नई दिल्ली: दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब लगातार तीसरे दिन भी थमता नजर नहीं आ रहा है। मंगलवार और बुधवार को प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई विपक्षी सांसदों की हिरासत के बाद गुरुवार को विपक्ष ने फिर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी की। इस बार रणनीति में राजघाट मार्च को केंद्र में रखा गया।
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने गुरुवार को विपक्षी सांसदों के साथ बैठक की। इसके बाद INDIA गठबंधन के नेताओं ने राजघाट की ओर जाने का फैसला किया। विपक्ष का कहना है कि वह चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर अपने सवालों पर पीछे हटने वाला नहीं है।
दो दिन से लगातार टकराव
विवाद की शुरुआत मंगलवार को हुई थी, जब विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च करने की कोशिश की। सुरक्षा बलों ने रास्ते में बैरिकेड लगाए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद सांसदों ने सड़क पर धरना शुरू कर दिया।
राहुल गांधी समेत कई विपक्षी नेता चुनाव आयोग से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और ज्ञापन सौंपना चाहते थे। हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि उसके साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधिमंडल की बैठक के लिए निर्धारित प्रक्रिया है और 6 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक किसी राजनीतिक दल की ओर से औपचारिक मुलाकात का अनुरोध नहीं मिला था। बाद में आयोग ने कहा कि वह ज्ञापन लेने के लिए अपने वरिष्ठ अधिकारी को भेजने को तैयार था, लेकिन विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया।
बुधवार को फिर हिरासत में लिए गए राहुल-प्रियंका
बुधवार को विपक्षी सांसदों ने दोबारा प्रदर्शन किया। इस बार वे बसों के जरिए जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे थे। रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अन्य नेताओं ने सड़क पर बैठकर विरोध शुरू कर दिया।
स्थिति उस समय और तनावपूर्ण हो गई जब प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच आमना-सामना हुआ। पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य नेताओं को हिरासत में लिया। राहुल गांधी को बाराखंभा रोड पुलिस स्टेशन ले जाया गया, जबकि प्रियंका गांधी समेत कुछ अन्य नेताओं को दूसरे स्थान पर ले जाया गया। बाद में सभी को रिहा कर दिया गया।
पुलिस की ओर से बुधवार के प्रदर्शन को लेकर कुछ नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस ने कुछ प्रदर्शनकारियों पर अधिकारियों के काम में बाधा डालने और कथित मारपीट से जुड़े आरोप लगाए हैं। इन मामलों की कानूनी प्रक्रिया आगे तय करेगी कि आरोपों की स्थिति क्या रहती है।
अब राजघाट क्यों बना अगला पड़ाव?
दो दिनों की कार्रवाई के बाद विपक्ष ने आंदोलन को नया प्रतीकात्मक रूप देने की कोशिश की है। गुरुवार को INDIA गठबंधन के सांसदों की दूसरी लगातार बैठक हुई। बैठक के बाद नेताओं के राजघाट जाने की योजना बनी।
राजघाट को महात्मा गांधी की समाधि के कारण विपक्ष के लिए राजनीतिक और प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। विपक्षी नेता यहां पहुंचकर अपने प्रदर्शन को लोकतंत्र, संविधान और मतदाता अधिकारों से जोड़ना चाहते हैं।
कांग्रेस सांसद कोडिकुन्निल सुरेश ने कहा कि विपक्ष का आंदोलन जारी रहेगा और पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर कायम है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांग पर जवाब नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रखा जाएगा।
पुलिस ने राजघाट पर भी बढ़ाई सख्ती
विपक्ष के राजघाट मार्च के ऐलान के बाद दिल्ली पुलिस ने भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। राजघाट और आसपास के इलाकों में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लगाए गए, जिसके तहत बिना अनुमति भीड़ जुटाने और प्रदर्शन पर रोक लगाई जा सकती है।
सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई और संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग की गई। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही था कि विपक्षी सांसद राजघाट तक पहुंच पाएंगे या उन्हें रास्ते में ही रोक दिया जाएगा।
राहुल गांधी के तेवर भी हुए और कड़े
लगातार हिरासत के बावजूद राहुल गांधी ने अपना विरोध जारी रखने का संकेत दिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि उनका संघर्ष मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर है।
वहीं, चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ पक्ष विपक्ष के आरोपों को खारिज करते रहे हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची की समीक्षा निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही है और उसका उद्देश्य मतदाता सूची को सही एवं अद्यतन रखना है।
यही वजह है कि इस पूरे विवाद में अब सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और राजनीतिक संस्थाओं पर भरोसे का सवाल भी जुड़ गया है।
तीसरे दिन भी क्यों नहीं थम रहा विवाद?
गुरुवार को विपक्ष की रणनीति यह संकेत देती है कि वह लगातार प्रदर्शन के जरिए दबाव बनाए रखना चाहता है। दो दिनों में पुलिस कार्रवाई और हिरासत के बावजूद विपक्षी सांसदों की संख्या और दलों की भागीदारी बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
वहीं प्रशासन के सामने भी चुनौती कम नहीं है। राजधानी के बेहद संवेदनशील इलाके में लगातार विरोध प्रदर्शन, मार्च और बैरिकेडिंग के कारण यातायात तथा कानून-व्यवस्था दोनों प्रभावित हो सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब नजर इस बात पर है कि सरकार, चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच बातचीत का कोई रास्ता निकलता है या नहीं। अगर गतिरोध बना रहता है, तो आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद के साथ-साथ देशभर की राजनीति में और बड़ा रूप ले सकता है।

