नई दिल्ली। देश की चुनावी राजनीति में मंगलवार को एक बार फिर बड़ा सियासी टकराव देखने को मिल रहा है। Special Intensive Revision (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े विवाद को लेकर विपक्षी INDIA ब्लॉक ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा तेज कर दिया है। विपक्षी सांसदों की ओर से संसद से चुनाव आयोग मुख्यालय तक मार्च का कार्यक्रम रखा गया है। इस मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और कई प्रमुख रास्तों पर बैरिकेडिंग तथा ट्रैफिक डायवर्जन लागू किए गए हैं।
विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में पारदर्शिता से जुड़े गंभीर सवाल हैं। वहीं चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मंगलवार का मार्च सिर्फ एक राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर चल रही बड़ी राजनीतिक बहस का अगला चरण बन गया है।
संसद से चुनाव आयोग तक मार्च की तैयारी
INDIA ब्लॉक के सांसदों ने मंगलवार सुबह संसद परिसर के मकर द्वार के पास एकत्र होकर चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर मार्च करने की योजना बनाई। विपक्षी नेताओं के अनुसार इस मार्च का उद्देश्य SIR से जुड़े सवालों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखना है।
रिपोर्टों के मुताबिक सांसदों को सुबह करीब 10:30 बजे एकत्र होने और इसके बाद लगभग 11 बजे शांतिपूर्ण मार्च शुरू करने के लिए कहा गया था। विपक्षी गठबंधन की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि SIR और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर उसका विरोध आगे भी जारी रहेगा।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। उनका आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े कुछ फैसलों में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं रही।
विपक्ष SIR की प्रक्रिया को लेकर भी लगातार सवाल उठा रहा है। उसका कहना है कि मतदाता सूची में होने वाले बदलावों में मतदाताओं को पर्याप्त जानकारी, कारण और प्रभावी शिकायत निवारण का अवसर मिलना चाहिए।
INDIA ब्लॉक की ओर से चुनावी रोल में हुए बदलावों को अधिक पारदर्शी बनाने और पुराने मतदाता रिकॉर्ड से संबंधित जानकारी सार्वजनिक करने जैसी मांगें भी उठाई गई हैं।

दिल्ली में सुरक्षा का घेरा क्यों बढ़ाया गया?
मार्च के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने संसद, विजय चौक, जंतर-मंतर और चुनाव आयोग मुख्यालय के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। कई जगहों पर बैरिकेड लगाए गए हैं और अतिरिक्त सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है।
चुनाव आयोग कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कई स्तरों पर की गई है। केंद्रीय दिल्ली में पुलिस और सुरक्षा बलों की मौजूदगी बढ़ने से आम लोगों की आवाजाही पर भी असर पड़ने की संभावना जताई गई है।
इन रास्तों पर ट्रैफिक प्रभावित होने की संभावना
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मार्च को देखते हुए विशेष यातायात व्यवस्था लागू की है। कनॉट प्लेस, पटेल चौक, संसद मार्ग, अशोका रोड, जंतर-मंतर रोड और आसपास के क्षेत्रों में ट्रैफिक को नियंत्रित या डायवर्ट किया जा सकता है।
यात्रियों को इन इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचने और संभव हो तो मेट्रो या सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। बैरिकेडिंग और सुरक्षा जांच के कारण यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर चलने की सलाह भी दी गई है।
विरोध कई दिनों से चल रहा है
CEC और SIR को लेकर विरोध मंगलवार से अचानक शुरू नहीं हुआ है। पिछले कई दिनों से दिल्ली में अलग-अलग विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों की ओर से प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
कुछ पिछले प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति भी बनी। दिल्ली पुलिस ने कुछ मामलों में FIR दर्ज करने और लोगों को हिरासत में लेने की कार्रवाई की थी। अधिकारियों का कहना था कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने निर्धारित व्यवस्था का उल्लंघन किया और बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की।
विपक्ष के आरोपों पर चुनाव आयोग का रुख
विपक्ष जहां चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं चुनाव आयोग ने ऐसे आरोपों को खारिज किया है।
विवाद का एक बड़ा हिस्सा SIR और मतदाता सूची में बदलाव से जुड़ा है। चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को नियमों के तहत अपडेट किया जा रहा है और प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे कुछ आरोप तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं।
ऐसे में मौजूदा विवाद का एक अहम हिस्सा राजनीतिक आरोपों और चुनाव आयोग की सफाई के बीच अंतर को लेकर है।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला पहुंचा
SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहा विवाद अब न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जुड़े आरोपों पर कानूनी दलीलें सुनने की सहमति जताई है।
अदालत की भूमिका इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि विपक्ष के आरोप केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि चुनाव प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली से जुड़े कानूनी सवाल भी उठाए जा रहे हैं।
अब आगे क्या होगा?
मंगलवार का मार्च इस पूरे विवाद में आगे की राजनीतिक रणनीति का संकेत दे सकता है। विपक्षी गठबंधन ने 2 से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘Save Democracy’ अभियान के तहत प्रदर्शन और मार्च आयोजित करने की योजना बनाई थी।
आने वाले दिनों में यह विवाद और तेज होने की संभावना है। एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग से जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता रहा है।
ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग विपक्ष के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत करता है या नहीं और SIR से जुड़े मुद्दों पर आगे क्या स्पष्टीकरण सामने आता है।

