नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर राजनीतिक विवाद अब दिल्ली की सड़कों से लेकर संसद तक पहुंच गया है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और Form 6 से जुड़े मुद्दे पर विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है। इसी बीच विपक्षी दलों ने मंगलवार को संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च निकालने की तैयारी की है। प्रदर्शन के बीच सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग की ओर से भी जवाब सामने आया है, जिससे यह मामला और ज्यादा राजनीतिक रंग ले चुका है।
‘ज्ञानेश नहीं, गणेश जी मदद कर रहे हैं’ वाली टिप्पणी क्यों चर्चा में?
विपक्ष के प्रदर्शन और चुनाव आयोग पर लगाए जा रहे आरोपों के बीच एक राजनीतिक टिप्पणी ने खास तौर पर ध्यान खींचा है। विपक्षी नेताओं की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के नाम को लेकर तंज कसते हुए कहा गया कि ‘ज्ञानेश जी नहीं, गणेश जी’ उनकी मदद कर रहे हैं।
इस टिप्पणी का संदर्भ विपक्ष के उस आरोप से जुड़ा है जिसमें वह दावा कर रहा है कि चुनाव आयोग की मौजूदा प्रक्रिया से सत्तारूढ़ दल को राजनीतिक लाभ मिल सकता है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया निष्पक्षता के सवाल खड़े कर रही है।
हालांकि, यह विपक्ष का राजनीतिक आरोप है और इसे किसी सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। चुनाव आयोग और सत्ता पक्ष ने ऐसे आरोपों को खारिज किया है।
SIR को लेकर क्यों बढ़ा विवाद?
विवाद की जड़ में मतदाता सूचियों का Special Intensive Revision यानी SIR है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के जरिए पात्र मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्षी दल इस मुद्दे पर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव आयोग को मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।
दूसरी ओर चुनाव आयोग का कहना है कि SIR की प्रक्रिया कानूनी प्रावधानों और आयोग के अधिकार क्षेत्र के तहत की जा रही है। आयोग ने विपक्ष के कुछ दावों को तथ्यात्मक रूप से गलत या भ्रामक बताया है।

Form 6 विवाद ने बढ़ाई राजनीतिक गर्मी
इस पूरे विवाद में Form 6 सबसे अहम मुद्दों में से एक बन गया है। Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है।
विपक्ष की ओर से आरोप लगाया गया कि इस फॉर्म में बदलाव किया गया और इससे मतदाता सूची की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। राहुल गांधी ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त पर Form 6 को लेकर गंभीर आरोप लगाए।
लेकिन चुनाव आयोग ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि Form 6 में स्वयं कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के अनुसार SIR प्रक्रिया के दौरान Form 6 के साथ एक अलग घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। आयोग ने अपने स्पष्टीकरण में इस अंतर को महत्वपूर्ण बताया है।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद विपक्ष को मिला नया मुद्दा
मामला उस समय और गरमा गया जब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान Form 6 में कथित बदलाव को लेकर टिप्पणी सामने आई। विपक्ष ने इसे अपने आरोपों के समर्थन के तौर पर पेश किया।
हालांकि, चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि अदालत की टिप्पणी को Form 6 में वास्तविक बदलाव के रूप में पढ़ना सही नहीं है। आयोग ने कहा कि मूल फॉर्म और SIR के दौरान उससे जुड़े अतिरिक्त घोषणा-पत्र को अलग-अलग समझना जरूरी है।
यही अंतर अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।
दिल्ली में बढ़ाई गई सुरक्षा
विवाद के बीच मंगलवार को विपक्षी सांसदों के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए दिल्ली में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। संसद के आसपास से लेकर चुनाव आयोग मुख्यालय और जंतर-मंतर क्षेत्र तक अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई है। प्रशासन का उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
विपक्ष की रणनीति क्या है?
विपक्षी दल इस मुद्दे को केवल एक चुनावी विवाद तक सीमित नहीं रखना चाहते। वे इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता और मतदाता अधिकारों से जोड़कर उठा रहे हैं।
विपक्षी सांसदों के प्रस्तावित मार्च को इसी व्यापक राजनीतिक अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक सांसदों को मंगलवार सुबह संसद के मकर द्वार पर जुटने के लिए कहा गया था, जिसके बाद चुनाव आयोग मुख्यालय की ओर मार्च की योजना है।
सत्ता पक्ष और चुनाव आयोग का जवाब
विपक्ष के आरोपों के जवाब में सत्ता पक्ष ने इन्हें राजनीतिक दावे बताया है। वहीं चुनाव आयोग ने भी अपने स्तर पर तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी किया है।
सबसे अहम बात यह है कि आयोग ने Form 6 में सीधे बदलाव किए जाने के आरोप से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि SIR के लिए जो अतिरिक्त घोषणा-पत्र जोड़ा गया, उसे मूल Form 6 में बदलाव के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है।
इससे साफ है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि SIR की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार पर भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।
अब आगे क्या?
मंगलवार का विपक्षी मार्च इस पूरे विवाद का अगला बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम होगा। एक तरफ विपक्ष CEC के खिलाफ अपने अभियान को और तेज करने की कोशिश करेगा, तो दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपने फैसलों और प्रक्रियाओं को कानूनी तथा प्रशासनिक आधार पर सही ठहराता रहेगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह विवाद आने वाले चुनावों तक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा या फिर कानूनी और चुनावी प्रक्रियाओं के स्पष्टीकरण के साथ इसकी तीव्रता कम होगी।

