मुंबई: मुंबई के शिवाजी पार्क में 2 अक्टूबर को हुए कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के बाद पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और अन्य पदाधिकारियों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। प्रदर्शन को लेकर दिपके समेत CJP के चार पदाधिकारियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने आई है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शिवाजी पार्क में बिना अनुमति प्रदर्शन करने की कोशिश की गई।
इस पूरे मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब मुंबई पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिए जाने की बात पहले ही सामने आ चुकी थी। इसके बावजूद CJP की ओर से विरोध प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया गया था। पुलिस की अनुमति और प्रदर्शन के अधिकार को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद अब शिकायत तक पहुंच गया है।
अभिजीत दिपके समेत चार लोगों के खिलाफ शिकायत
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, शिवाजी पार्क पुलिस थाने में अभिजीत दिपके, सौरभ दास, आशुतोष रांका और रत्ना सिंह के खिलाफ शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि बिना अनुमति प्रदर्शन आयोजित करने का प्रयास किया गया और इस दौरान निर्धारित नियमों का उल्लंघन हुआ।
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक शिकायत एक शिवाजी पार्क निवासी की ओर से दी गई। शिकायत में बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने आदेशों का भी हवाला दिए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों को अभी आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए; शिकायत अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने का प्रमाण नहीं होती।
प्रदर्शन को पुलिस ने नहीं दी थी अनुमति
CJP ने 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का ऐलान किया था। इससे पहले मुंबई पुलिस ने इस प्रदर्शन को अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस की ओर से शिवाजी पार्क में बड़े प्रदर्शन को लेकर अनुमति से जुड़े नियमों और पूर्व न्यायिक आदेशों का हवाला दिया गया था।
अनुमति नहीं मिलने के बाद अभिजीत दिपके ने प्रदर्शन जारी रखने की बात कही थी। उन्होंने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताते हुए सरकार और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपनी मांगें रखने की बात कही थी। इससे पहले उन्होंने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर जेल भरो आंदोलन किया जाएगा।

CJP की मुख्य मांगें क्या हैं?
CJP के प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग रही है। पार्टी ने मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
CJP की ओर से सामने रखी गई मांगों में 2025 की मतदाता सूची को लेकर स्थिति स्पष्ट करने, SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और भविष्य में मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति की प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता लाने जैसी मांगें शामिल रही हैं। ये पार्टी की राजनीतिक मांगें हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के बजाय CJP के रुख के रूप में देखा जाना चाहिए।
मुंबई के बाद अब दिल्ली की तैयारी
शिवाजी पार्क के प्रदर्शन के बाद अभिजीत दिपके ने दिल्ली में एक और प्रदर्शन का ऐलान किया है। हालिया बयान के मुताबिक, यदि ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की घोषणा की गई है। दिपके ने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताया है।
CJP का कहना है कि इस आंदोलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। इससे पहले संगठन ने मुंबई के अलावा गोवा, कोलकाता, पटना, उत्तर प्रदेश और बेंगलुरु में भी प्रदर्शन की बात कही थी।
क्या शिकायत के बाद मामला FIR तक पहुंचेगा?
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि अभिजीत दिपके और अन्य CJP पदाधिकारियों के खिलाफ दी गई शिकायत पर पुलिस आगे क्या कार्रवाई करती है। शिकायत दर्ज होना और FIR या आरोप साबित होना अलग-अलग कानूनी प्रक्रियाएं हैं। इसलिए फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना उचित होगा कि प्रदर्शन को लेकर पुलिस के पास शिकायत दी गई है और आगे की कार्रवाई संबंधित जांच एवं कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब CJP चुनाव आयोग और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर देशव्यापी आंदोलन की बात कर रही है। मुंबई में प्रदर्शन के बाद अब दिल्ली के जंतर-मंतर को लेकर की गई घोषणा ने इस पूरे घटनाक्रम को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है।

