नई दिल्ली। फ्लाईदुबई की एक उड़ान के कॉकपिट में हुए हमले के दौरान असाधारण साहस दिखाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर को लेकर अब इजरायल में सम्मान की मांग उठी है। इजरायल की पूर्व उप विदेश मंत्री शैरेन हैस्केल ने कहा है कि कैप्टन स्मित मच्छर को उनके साहस के लिए इजरायल का ‘मेडल ऑफ ऑनर’ दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय पायलट को इजरायल आमंत्रित किया जाना चाहिए, जहां राष्ट्रपति और सरकार की ओर से उन्हें सम्मानित किया जा सके।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है जिसमें उड़ान के दौरान कैप्टन स्मित मच्छर पर उनके सह-पायलट ने कथित तौर पर कॉकपिट के भीतर हमला किया था। गंभीर चोट लगने के बावजूद उन्होंने विमान की स्थिति को संभालने और कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश जारी रखी। इसके बाद यात्रियों और चालक दल के अन्य सदस्यों को कॉकपिट तक पहुंचने और हमलावर को काबू करने का मौका मिला।
कॉकपिट में अचानक बदले हालात
रिपोर्टों के मुताबिक, फ्लाईदुबई की इस उड़ान के दौरान कॉकपिट के अंदर अचानक स्थिति बिगड़ गई। कैप्टन स्मित मच्छर पर उनके सह-पायलट ने हमला किया। इस हमले में कैप्टन को गंभीर चोटें आईं।
हमले के बाद विमान की स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। कैप्टन मच्छर ने बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत के दौरान उस समय को याद किया। उन्होंने बताया कि जमीन पर गिरने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि विमान नीचे जा रहा है। ऐसे समय में उन्होंने खुद को कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने और उसे खोलने के लिए प्रेरित किया।
कैप्टन ने बताया कि हमले के बावजूद उन्होंने दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की। इसके बाद अन्य लोग कॉकपिट तक पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने में मदद की। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम में अन्य लोगों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
इजरायल में क्यों हो रही है कैप्टन की तारीफ?
घटना में इजरायली यात्रियों की सुरक्षा भी एक महत्वपूर्ण पहलू रही। इजरायल के अधिकारियों ने कैप्टन स्मित मच्छर के साहस की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की है।
इजरायल की पूर्व उप विदेश मंत्री शैरेन हैस्केल ने कैप्टन के साहस को असाधारण बताते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर ऐसी स्थिति में कार्रवाई की, जब विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा खतरे में थी। उनके मुताबिक, कैप्टन को इजरायल बुलाकर सम्मानित किया जाना चाहिए।
इजरायल के भारत में राजदूत रियुवेन अजार ने भी कैप्टन स्मित को बहादुर बताया है। उन्होंने कहा कि इजरायल उनके साहस का सम्मान करेगा।

मुंबई में लगाया गया सम्मान संदेश वाला बिलबोर्ड
कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी के सम्मान में मुंबई में इजरायल के महावाणिज्य दूतावास की ओर से बिलबोर्ड भी लगाया गया। इसमें उनके साहस के लिए आभार व्यक्त किया गया।
इजरायल के महावाणिज्यदूत याविन रेवाच ने कहा कि गंभीर चोटों के बावजूद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की और इससे यात्रियों को हमलावर को काबू करने का अवसर मिला। उन्होंने कैप्टन की बहादुरी को सम्मानित किए जाने की बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात कैप्टन स्मित का पूरी तरह स्वस्थ होना है। उनके मुताबिक, जांच एजेंसियों को घटना की परिस्थितियों की विस्तृत जांच करनी चाहिए।
भारत में भी उठी बड़े सम्मान की मांग
कैप्टन स्मित मच्छर को लेकर भारत में भी सम्मान की मांग सामने आई है। राज्यसभा सदस्य मिलिंद देवड़ा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उन्हें अशोक चक्र दिए जाने की मांग की है।
देवड़ा ने कैप्टन स्मित को मुंबई का बेटा बताते हुए उनके साहस की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस समय सबसे अधिक हिम्मत की जरूरत थी, उस समय कैप्टन ने असाधारण साहस का प्रदर्शन किया।
अशोक चक्र भारत का शांतिकाल में दिया जाने वाला सर्वोच्च वीरता सम्मान है। हालांकि, किसी सम्मान की मांग किया जाना और उसका आधिकारिक रूप से प्रदान किया जाना अलग-अलग बातें हैं। फिलहाल कैप्टन स्मित को अशोक चक्र दिए जाने की मांग राजनीतिक स्तर पर सामने आई है।
प्रधानमंत्री मोदी से बातचीत में क्या बोले कैप्टन?
घटना के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कैप्टन स्मित मच्छर से फोन पर बातचीत की। इस बातचीत में कैप्टन ने उस मुश्किल समय का अनुभव साझा किया।
उन्होंने बताया कि जब वह जमीन पर गिरे हुए थे, तब उन्हें महसूस हुआ कि विमान नीचे जा रहा है। उनके वर्षों के उड़ान अनुभव ने उन्हें स्थिति की गंभीरता समझने में मदद की। उन्होंने खुद को कॉकपिट के दरवाजे तक पहुंचने और उसे खोलने के लिए प्रेरित किया।
कैप्टन ने यह भी कहा कि उस समय वह अपनी जान बचाने के लिए कदम उठा रहे थे, लेकिन उन्हें यह भी पता था कि विमान में मौजूद यात्रियों को खतरे में नहीं छोड़ा जा सकता। उनके मुताबिक, उन्होंने विमान उड़ाने के क्षेत्र में करीब 17 साल बिताए हैं और लगभग 11 साल से कैप्टन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
अब सम्मान और जांच दोनों पर नजर
कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी को लेकर भारत और इजरायल में सम्मान की आवाजें तेज हुई हैं। इजरायल की पूर्व उप विदेश मंत्री ने ‘मेडल ऑफ ऑनर’ की मांग की है, जबकि भारत में अशोक चक्र दिए जाने की मांग सामने आई है।
इसके साथ ही घटना की पूरी परिस्थितियों की जांच भी महत्वपूर्ण है। विमान में वास्तव में क्या हुआ, हमले की पूरी पृष्ठभूमि क्या थी और घटना के दौरान किसने क्या भूमिका निभाई—इन सभी पहलुओं की आधिकारिक जांच से स्थिति और स्पष्ट होगी।
फिलहाल कैप्टन स्मित मच्छर की बहादुरी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। गंभीर चोटों के बावजूद कॉकपिट तक पहुंचने और दरवाजा खोलने की उनकी कोशिश को इजरायली अधिकारियों ने भी विशेष रूप से रेखांकित किया है।

