अयोध्या: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़े बहुचर्चित चोरी और कथित गबन मामले में जांच के बाद पुलिस ने अदालत में एक बेहद बड़ी चार्जशीट दाखिल की है। बुधवार को आठ आरोपियों के खिलाफ 73,480 पन्नों का आरोप पत्र अदालत पहुंचा। चार बड़े बक्सों में लाई गई इस चार्जशीट में जांच से जुड़े दस्तावेज, साक्ष्य, गवाहों के बयान और डिजिटल सामग्री शामिल है। मामले में सबसे बड़ा तथ्य यह है कि जांच के दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संबंधित बैंक को क्लीन चिट दी गई है। वहीं ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और मंदिर व्यवस्था से जुड़े रहे गोपाल राव को सरकारी गवाह बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
चार बड़े बक्सों में पहुंची हजारों पन्नों की चार्जशीट
जांच पूरी होने के बाद पुलिस अधिकारी अदालत पहुंचे और आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया। रिपोर्ट के अनुसार चार्जशीट के शुरुआती करीब 59 पन्नों में मामले के मुख्य बिंदुओं का उल्लेख है, जबकि बाकी दस्तावेजों में जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य, आरोपियों के बयान और गवाहों से जुड़ी सामग्री शामिल है।
मामले में आठ आरोपियों को नामजद किया गया था। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। इनके खिलाफ अलग-अलग धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है।
105 घटनाओं और 173 गवाहों का जिक्र
चार्जशीट में पुलिस ने जांच के दौरान सामने आई 105 कथित चोरी की घटनाओं से जुड़े CCTV फुटेज का उल्लेख किया है। इसके अलावा जांच एजेंसी ने करीब 173 गवाहों के बयान दर्ज किए। पुलिस ने आरोपियों के बीच हुई बातचीत से जुड़े लगभग 3,300 संदेशों को भी जांच का हिस्सा बनाया है।
पुलिस के अनुसार, जांच में अनुकल्प मिश्र को कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है। चार्जशीट में आरोप है कि वह अन्य लोगों के माध्यम से चोरी करवाता था और कथित तौर पर रकम के बंटवारे की व्यवस्था की जाती थी। हालांकि ये पुलिस जांच में दर्ज आरोप हैं और इनका अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों के आधार पर होगा।

चंपत राय, अनिल मिश्र और गोपाल राव पर क्या हुआ?
इस मामले में शुरुआत से ही राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ पदाधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठते रहे थे। लेकिन चार्जशीट में पुलिस ने ट्रस्ट पदाधिकारियों को साक्ष्य के अभाव में क्लीन चिट दी है। पूर्व महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव को सरकारी गवाह बनाए जाने की जानकारी सामने आई है।
इसका अर्थ यह है कि चार्जशीट में इन लोगों को आठ आरोपियों की सूची में आरोपी के रूप में शामिल नहीं किया गया है। अदालत ने अब इस चार्जशीट का संज्ञान लिया है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया इसी के आधार पर आगे बढ़ेगी।
दानपात्र की चाबियों से लेकर श्रद्धालुओं से पैसे लेने का आरोप
चार्जशीट में आरोपी टिन्नू यादव की भूमिका का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, उसके पास बिना किसी औपचारिक आदेश के दानपात्रों की चाबियां होने की बात सामने आई। उस पर आरोप है कि वह श्रद्धालुओं को दर्शन कराने के नाम पर पैसे लेता था।
जांच में उसके अन्य आर्थिक गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया है। पुलिस के अनुसार, वाहन किराये पर चलाने से उसे कथित तौर पर लगभग 90 हजार रुपये मासिक आय होती थी। इन दावों की जांच चार्जशीट में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की गई है।
कीमती आभूषण गायब होने की बात को पुलिस ने नकारा
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में सोशल मीडिया और अलग-अलग चर्चाओं के बीच मंदिर से कीमती आभूषण गायब होने की बातें भी सामने आती रही थीं। हालांकि पुलिस की चार्जशीट के अनुसार कीमती आभूषणों के गायब होने की बात जांच में प्रमाणित नहीं हुई।
मामले का मुख्य फोकस चढ़ावे की नकदी और उससे जुड़े कथित अनियमित लेनदेन पर रहा। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों से बरामदगी और बैंकिंग लेनदेन को भी जांच में शामिल किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार सात आरोपियों से कुल करीब 79.8 लाख रुपये की रिकवरी का उल्लेख किया गया है।
किन धाराओं में हुई कार्रवाई?
चार्जशीट में आपराधिक न्यासभंग, चोरी की संपत्ति रखने या उसके निपटारे में मदद करने, आपराधिक साजिश और साझा मंशा से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार धारा 316(5) को गंभीर प्रावधानों में शामिल किया गया है, जो जिम्मेदारी के तहत सौंपी गई संपत्ति के कथित गबन या दुरुपयोग से संबंधित है। इसके अलावा धारा 317(4), 317(5), 61 और 3(5) से जुड़े प्रावधान भी लगाए गए हैं।
इन धाराओं का वास्तविक कानूनी प्रभाव और आरोपियों की जिम्मेदारी अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों तथा न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी।
चार्जशीट दाखिल होते ही कोर्ट परिसर में बढ़ी हलचल
चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत परिसर में भी गहमागहमी देखने को मिली। कुछ अधिवक्ताओं ने कार्य बहिष्कार किया और मामले में पहले उनकी आपत्तियां सुने जाने की मांग की। अधिवक्ताओं की ओर से ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ FIR की मांग पहले भी की गई थी।
अब जांच एजेंसी द्वारा चार्जशीट दाखिल किए जाने के बाद मामले का अगला चरण न्यायिक प्रक्रिया है। अदालत आरोपों और साक्ष्यों की जांच करेगी तथा आगे की कार्रवाई कानून के मुताबिक होगी।

