अजय देवगन: की फिल्म Drishyam को रिलीज हुए करीब 11 साल हो चुके हैं, लेकिन इसकी कहानी का सस्पेंस आज भी दर्शकों को अपनी ओर खींचता है। 2015 में रिलीज हुई यह क्राइम-थ्रिलर एक आम परिवार, अचानक सामने आई मुश्किल और उससे बचने के लिए तैयार की गई बेहद सोच-समझकर बनाई गई योजना के इर्द-गिर्द घूमती है। अब फिल्म एक बार फिर OTT दर्शकों के बीच चर्चा में है।
इस समय Drishyam की चर्चा बढ़ने की एक बड़ी वजह फ्रेंचाइजी की तीसरी हिंदी फिल्म Drishyam: The Conclusion भी है। नई फिल्म 2 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। ऐसे में दर्शक पिछली फिल्मों की कहानी दोबारा देख रहे हैं, ताकि नई फिल्म देखने से पहले विजय सालगांवकर और उसके परिवार की पूरी कहानी को फिर से समझ सकें।
क्या है Drishyam की कहानी?
फिल्म में अजय देवगन ने विजय सालगांवकर का किरदार निभाया है। वह गोवा में केबल टीवी का कारोबार करने वाला एक सामान्य व्यक्ति है, जिसे फिल्मों का काफी शौक है। परिवार में पत्नी नंदिनी और दो बेटियां हैं। शुरुआत में परिवार की जिंदगी सामान्य दिखाई देती है, लेकिन एक अप्रत्याशित घटना के बाद पूरा परिवार पुलिस जांच के घेरे में आ जाता है।
यहीं से फिल्म का असली सस्पेंस शुरू होता है।
विजय अपने परिवार को बचाने के लिए घटनाओं की ऐसी कड़ी तैयार करता है, जिसे पुलिस के लिए तोड़ना आसान नहीं होता। फिल्म में पुलिस जांच और विजय की योजना के बीच लगातार तनाव बना रहता है।
कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा यही है कि दर्शक कई बार सोचता है कि अब राज खुल जाएगा, लेकिन विजय किसी न किसी तरीके से कहानी को दूसरी दिशा में ले जाता है।
तब्बू की मौजूदगी ने बढ़ाया तनाव
फिल्म में तब्बू ने पुलिस अधिकारी मीरा देशमुख की भूमिका निभाई है। उनके किरदार का संबंध उस घटना से सीधे जुड़ जाता है, जिसने सालगांवकर परिवार की जिंदगी बदल दी।
विजय और मीरा के बीच चलने वाली यह मानसिक टक्कर फिल्म को लगातार सस्पेंस में बनाए रखती है। एक तरफ विजय परिवार को बचाने की कोशिश करता है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस घटनाओं की कड़ियां जोड़ने में लगी रहती है।
श्रीया सरन ने विजय की पत्नी नंदिनी का किरदार निभाया है। परिवार पर बढ़ता दबाव और पुलिस जांच का असर उनके किरदार के जरिए भी कहानी में दिखाई देता है।
11 साल बाद भी क्यों याद है फिल्म?
अजय देवगन Drishyam OTT की चर्चा सिर्फ पुरानी फिल्म होने की वजह से नहीं है। इसकी सबसे बड़ी ताकत कहानी का वह ढांचा है, जिसमें छोटी-छोटी जानकारियां बाद में महत्वपूर्ण साबित होती हैं।
फिल्म देखने के दौरान कई घटनाएं सामान्य लगती हैं, लेकिन आगे जाकर वही बातें कहानी की बड़ी कड़ी बन जाती हैं। इसी वजह से दर्शक फिल्म को दोबारा देखने पर भी अलग-अलग संकेतों पर ध्यान दे सकता है।
विजय का किरदार भी फिल्म की खासियत है। वह कोई पारंपरिक सुपरहीरो नहीं है। वह परिस्थितियों में फंसा एक पिता है, जो अपने परिवार को बचाने के लिए अपनी समझ और पहले से बनाई योजना का सहारा लेता है।
यही मानवीय पहलू फिल्म के सस्पेंस को और प्रभावी बनाता है।
Drishyam 3 से पहले क्यों बढ़ी दिलचस्पी?
फ्रेंचाइजी की नई फिल्म Drishyam: The Conclusion 2 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है। मौजूदा समय में फिल्म को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि यह हिंदी फ्रेंचाइजी का अगला अध्याय है। नई फिल्म में अजय देवगन फिर विजय सालगांवकर के रूप में नजर आएंगे, जबकि तब्बू और श्रीया सरन भी फ्रेंचाइजी से जुड़ी हुई हैं।
नई फिल्म से पहले पहली और दूसरी कहानी को दोबारा देखना दर्शकों के लिए घटनाओं को याद करने का एक तरीका बन गया है। खासकर उन लोगों के लिए, जिन्होंने पहली फिल्म काफी समय पहले देखी थी।
फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म के आने के साथ पुरानी कहानी में छिपे संकेत, विजय की रणनीति और परिवार से जुड़े घटनाक्रम फिर चर्चा में आ गए हैं।
OTT पर देखने वालों के लिए क्या खास?
Prime Video की सूची में Drishyam को 2015 की हिंदी फिल्म के रूप में दिखाया गया है। इसमें अजय देवगन, श्रीया सरन और तब्बू प्रमुख भूमिकाओं में हैं। फिल्म की अवधि करीब 2 घंटे 42 मिनट है।
हालांकि OTT उपलब्धता क्षेत्र और समय के साथ बदल सकती है, इसलिए देखने से पहले अपने Prime Video अकाउंट पर फिल्म की वर्तमान उपलब्धता जांचना उचित रहेगा।
फिल्म उन दर्शकों के लिए खास तौर पर आकर्षक हो सकती है जिन्हें क्राइम, मिस्ट्री और फैमिली-सस्पेंस वाली कहानियां पसंद हैं।
कहानी जानने के बावजूद दोबारा क्यों देखी जा रही है?
Drishyam की खासियत यह भी है कि इसका मजा केवल यह जानने में नहीं है कि आगे क्या होगा। फिल्म की दोबारा देखने वाली अपील उन छोटी घटनाओं और संकेतों में है, जिन्हें पहली बार देखने पर दर्शक नजरअंदाज कर सकता है।
विजय की योजना कैसे तैयार होती है, परिवार उस योजना का हिस्सा कैसे बनता है और पुलिस किस तरह हर सुराग को जोड़ने की कोशिश करती है—इन पहलुओं पर दोबारा ध्यान देने पर फिल्म का अनुभव अलग हो सकता है।
यही वजह है कि करीब एक दशक पुरानी फिल्म आज भी नई रिलीज के समय फिर से दर्शकों की सूची में लौट आती है।

