जयपुर: राजस्थान में नगरीय निकायों के प्रमुख पदों के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के साथ ही पुलिस प्रशासन ने भी सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी है। नगर निगमों में मेयर और नगर परिषद व नगर पालिकाओं में सभापति-अध्यक्ष पदों के लिए होने वाली चुनावी प्रक्रिया को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस की ओर से राजस्थान आर्म्ड कॉन्स्टेबुलरी यानी RAC और स्पेशल टास्क फोर्स यानी STF की अतिरिक्त कंपनियां भी उपलब्ध कराई गई हैं।
वार्ड चुनाव के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में पहले पार्षदों के चुनाव कराए गए थे। इसके बाद अब निकायों के प्रमुख पदों के लिए मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई है। पार्षदों के चुनाव परिणाम आने के बाद कई निकायों में बोर्ड बनाने को लेकर राजनीतिक दलों के बीच गतिविधियां तेज हुईं। कुछ निकायों में निर्दलीय पार्षदों की संख्या भी महत्वपूर्ण है, जिसके चलते अध्यक्ष और मेयर पद के चुनाव में उनके वोट पर विशेष नजर रही।
इसी राजनीतिक खींचतान के बीच कुछ स्थानों पर पार्षदों पर दबाव बनाने और धमकी से जुड़े आरोप भी सामने आए हैं। पुलिस प्रशासन ने इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील निकायों में सुरक्षा बढ़ाने का फैसला किया है। हालांकि, अलग-अलग स्थानों पर लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगी।
273 निकायों में अध्यक्ष और मेयर पदों पर चुनाव
राज्य में सोमवार को कुल 273 नगरीय निकायों के प्रमुख पदों के लिए चुनाव प्रक्रिया निर्धारित की गई थी। इनमें पांच नगर निगम भी शामिल हैं। इन नगर निगमों में उदयपुर, बीकानेर, अलवर, पाली और अजमेर के मेयर पद के लिए चुनाव होना था। इसके अलावा नगर परिषद सभापति और नगर पालिका अध्यक्ष पदों के लिए भी मतदान कराया गया। मतदान सुबह 10 बजे से शुरू होने की जानकारी दी गई थी।
राजस्थान के कुछ निकायों में अध्यक्ष पहले ही निर्विरोध चुने जा चुके हैं। वहीं कुछ निकायों में तकनीकी कारणों और पुनर्मतदान की वजह से चुनाव की तारीख बाद में निर्धारित की गई है। जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम समेत कुछ निकायों के लिए चुनाव 25 सितंबर को होने हैं।
पुलिस अधिकारियों को दिए गए विशेष निर्देश
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस कानून एवं व्यवस्था वीके सिंह की ओर से जिला पुलिस अधीक्षकों, रेंज आईजी और पुलिस आयुक्तों को चुनाव के दौरान पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला स्तर पर उपलब्ध पुलिस बल की समीक्षा कर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त जवानों की तैनाती करने को कहा गया है।
संवेदनशील माने जा रहे निकायों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए RAC और STF की अतिरिक्त कंपनियां लगाने की व्यवस्था की गई है। पुलिस अधिकारियों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने के लिए भी तैयार रहने को कहा गया है।
क्रॉस वोटिंग और पार्षदों पर नजर
मेयर और अध्यक्ष पदों के चुनाव में पार्षदों के वोट निर्णायक होते हैं। इसी वजह से राजनीतिक दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश करते रहे हैं। कुछ स्थानों पर पार्षदों की बाड़ेबंदी की खबरें भी सामने आईं। जहां निर्दलीय पार्षदों की संख्या अधिक है, वहां चुनावी समीकरण और अधिक जटिल हो गए हैं।
राजनीतिक दलों की ओर से क्रॉस वोटिंग की आशंका को लेकर भी निगरानी की बात सामने आई है। हालांकि किसी विशेष उम्मीदवार या दल के पक्ष में परिणाम को लेकर अनुमान लगाना उचित नहीं होगा, क्योंकि मेयर और अध्यक्ष पद के चुनाव में मतदान के दौरान पार्षदों का वास्तविक रुख ही अंतिम परिणाम तय करता है।
राजस्थान हाईकोर्ट में देर रात तक सुनवाई
चुनाव से ठीक पहले कुछ पार्षदों से जुड़े मामलों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में भी देर रात तक सुनवाई हुई। रिपोर्टों के अनुसार, अदालत ने हनुमानगढ़ के नौ पार्षदों और बीकानेर के एक पार्षद को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया। यह सुनवाई चुनाव से पहले सामने आए कानूनी विवादों के बीच हुई।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस प्रशासन का मुख्य जोर चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण तरीके से पूरा कराने पर है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल की मौजूदगी और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी के जरिए किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस ने की शांतिपूर्ण चुनाव में सहयोग की अपील
पुलिस प्रशासन ने लोगों से चुनाव प्रक्रिया में सहयोग करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों के निर्देश हैं कि मतदान के दौरान किसी भी तरह की बाधा या विवाद की स्थिति पैदा न हो। संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात पुलिस बल स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तत्काल कार्रवाई कर सकता है।

