नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों द्वारा पुलिसकर्मियों पर लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों ने राजनीतिक और मीडिया जगत में हलचल पैदा कर दी है। मामला 3 अक्टूबर 2026 को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आयोजित प्रदर्शन के दौरान का बताया जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। इसी बीच कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इस पूरे मामले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से सवाल किया है।
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया जा रहा था। प्रदर्शन को कवर करने के लिए कई पत्रकार मौके पर मौजूद थे। इसी दौरान तीन महिला पत्रकारों ने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार की शिकायत की।
पुलिस के अनुसार, नई दिल्ली जिला पुलिस को इन शिकायतों की जानकारी मिली। चूंकि आरोप पुलिस अधिकारियों के खिलाफ थे और उसी क्षेत्र के पुलिसकर्मी प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में तैनात थे, इसलिए शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंपने का फैसला किया गया।
एक पत्रकार ने ACP पर लगाया गंभीर आरोप
मामले को और गंभीर तब माना गया जब शिकायतकर्ताओं में से एक महिला पत्रकार ने एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) पर कथित यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया। रिपोर्टों के अनुसार, पत्रकार का दावा है कि वह पुलिस की कार्रवाई को रिकॉर्ड कर रही थीं, उसी दौरान उनके साथ कथित तौर पर अनुचित व्यवहार किया गया।
यह आरोप फिलहाल जांच के दायरे में है। किसी भी अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को जांच पूरी होने से पहले प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। क्राइम ब्रांच अब शिकायतकर्ताओं और मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज करेगी तथा उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी।
प्रियंका गांधी ने PM मोदी और अमित शाह से पूछा सवाल
मामला सामने आने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सोशल मीडिया के जरिए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों ने रिपोर्टिंग के दौरान पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को संबोधित करते हुए पूछा कि क्या महिलाओं के साथ इस तरह का व्यवहार उचित है और यदि नहीं, तो इस मामले का संज्ञान क्यों नहीं लिया जा रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने वाली पुलिस से ही महिलाएं असुरक्षित महसूस कर रही हैं। प्रियंका ने इस मुद्दे को महिलाओं की सुरक्षा से जोड़ते हुए सरकार से कार्रवाई की मांग की।
क्राइम ब्रांच करेगी निष्पक्ष जांच
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों को क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया है। जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं और मामले से जुड़े अन्य लोगों के बयान दर्ज किए जाएंगे।
पुलिस के अनुसार, स्थानीय स्तर पर जांच कराने के बजाय मामले को क्राइम ब्रांच को सौंपने का उद्देश्य निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना है। क्योंकि प्रदर्शन के दौरान स्थानीय पुलिसकर्मी कानून-व्यवस्था की ड्यूटी पर तैनात थे, ऐसे में उसी पुलिस इकाई द्वारा जांच किए जाने पर निष्पक्षता को लेकर सवाल उठ सकते थे।
प्रेस काउंसिल ने जताई चिंता
घटना को लेकर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी चिंता व्यक्त की है। परिषद ने प्रदर्शन को कवर कर रहे पत्रकारों के साथ पुलिस के कथित व्यवहार पर हैरानी जताते हुए शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत बताई।
परिषद ने इस बात पर जोर दिया कि पत्रकारों को बिना भय के अपना काम करने और सार्वजनिक गतिविधियों को रिपोर्ट करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
राजनीतिक विवाद भी हुआ तेज
महिला पत्रकारों की शिकायत के बाद मामला सिर्फ पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा। कांग्रेस के कई नेताओं ने सरकार और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा है। राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे को लेकर गृह मंत्री अमित शाह पर सवाल उठाए और शिकायत दर्ज किए जाने की मांग की।
विपक्ष का कहना है कि यदि पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच और आवश्यक कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। दूसरी ओर, पुलिस ने शिकायतों को क्राइम ब्रांच को भेजकर जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अब आगे क्या होगा?
अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका क्राइम ब्रांच की जांच की होगी। जांच एजेंसी शिकायतकर्ताओं के बयान, घटनास्थल से उपलब्ध जानकारी और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच करेगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लगाए गए आरोपों में क्या तथ्य सामने आते हैं और आगे किस तरह की कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता है।
फिलहाल इस मामले में किसी आरोपी अधिकारी को दोषी ठहराया नहीं गया है। इसलिए जांच पूरी होने तक सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
जंतर-मंतर की घटना ने एक साथ दो महत्वपूर्ण सवाल सामने रखे हैं—सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों की सुरक्षा और महिलाओं की शिकायतों पर पुलिस की जवाबदेही। आने वाले दिनों में क्राइम ब्रांच की जांच और पुलिस की कार्रवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय करेगी।

