जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में आयोजित एक खास फिल्म और सांस्कृतिक कार्यक्रम उस वक्त अचानक सुर्खियों में आ गया, जब अभिनेत्री ममता कुलकर्णी मंच पर पहुंचीं और विद्यार्थियों के बीच खुद डांस करने लगीं। मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में आयोजित आरएफएफ सोशल स्पॉटलाइट 2026 और इंटर स्कूल-कॉलेज प्रतियोगिता के फिनाले में ममता कुलकर्णी की मौजूदगी ने कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह बदल दिया। कार्यक्रम में विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों के साथ सोशल मीडिया क्षेत्र में काम करने वाले क्रिएटर्स को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान ममता कुलकर्णी ने सिर्फ विजेताओं को पुरस्कार नहीं दिए, बल्कि विद्यार्थियों के साथ मंच पर कदम भी मिलाए। जैसे ही उनके चर्चित फिल्मी गीतों की धुन बजाई गई, वह खुद को डांस करने से रोक नहीं पाईं। इसके बाद उन्होंने विद्यार्थियों के साथ जमकर डांस किया और कार्यक्रम में मौजूद दर्शकों ने तालियों के साथ उनका उत्साह बढ़ाया।
पुराने फिल्मी गानों पर दिखा ममता का अंदाज
ममता कुलकर्णी ने अपने चर्चित फिल्मी गीतों पर डांस किया। इनमें ‘कोई जाए तो ले आए’, ‘एक मुंडा मेरी उम्र का’ और ‘लंबा-लंबा घूंघट काहे को डाला’ जैसे गाने शामिल रहे। कुछ रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने ‘भंगड़ा पाले’ गीत पर भी विद्यार्थियों के साथ डांस किया। उनकी प्रस्तुति के दौरान छात्र-छात्राएं भी उत्साह के साथ उनके साथ शामिल हो गए।
इस दौरान ऑडिटोरियम तालियों और उत्साह से गूंज उठा। खास बात यह रही कि कार्यक्रम में ममता कुलकर्णी ने केवल मनोरंजन तक अपनी भूमिका सीमित नहीं रखी, बल्कि विद्यार्थियों से बातचीत कर उन्हें कला और करियर को लेकर कुछ महत्वपूर्ण बातें भी कहीं।
‘डांस और एक्टिंग को साधना की तरह करें’
ममता कुलकर्णी ने विद्यार्थियों को सलाह देते हुए कहा कि डांस हो या एक्टिंग, इसे केवल मनोरंजन के तौर पर नहीं देखना चाहिए। उन्होंने इसे साधना की तरह करने और लगातार अभ्यास के जरिए बेहतर बनाने पर जोर दिया।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि जब तक किसी कला में पर्याप्त परफेक्शन न आए, तब तक उसे मंच पर पेश करने से बचना चाहिए। उनका संदेश अभ्यास, तैयारी और अपनी कला को लगातार निखारने पर केंद्रित रहा।
उन्होंने जिंदगी को लेकर भी एक दिलचस्प उदाहरण साझा किया। ममता ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति नए कपड़े खरीदकर उन्हें किसी खास दिन पहनने के लिए रखता है, तो उस खास दिन का इंतजार करने के बजाय उन्हें उसी दिन पहन लेना चाहिए जिस दिन वे खरीदे गए हैं। उनके इस संदेश का भाव वर्तमान को महत्व देने और उपलब्ध अवसरों का इंतजार किए बिना उसका आनंद लेने से जुड़ा था।

महारानी कॉलेज ने जीती प्रतियोगिता
कार्यक्रम में इंटर स्कूल-कॉलेज प्रतियोगिता का फिनाले भी आयोजित किया गया। इसमें जयपुर के तीन कॉलेज और 11 स्कूलों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। फिनाले में चयनित प्रतिभागियों ने सामाजिक सरोकार, संस्कृति, कला और रचनात्मकता से जुड़ी अलग-अलग थीम पर कुल 14 प्रस्तुतियां दीं।
प्रतियोगिता में महारानी कॉलेज की टीम विजेता बनी। विजेता टीम को 25 हजार रुपये और ट्रॉफी प्रदान की गई। वहीं कनोडिया कॉलेज की टीम दूसरे स्थान पर रही और उसे 5 हजार रुपये तथा ट्रॉफी दी गई। विजेताओं को ममता कुलकर्णी और कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने सम्मानित किया।
सोशल मीडिया क्रिएटर्स को भी मिला सम्मान
कार्यक्रम के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में सोशल मीडिया के जरिए पहचान बनाने वाले क्रिएटर्स को भी सम्मानित किया गया। खान-पान, डांस, कविता, राजस्थानी लोक कला, कानूनी जागरूकता और क्षेत्रीय कहानियों जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले क्रिएटर्स को विभिन्न श्रेणियों में सम्मान मिला।
इस आयोजन में विद्यार्थियों की रचनात्मकता और सोशल मीडिया क्रिएटर्स की डिजिटल प्रतिभा को एक ही मंच पर जगह मिली। वहीं ममता कुलकर्णी की मौजूदगी और विद्यार्थियों के साथ उनका डांस कार्यक्रम का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया।

