मथुरा/वृंदावन। संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े शिष्य रसिक दुलारी शरण उर्फ दीपक लोढ़ी की मौत का मामला लगातार रहस्य गहराता जा रहा है। घटना के कई दिन बाद सामने आए CCTV फुटेज ने जांच को एक नया मोड़ दिया है। पुलिस अलग-अलग फुटेज, मोबाइल डेटा, फोरेंसिक रिपोर्ट और आश्रम से जुड़े लोगों के बयानों के आधार पर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। अभी तक मामले में कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
25 सितंबर की घटना के बाद शुरू हुई जांच
पुलिस के अनुसार, 25 सितंबर की सुबह वृंदावन स्थित एक आश्रम परिसर से जुड़े अपार्टमेंट में रसिक दुलारी शरण की मौत हुई थी। प्रारंभिक जांच में पुलिस ने इसे आत्महत्या की आशंका से जोड़कर देखा। इसके बाद मामले की परिस्थितियों को समझने के लिए CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल शुरू की गई।
घटना के बाद परिवार और अन्य लोगों की ओर से भी सवाल उठाए गए। इसी वजह से पुलिस ने मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच तेज की है।
CCTV फुटेज से क्या सामने आया?
जांच के दौरान सामने आए CCTV फुटेज में रसिक दुलारी शरण को घटना से पहले परिसर के भीतर जाते हुए देखा गया। बाद के फुटेज में उनकी गतिविधियों का क्रम सामने आया है। पुलिस इन्हीं तस्वीरों के आधार पर यह समझने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले उनकी स्थिति और गतिविधियां कैसी थीं।
हालांकि CCTV फुटेज किसी घटना का पूरा कारण अपने आप साबित नहीं करता। इसलिए पुलिस इसके साथ दूसरे साक्ष्यों का मिलान कर रही है।

मोबाइल और फोरेंसिक जांच पर टिकी उम्मीद
मामले में मृतक का मोबाइल फोन और अन्य नमूने फोरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले किन परिस्थितियों से वह गुजर रहे थे और क्या मोबाइल में ऐसा कोई डिजिटल रिकॉर्ड मौजूद है, जो जांच को महत्वपूर्ण दिशा दे सके।
फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद जांचकर्ताओं को घटनाक्रम को समझने में मदद मिलने की उम्मीद है। फिलहाल पुलिस किसी एक वजह को अंतिम कारण मानकर आगे नहीं बढ़ रही है।
60 से अधिक लोगों से पूछताछ
जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस ने आश्रम से जुड़े 60 से अधिक लोगों से पूछताछ की है। परिवार के सदस्यों के बयान भी दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा पुलिस आसपास के लोगों और घटना से जुड़े संभावित गवाहों से भी जानकारी जुटा रही है।
जांचकर्ताओं का उद्देश्य घटना से पहले की परिस्थितियों और मृतक की गतिविधियों की पूरी टाइमलाइन तैयार करना है।
आश्रम की ओर से भी अपील
घटना के बाद आश्रम से जुड़े ट्रस्ट की ओर से शोक व्यक्त किया गया और लोगों से अफवाहों से बचने की अपील की गई। ट्रस्ट ने जांच में सहयोग करने की बात भी कही है। संवेदनशील मामले को देखते हुए लोगों से बिना पुष्टि किसी जानकारी को आगे नहीं बढ़ाने का अनुरोध किया गया है।
इस अपील के बीच सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे और वीडियो सामने आने से पुलिस के सामने एक और चुनौती खड़ी हो गई है।
सामने आ रहे वीडियो ने बढ़ाए सवाल
घटना से जुड़े अलग-अलग CCTV वीडियो सामने आने के बाद लोगों की दिलचस्पी और बढ़ गई है। पुलिस के लिए अब यह भी महत्वपूर्ण है कि उपलब्ध फुटेज की प्रामाणिकता और उसके स्रोत की जांच की जाए। जांच अधिकारियों ने CCTV और डिजिटल साक्ष्यों को अपनी पड़ताल का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
कुछ वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जब तक पुलिस या फोरेंसिक जांच से उनकी पुष्टि नहीं होती, उन्हें अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा।
अभी कई सवालों के जवाब बाकी
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि घटना से पहले वास्तव में क्या हुआ था। पुलिस ने कई लोगों से पूछताछ की है और डिजिटल तथा फोरेंसिक साक्ष्यों की जांच जारी है। लेकिन जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाना उचित नहीं होगा।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए जांच एजेंसियों के आधिकारिक निष्कर्ष का इंतजार करना जरूरी है।

