कुलां। हरियाणा के कुलां क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने ग्रामीणों और स्थानीय प्रशासन को हैरान कर दिया। 51 वर्षीय राजमिस्त्री गुरमेल सिंह उर्फ गेलीराम करीब 10 दिन तक लापता रहने के बाद धारसूल कलां अनाज मंडी परिसर में बने एक खुले सीवरेज टैंक में जीवित मिले।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि वह करीब 20 फीट गहरे और लगभग 10 फीट चौड़े टैंक में कई दिनों तक फंसे रहे। सोमवार सुबह टैंक की तरफ से आवाज आने के बाद ग्रामीणों को उनके वहां होने का पता चला। इसके बाद रस्सियों की मदद से उन्हें बाहर निकाला गया और टोहाना नागरिक अस्पताल ले जाया गया।
अस्पताल में जांच के बाद उनकी हालत सामान्य बताई गई। फिलहाल वह अपने घर पर हैं।
झाड़ियों के पीछे बने कमरे में खुला था टैंक
जानकारी के मुताबिक, धारसूल कलां अनाज मंडी में झाड़ियों के पीछे एक कमरा बना हुआ है। इसी कमरे के भीतर सीवरेज टैंक मौजूद था। बताया गया कि कमरे का दरवाजा टूटा हुआ था और टैंक खुला पड़ा था।
यही व्यवस्था अब सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है। धारसूल मार्केट कमेटी प्रशासन ने घटना का संज्ञान लिया है। मार्केट कमेटी सचिव ईश्वर ढाका के अनुसार, टैंक को जल्द स्थायी रूप से बंद किया जाएगा, ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटना दोबारा न हो।
कैसे जिंदा रहे? सवाल का जवाब अभी साफ नहीं
गेली राम के इतने दिनों तक टैंक में रहने की परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं। उनके परिवार के अनुसार, वह यह याद नहीं कर पा रहे कि वह वहां कैसे पहुंचे और टैंक में कैसे गिरे।
परिवार के मुताबिक, उन्हें घटना के पिछले करीब 10 दिनों की स्पष्ट जानकारी भी याद नहीं है। ऐसे में वह किस परिस्थिति में टैंक तक पहुंचे, यह पुलिस और प्रशासनिक जांच के लिए महत्वपूर्ण सवाल हो सकता है।
हालांकि, स्थानीय जानकारी के अनुसार मंडी में सीवरेज लाइन नहीं है। खरीद सीजन में शौचालयों के इस्तेमाल के बाद सीवरेज टैंक की सफाई कराई जाती है। घटना के समय टैंक में पानी और गंदगी की मात्रा बहुत कम होने की बात भी सामने आई है।
इसी वजह से टैंक के अंदर की वास्तविक परिस्थितियों और उनके इतने समय तक जीवित रहने के कारणों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। बिना चिकित्सकीय और परिस्थितिजन्य जांच के इसका कोई निश्चित कारण बताना संभव नहीं है।
चार महीने पहले हादसे के बाद बदली थी स्थिति
स्वजन के अनुसार, करीब चार महीने पहले गेली राम साइकिल से काम पर जा रहे थे, तभी वह एक कार की चपेट में आ गए थे। हादसे में उन्हें गंभीर चोटें आई थीं। परिवार का कहना है कि इसके बाद उनकी मानसिक स्थिति में बदलाव आया और उन्होंने काम पर जाना भी बंद कर दिया था।
परिवार ने यह भी बताया कि करीब तीन साल पहले उन्हें मानसिक परेशानी हुई थी और उनका इलाज कराया गया था। वर्तमान घटना के संदर्भ में परिवार ने उनकी मानसिक स्थिति को भी महत्वपूर्ण बताया है।
हालांकि, उनके टैंक तक पहुंचने और वहां गिरने की वास्तविक परिस्थितियां अभी स्पष्ट नहीं हैं।
5 सितंबर को घर से निकले, फिर नहीं लौटे
गेली राम के भाई मेला राम के मुताबिक, 5 सितंबर को परिवार गोगा मेड़ी धाम गया था। इसी दौरान गेली राम घर से निकल गए, लेकिन वापस नहीं लौटे।
परिजनों ने कुलां पुलिस चौकी में गुमशुदगी की सूचना दी। इसके बाद परिवार और रिश्तेदारों ने कई जगह तलाश शुरू की। पटियाला के मंदिर, खाटू श्याम और गोगा मेड़ी समेत धार्मिक स्थलों पर भी उन्हें खोजा गया।
आसपास की नहरों में गोताखोरों की मदद से तलाश की गई, लेकिन कई दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला।
10वें दिन एक आवाज ने बदल दी पूरी कहानी
सोमवार सुबह तलाश के दौरान परिवार के चचेरे भाई दलबारा सिंह और अन्य लोग आसपास मौजूद थे। इसी बीच झाड़ियों की ओर बने कमरे के पास से आवाज सुनाई दी।
लोगों ने ध्यान से देखा तो आवाज सीवरेज टैंक की तरफ से आ रही थी। जब ग्रामीणों ने नीचे देखा तो गेली राम वहां मौजूद मिले।
इसके बाद स्थानीय लोगों ने रस्सियों की मदद से उन्हें बाहर निकाला। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां जांच के बाद उनकी हालत सामान्य बताई गई।
घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए सवाल
गेली राम के सुरक्षित मिलने से परिवार को राहत जरूर मिली, लेकिन इस घटना ने सार्वजनिक स्थानों पर खुले और असुरक्षित सीवरेज टैंकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस स्थान पर लोगों की आवाजाही होती है, वहां सीवरेज टैंक इतने समय तक खुला कैसे रहा। मार्केट कमेटी द्वारा टैंक को स्थायी रूप से बंद करने की बात सामने आने के बाद अब यह देखना होगा कि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
फिलहाल गेली राम घर लौट चुके हैं और परिवार उनके साथ है। वहीं, वह टैंक तक कैसे पहुंचे और करीब 10 दिनों तक वहां किन परिस्थितियों में रहे—इन सवालों का पूरा जवाब अभी सामने आना बाकी है।

