नई दिल्ली: नए वोटरों को मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए इस्तेमाल होने वाला Form 6 इन दिनों चुनाव आयोग से जुड़े विवाद के केंद्र में है। जुलाई 2026 में ऑनलाइन Form 6 में SIR यानी Special Intensive Revision से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा सामने आने के बाद चुनाव आयोग के भीतर भी इस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे। अब इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नए वोटरों से क्या जानकारी मांगी गई और चुनाव आयोग इसे Form 6 में बदलाव मानता है या अतिरिक्त घोषणा-पत्र?
सबसे पहले समझिए Form 6 क्या है?
Form 6 का इस्तेमाल मुख्य रूप से नए मतदाता के रूप में नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए किया जाता है। कोई व्यक्ति 18 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद पात्र होने पर इस फॉर्म के जरिए वोटर लिस्ट में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकता है।
फॉर्म में आवेदक से सामान्य तौर पर उसकी व्यक्तिगत जानकारी, उम्र और पते से संबंधित विवरण मांगे जाते हैं। यही वजह है कि Form 6 में किसी भी अतिरिक्त जानकारी या प्रक्रिया को लेकर उठे सवाल सीधे नए मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया से जुड़े माने जा रहे हैं।
विवाद किस सवाल को लेकर है?
जुलाई में ECINet के ऑनलाइन संस्करण में Form 6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणा दिखाई दी। इसमें आवेदक से यह जानकारी मांगी गई कि क्या वह स्वयं या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में दर्ज थे।
रिपोर्टों के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन में इस जानकारी का जवाब दिए बिना आगे बढ़ना संभव नहीं था। यही बिंदु चुनाव आयोग के भीतर आपत्ति का कारण बना।
दो चुनाव आयुक्तों ने क्या आपत्ति जताई?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस अतिरिक्त घोषणा को लेकर आपत्ति दर्ज की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि दोनों ने सवाल उठाया कि Registration of Electors Rules, 1960 में संशोधन के बिना Form 6 में इस तरह की नई आवश्यकता कैसे जोड़ी जा सकती है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के विभिन्न फैसलों को लेकर कई बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज की हैं। इनमें नए वोटरों के पंजीकरण, मतदाता नाम हटाने और SIR से जुड़े मुद्दे भी शामिल बताए गए हैं।
हालांकि, इन आपत्तियों का होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित प्रक्रिया अवैध है। इस विषय पर अलग-अलग पक्षों की कानूनी व्याख्या सामने आई है।
चुनाव आयोग ने क्या सफाई दी?
विवाद बढ़ने के बाद चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि Form 6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
ECI के अनुसार, मूल और स्वीकृत Form 6 वही है। SIR से संबंधित जानकारी के लिए उसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा-पत्र यानी Annexure D जोड़ा गया है। आयोग ने अपने पुराने SIR निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि नए मतदाता के आवेदन के साथ अतिरिक्त घोषणा-पत्र भरने का प्रावधान पहले से निर्देशों में शामिल था।
यानी विवाद का एक बड़ा हिस्सा इस तकनीकी अंतर पर केंद्रित है कि इसे Form 6 में बदलाव माना जाए या Form 6 के साथ अतिरिक्त दस्तावेज की आवश्यकता।

SIR से इसका संबंध क्या है?
SIR का उद्देश्य चुनाव आयोग के अनुसार मतदाता सूची की समीक्षा और उसे अपडेट करना है। इस प्रक्रिया के दौरान पुराने रिकॉर्ड, मतदाताओं की पात्रता और दस्तावेजों से जुड़े सवाल सामने आए हैं।
Form 6 में जोड़ी गई घोषणा का संबंध इसी पुराने चुनावी रिकॉर्ड से है। इसका मकसद यह पता लगाना है कि नए आवेदनकर्ता या उसके परिवार का पिछली SIR की मतदाता सूची से कोई संबंध रहा है या नहीं।
विवाद सिर्फ Form 6 तक सीमित नहीं
Form 6 का विवाद चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर सामने आए व्यापक सवालों का भी हिस्सा बन गया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दो चुनाव आयुक्तों ने ECINet और मतदाता डेटा के प्रबंधन सहित कई मामलों पर आपत्तियां दर्ज कीं।
वहीं चुनाव आयोग ने कहा है कि Electoral Registration Officer यानी ERO के पास मतदाता सूची तैयार करने और उसमें सुधार करने की कानूनी जिम्मेदारी बनी हुई है। आयोग ने यह भी कहा कि ECINet एक सुविधा देने वाला प्लेटफॉर्म है और अंतिम मतदाता सूची तैयार करने का अधिकार ERO के पास है।
नए वोटरों के लिए इसका क्या मतलब है?
फिलहाल नए मतदाता के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि Form 6 भरते समय मांगी गई सभी जानकारी को सही तरीके से देना होगा। SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा लागू होने की स्थिति में आवेदक को उसमें मांगी गई जानकारी भी देनी पड़ सकती है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कानूनी और प्रशासनिक सवाल उठे हैं। इसलिए नए आवेदकों के लिए चुनाव आयोग की नवीनतम आधिकारिक गाइडलाइन और संबंधित निर्वाचन अधिकारी के निर्देशों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण रहेगा।

