरकारी नौकरी की तैयारी में अभ्यर्थी वर्षों का समय और पैसा लगाते हैं। ऐसे में परीक्षा की तारीख, परिणाम, नियुक्ति और भर्ती प्रक्रिया में देरी उनके भविष्य पर सीधा असर डालती है।
इसी वजह से प्रदर्शनकारी समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
रोमित के परिवार ने भी उठाई न्याय की मांग
प्रदर्शन के दौरान रोमित के परिजनों के शामिल होने की बात भी सामने आई। परिवार ने प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग करते हुए सरकार से न्याय की अपील की।
परिवार की ओर से यह भावनात्मक अपील की गई कि भविष्य में किसी दूसरे परिवार को ऐसी पीड़ा से न गुजरना पड़े। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों ने भी परिवार के लिए आर्थिक सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई है।
रोमित की मौत को लेकर परिवार और प्रदर्शनकारियों ने भर्ती व्यवस्था से जुड़े तनाव तथा कथित अनियमितताओं पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की मौत के कारणों को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही निकाला जाना चाहिए।
आंदोलन आगे बढ़ने की चेतावनी
अभ्यर्थियों ने साफ किया है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ठोस फैसला नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।
बिहार में पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अलग-अलग छात्र समूह प्रदर्शन कर रहे हैं। अगस्त में भी 13 सूत्री मांगों को लेकर पटना में बड़ा छात्र आंदोलन सामने आया था।
ऐसे में सरकार के सामने चुनौती सिर्फ एक भर्ती परीक्षा का समाधान करने की नहीं, बल्कि विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े छात्रों की शिकायतों के लिए भरोसेमंद और पारदर्शी व्यवस्था बनाने की भी है।

