नई दिल्ली: में मंगलवार को हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में बदलाव का मुद्दा प्रमुखता से उठा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके पद से हटाए जाने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी रखी।
खरगे ने दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को संसद के साथ-साथ सार्वजनिक स्तर पर भी उठाएगी।
हालांकि, इन आरोपों को कांग्रेस के राजनीतिक आरोप और मांग के रूप में देखा जाना चाहिए। चुनाव आयोग ने दूसरी ओर कहा है कि आयुक्तों के बीच अलग-अलग विचार या सुझाव संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं और उसके आदेश कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं।
खरगे ने CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग की
CWC बैठक को संबोधित करते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता प्रभावित हुई है।
खरगे ने आयोग के भीतर अन्य चुनाव आयुक्तों द्वारा कथित तौर पर उठाई गई आपत्तियों का भी हवाला दिया। उनका कहना था कि अगर आयोग के भीतर ही निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
कांग्रेस ने इसी आधार पर ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग दोहराई।
वोटर लिस्ट को लेकर कांग्रेस ने उठाया मुद्दा
बैठक में Special Intensive Revision यानी SIR के दौरान मतदाता सूची में होने वाले बदलावों को लेकर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए।
खरगे ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों में बदलाव के कारण पारदर्शिता को लेकर सवाल पैदा हो रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि प्रत्येक पात्र मतदाता को मतदान के अधिकार की सुरक्षा मिलनी चाहिए।
पार्टी ने इस मुद्दे को केवल राजनीतिक विवाद के रूप में नहीं बल्कि मतदाता अधिकार और चुनावी प्रक्रिया से जोड़कर उठाने की बात कही।

कांग्रेस की 5 प्रमुख मांगें क्या हैं?
CWC बैठक में मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर पांच प्रमुख मांगें सामने रखीं।
पहली मांग: मतदाता सूची में किए गए प्रत्येक बड़े बदलाव से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक किया जाए।
दूसरी मांग: जिन मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, उन्हें इसकी पूरी जानकारी दी जाए और अपील का अवसर मिले।
तीसरी मांग: राजनीतिक दलों को मतदाता सूची और उससे संबंधित जरूरी डेटा सरल प्रारूप में समय पर उपलब्ध कराया जाए।
चौथी मांग: जहां गंभीर गड़बड़ी के सबूत सामने आएं, वहां स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराई जाए।
पांचवीं मांग: चुनाव प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण डेटा और फैसलों में अधिक पारदर्शिता लाई जाए, ताकि किसी भी राजनीतिक दल को यह कहने का आधार न मिले कि महत्वपूर्ण जानकारी रोकी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी के इस्तीफे की भी मांग
CWC बैठक में खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग भी की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की भूमिका चुनाव आयोग से जुड़े विवाद में सवालों के घेरे में है।
यह कांग्रेस की राजनीतिक मांग है और बैठक में पार्टी अध्यक्ष द्वारा रखी गई। इसके समर्थन में कांग्रेस ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े विवादों का हवाला दिया है।
वहीं, इन आरोपों को लेकर सरकार और सत्तारूढ़ पक्ष की ओर से अलग राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई है। इसलिए इस पूरे मुद्दे को आरोप और राजनीतिक दावों के संदर्भ में ही समझना महत्वपूर्ण है।
चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने कथित अंदरूनी मतभेदों को लेकर सामने आई खबरों पर अलग रुख रखा है। आयोग के अनुसार चुनाव आयुक्तों के बीच किसी मुद्दे पर अलग-अलग सुझाव, सवाल या टिप्पणियां संस्थागत निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती हैं।
आयोग ने यह भी कहा है कि SIR से जुड़े फैसले कानूनी और निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं। आयोग ने SIR से संबंधित निर्णयों को लेकर किसी संस्थागत टूट या अंतिम निर्णय प्रक्रिया में असहमति की तस्वीर को खारिज किया है।
यही वजह है कि चुनाव आयोग और कांग्रेस के दावों के बीच इस समय राजनीतिक और संस्थागत बहस बनी हुई है।
राहुल गांधी के ‘वोट’ से जुड़े आरोपों का भी जिक्र
CWC बैठक में खरगे ने राहुल गांधी द्वारा मतदाता सूची से जुड़े पहले उठाए गए सवालों का भी समर्थन किया। उन्होंने मतदाता सूची में कथित डुप्लीकेट नाम, संदिग्ध पते और एक ही पते पर कई मतदाताओं के पंजीकरण जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
कांग्रेस का कहना है कि इन सवालों की पर्याप्त जांच होनी चाहिए थी। पार्टी ने इसी संदर्भ में मतदाता सूची और चुनावी डेटा में अधिक पारदर्शिता की मांग रखी है।
हालांकि, किसी विशेष मतदाता सूची में कथित अनियमितता को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच या आधिकारिक प्रक्रिया के बाद ही निकाला जा सकता है।
अब संसद और सड़क दोनों पर मुद्दा उठाने की तैयारी
CWC बैठक के बाद कांग्रेस ने संकेत दिया कि वह चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे को संसद में भी उठाएगी और सार्वजनिक स्तर पर भी अभियान तेज कर सकती है।
कांग्रेस के मुताबिक यह मुद्दा मतदाता अधिकार, चुनावी पारदर्शिता और संस्थागत विश्वसनीयता से जुड़ा है। पार्टी की बैठक में इस मुद्दे को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही विपक्षी दलों की संयुक्त रणनीति पर भी चर्चा की संभावना बनी हुई है। 30 सितंबर को विपक्षी दलों की बैठक प्रस्तावित है, जिसमें चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे पर आगे की दिशा पर विचार किया जाना है।
चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत में मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का मूल हिस्सा है। किसी व्यक्ति का नाम सूची में होना उसके मतदान अधिकार के इस्तेमाल से सीधे जुड़ा होता है। इसलिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता महत्वपूर्ण मानी जाती है।
वर्तमान विवाद में एक तरफ कांग्रेस चुनाव आयोग से अधिक जानकारी और जवाबदेही की मांग कर रही है। दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपनी प्रक्रियाओं को कानूनी और संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप बता रहा है।
ऐसे में आगे की बहस इस बात पर केंद्रित रह सकती है कि SIR के दौरान मतदाता सूची में बदलाव कैसे किए जा रहे हैं, संबंधित डेटा कितना सार्वजनिक होता है और प्रभावित मतदाताओं के लिए अपील की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट है।

