नई दिल्ली। बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। चेक बाउंस से जुड़े सात मामलों की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भुगतान संबंधी पुराने निर्देश का पालन नहीं करने पर अभिनेता को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता की रकम की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अब उन्हें एक और सीमित अवसर दिया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले दिए गए निर्देश के मुताबिक रकम जमा नहीं की गई है। सुनवाई के दौरान अभिनेता की ओर से ₹50 लाख के डिमांड ड्राफ्ट की प्रति पेश की गई, जबकि अदालत के सामने इससे कहीं अधिक रकम जमा करने की प्रतिबद्धता थी। अदालत ने भुगतान को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए अगली कार्रवाई का संकेत भी दिया।
क्या हुआ सुप्रीम कोर्ट में?
सोमवार को मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल थे।
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह बात रखी गई कि राजपाल यादव की ओर से पहले किए गए भुगतान संबंधी वादे के अनुरूप रकम जमा नहीं हुई। अभिनेता की ओर से पेश वकील ने बैंक प्रक्रिया का हवाला देते हुए डिमांड ड्राफ्ट से संबंधित जानकारी दी।
अदालत ने इस पर बेहद सख्त टिप्पणी की और संकेत दिया कि बार-बार दिए गए अवसरों का पालन नहीं होने पर याचिका खारिज करने का विकल्प खुला है।
₹50 लाख की जानकारी से क्यों बढ़ी नाराजगी?
सुनवाई में राजपाल यादव की ओर से ₹50 लाख के डिमांड ड्राफ्ट की प्रति दिखाई गई। अदालत ने उसकी स्थिति को लेकर सवाल उठाए। वकील की ओर से बताया गया कि बैंक में प्रक्रिया चल रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि यह स्पष्ट किया कि केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं है। अदालत का जोर उस भुगतान पर है जिसे पहले के निर्देशों के अनुरूप किया जाना था।
इसके बाद अदालत ने भुगतान के लिए अगले दिन तक का समय दिया और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
आखिर क्या है राजपाल यादव का चेक बाउंस मामला?
यह विवाद करीब डेढ़ दशक पुराने वित्तीय लेनदेन से जुड़ा है। मामले के अनुसार, वर्ष 2010 में राजपाल यादव ने फिल्म निर्माण के लिए करीब ₹5 करोड़ की वित्तीय सहायता ली थी। यह रकम उनकी फिल्म अता पता लापता से जुड़े निर्माण कार्य के लिए ली गई थी।
बाद में रकम लौटाने को लेकर विवाद पैदा हुआ और चेक बाउंस से जुड़े सात मामले सामने आए। इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ी और राजपाल यादव को दोषी ठहराया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट से भी मिल चुकी है सजा
इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपाल यादव की दोषसिद्धि बरकरार रखते हुए उन्हें तीन महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने यह भी माना था कि भुगतान संबंधी प्रतिबद्धताओं का पालन बार-बार नहीं हुआ।
इसके बाद अभिनेता ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान उन्हें भुगतान की दिशा में ठोस कदम उठाने का अवसर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी दिया था मौका
सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव को भुगतान की ठोस योजना पेश करने के लिए समय दिया था। उस समय अदालत ने कम से कम ₹2 करोड़ जमा करने की दिशा में कदम उठाने को कहा था और इसे अंतिम अवसर के तौर पर देखा गया था।
इसके बाद भी भुगतान की स्थिति अदालत की अपेक्षा के मुताबिक नहीं रही। इसी वजह से 5 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट का रुख ज्यादा सख्त दिखाई दिया।
अब आगे क्या होगा?
सोमवार की सुनवाई के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि राजपाल यादव अदालत के निर्देश के मुताबिक तय समय में भुगतान कर पाते हैं या नहीं। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब मामले में और देरी को आसानी से स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अदालत के सामने एक तरफ शिकायतकर्ता की रकम की वसूली का मुद्दा है, तो दूसरी तरफ अभिनेता की ओर से दायर कानूनी चुनौती भी लंबित है। इसलिए आने वाली सुनवाई राजपाल यादव के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
अगर भुगतान संबंधी निर्देश का पालन नहीं होता है तो उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। वहीं, अदालत मामले की आगे की सुनवाई में अभिनेता की याचिका पर भी निर्णय ले सकती है।
फिल्मी करियर के बीच कानूनी संकट
राजपाल यादव लंबे समय से हिंदी सिनेमा में कॉमेडी और सहायक भूमिकाओं के लिए पहचाने जाते हैं। लेकिन पुराने वित्तीय विवाद से जुड़ी यह कानूनी प्रक्रिया उनके लिए लगातार चुनौती बनी हुई है।
इस मामले की खास बात यह है कि विवाद सिर्फ रकम की अदायगी तक सीमित नहीं रहा। कई बार अदालत में दिए गए भुगतान संबंधी आश्वासन और उसके अनुपालन का मुद्दा भी सुनवाई का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
अब अदालत के अगले आदेश से यह साफ होगा कि राजपाल यादव को आगे कितनी राहत मिलती है और भुगतान की शर्तों को लेकर अदालत क्या फैसला करती है।

