जयपुर: राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव की प्रक्रिया के बाद अब गांवों की सरकार के चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से आरक्षण लॉटरी का इंतजार कर रहे संभावित उम्मीदवारों के लिए 23 और 24 सितंबर 2026 की तारीख बेहद महत्वपूर्ण है। इन दो दिनों में अलग-अलग स्तर पर सीटों के आरक्षण की तस्वीर सामने आएगी और इसके बाद कई दावेदारों की चुनावी रणनीति बदल सकती है।
23 सितंबर को किन सीटों का होगा फैसला?
राज्य सरकार के तय कार्यक्रम के मुताबिक 23 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर जिला परिषद सदस्यों, पंचायत समिति सदस्यों और पंचायत समिति प्रधान पदों के लिए आरक्षण की लॉटरी होगी। प्रदेश स्तर पर 1,403 जिला परिषद सदस्य, 8,245 पंचायत समिति सदस्य और 457 प्रधान पदों के लिए आरक्षण तय किया जाना है। जिला प्रमुख पदों की आरक्षण लॉटरी पहले ही 13 अगस्त को पूरी की जा चुकी है।
यानी 23 सितंबर की प्रक्रिया के बाद यह साफ होना शुरू हो जाएगा कि किन क्षेत्रों में कौन-सी सीट महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग या सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित होगी।
जयपुर में 57 जिला परिषद सीटों पर नजर
राजधानी जयपुर में भी आरक्षण लॉटरी को लेकर खास हलचल है। यहां बुधवार 23 सितंबर को जिला कलेक्ट्रेट में सुबह 10:15 बजे लॉटरी प्रक्रिया शुरू होने की जानकारी दी गई है।
जयपुर जिले में 57 जिला परिषद सदस्य, 22 पंचायत समिति प्रधान और 386 पंचायत समिति सदस्य पदों के आरक्षण का निर्धारण होना है। जिले में कुल 22 पंचायत समितियां और 597 ग्राम पंचायतें हैं। इन पदों में 50 प्रतिशत आरक्षण महिलाओं के लिए निर्धारित है।
इसका सीधा असर उन लोगों की उम्मीदवारी पर पड़ सकता है जो लंबे समय से किसी खास सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। अगर सीट की आरक्षण श्रेणी बदलती है तो संभावित उम्मीदवारों को अपना क्षेत्र या रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

जयपुर में आरक्षण का संभावित गणित
उपलब्ध जानकारी के अनुसार जयपुर जिला परिषद की 57 सीटों में आबादी के आधार पर 10 सीटें अनुसूचित जाति (SC), 8 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) और 10 सीटें OBC के लिए आरक्षित किए जाने का प्रावधान बताया गया है। बाकी 29 सीटों में सामान्य श्रेणी की सीटें होंगी, जिनमें 15 सामान्य पुरुष और 14 सामान्य महिला सीटों का उल्लेख किया गया है।
इसी तरह 22 पंचायत समिति प्रधान पदों में 4 SC, 3 ST, 4 OBC और 11 सामान्य श्रेणी के पद बताए गए हैं। प्रधान पदों में भी महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू होगा। हालांकि अंतिम सीटवार स्थिति लॉटरी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
24 सितंबर को सरपंच और वार्ड पंचों की बारी
23 सितंबर की प्रक्रिया के बाद अगले दिन यानी 24 सितंबर को उपखंड स्तर पर ग्राम पंचायतों के सरपंच और वार्ड पंच पदों के लिए आरक्षण लॉटरी निकाली जाएगी।
जयपुर जिले की 597 ग्राम पंचायतों के सरपंच और 5,931 वार्ड पंच पदों की आरक्षण स्थिति 24 सितंबर को संबंधित उपखंड अधिकारी मुख्यालयों पर तय की जाएगी।
यही वह चरण होगा जिसका इंतजार गांवों में संभावित उम्मीदवार सबसे ज्यादा कर रहे हैं। सरपंच और वार्ड पंच की सीट की श्रेणी सामने आते ही कई गांवों में उम्मीदवारों की दावेदारी स्पष्ट हो सकती है।
पहले क्यों टली थी आरक्षण लॉटरी?
राजस्थान में पंचायत चुनाव की आरक्षण लॉटरी पहले भी टाली जा चुकी है। पहले 17 सितंबर को जिला परिषद सदस्य, पंचायत समिति सदस्य और प्रधान पदों तथा 18 सितंबर को सरपंच-वार्ड पंचों के लिए प्रक्रिया प्रस्तावित थी। लेकिन शहरी निकाय चुनाव में प्रशासनिक अधिकारियों की व्यस्तता के चलते कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया। इससे पहले अगस्त में भी आरक्षण लॉटरी स्थगित हुई थी।
अब 23-24 सितंबर की नई तारीख तय होने के बाद ग्रामीण इलाकों में चुनावी तैयारियां फिर तेज हो गई हैं।
आरक्षण के बाद क्या होगा?
आरक्षण लॉटरी पूरी होने के बाद संभावित उम्मीदवारों के सामने अपनी सीट की वास्तविक स्थिति साफ हो जाएगी। इसके बाद राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायत चुनाव का विस्तृत कार्यक्रम जारी किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने का लक्ष्य है। राजस्थान पंचायती राज चुनावों को लेकर हाईकोर्ट के निर्देशों के कारण भी चुनाव प्रक्रिया को समय पर आगे बढ़ाने पर जोर है। हालांकि चुनाव की अंतिम तारीखों और चरणों की आधिकारिक घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से ही की जाएगी।
गांवों में बदल सकता है चुनावी समीकरण
आरक्षण की श्रेणी सामने आने के बाद जिन सीटों पर लंबे समय से दावेदार तैयारी कर रहे हैं, उनमें से कुछ की उम्मीदवारी प्रभावित हो सकती है। वहीं आरक्षित श्रेणी में आने वाली सीटों पर नए उम्मीदवारों के लिए रास्ता खुल सकता है।
यही वजह है कि 23 और 24 सितंबर की लॉटरी को राजस्थान के ग्रामीण राजनीतिक परिदृश्य के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि किसी उम्मीदवार की जीत या हार का अनुमान केवल आरक्षण श्रेणी देखकर लगाना उचित नहीं होगा। वास्तविक चुनावी तस्वीर उम्मीदवार, स्थानीय समीकरण, मतदाताओं और चुनाव परिणामों के बाद ही सामने आएगी।

