लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन के दिन ही पार्टी कार्यालय में हंगामे की खबर सामने आई है। रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (UPCC) कार्यालय में नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ के पदभार ग्रहण समारोह के दौरान कार्यकर्ताओं के बीच कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, विवाद इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों के बीच जूते-चप्पल भी चले।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब कांग्रेस 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के मद्देनजर संगठन को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। पार्टी नेतृत्व में बदलाव को नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा था, लेकिन पदभार ग्रहण समारोह के दौरान हुए हंगामे ने संगठन के भीतर आपसी मतभेदों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आखिर कैसे बिगड़ा कांग्रेस कार्यालय का माहौल?
रिपोर्टों के अनुसार, आराधना मिश्रा के पदभार ग्रहण कार्यक्रम के दौरान पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अजय राय के समर्थक नारेबाजी करने लगे। इस पर दूसरे पक्ष के कुछ कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई। देखते ही देखते कहासुनी बढ़ गई और दोनों पक्षों के समर्थक आमने-सामने आ गए।
इसके बाद कार्यालय परिसर में धक्का-मुक्की और जूते-चप्पल चलने की घटना सामने आई। बताया गया कि हंगामा दस मिनट से अधिक समय तक जारी रहा। हालांकि, विवाद की हर कड़ी और इसमें शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
इस घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे। पार्टी कार्यालय में हुए इस घटनाक्रम ने प्रदेश कांग्रेस के नए नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती को उजागर किया है।
अजय राय ने लगाया बदसलूकी का आरोप
हंगामे के दौरान निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अजय राय नाराज होकर अपने समर्थकों के साथ कार्यालय से बाहर चले गए। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने अपने और अपने साथियों के साथ बदसलूकी किए जाने का आरोप लगाया। इसके बाद वह समर्थकों के साथ धरने पर भी बैठ गए।
स्थिति को संभालने के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नवनियुक्त कार्यकारी अध्यक्ष इमरान मसूद तथा राज्यसभा सदस्य प्रमोद तिवारी ने हस्तक्षेप किया। दोनों नेताओं ने अजय राय को मनाने की कोशिश की। बाद में अजय राय ने आराधना मिश्रा को प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठाकर पदभार ग्रहण की प्रक्रिया पूरी कराई।
यह घटनाक्रम बताता है कि पार्टी के भीतर मतभेदों को संभालना नए नेतृत्व के लिए शुरुआती चुनौतियों में शामिल हो सकता है। हालांकि, इस एक घटना के आधार पर संगठन में किसी बड़े विभाजन का निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

ममता चौधरी से विवाद की भी चर्चा
रिपोर्टों में हंगामे के पीछे लखनऊ की पार्षद ममता चौधरी और अजय राय के बीच पुराने विवाद का भी उल्लेख किया गया है। बताया गया कि अजय राय के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान ममता चौधरी के कांग्रेस मुख्यालय में प्रवेश को लेकर प्रतिबंध की बात सामने आई थी। आराधना मिश्रा के अध्यक्ष बनने के बाद ममता चौधरी की कार्यालय में मौजूदगी को लेकर भी चर्चा हुई।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार, कार्यालय में हुई कहासुनी के दौरान अजय राय पर कथित अभद्र टिप्पणी की गई, जिससे उनके समर्थक नाराज हो गए। इसके बाद माहौल और बिगड़ गया।
हालांकि, विवाद के सभी पहलुओं पर संबंधित पक्षों का विस्तृत और एकसमान बयान सामने नहीं आया है। इसलिए किसी एक व्यक्ति को पूरे हंगामे के लिए जिम्मेदार ठहराने से पहले आधिकारिक जानकारी और संबंधित पक्षों के बयान देखना जरूरी होगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नहीं पहुंचे अजय राय
पदभार ग्रहण की औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अजय राय शामिल नहीं हुए। वह कार्यक्रम के बाद कार्यालय से चले गए। इमरान मसूद से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होने की परंपरा नहीं रही है और कार्यालय में पदभार सौंपने की प्रक्रिया पूरी हो गई है।
यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि अजय राय अगस्त 2023 से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके कार्यकाल के बाद अब आराधना मिश्रा को संगठन की कमान सौंपी गई है। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
कौन हैं आराधना मिश्रा ‘मोना’?
आराधना मिश्रा उत्तर प्रदेश की वरिष्ठ कांग्रेस नेता और रामपुर खास विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं और लंबे समय से प्रदेश की राजनीति में सक्रिय हैं। वह 2019 से उत्तर प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल की नेता की जिम्मेदारी भी संभाल रही थीं।
कांग्रेस ने 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। वहीं, सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
नए नेतृत्व के सामने प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने और चुनावी रणनीति को प्रभावी बनाने की चुनौती है। पार्टी को अपने गठबंधन सहयोगियों के साथ तालमेल बैठाने और जमीनी स्तर पर संगठनात्मक काम तेज करने पर भी ध्यान देना होगा।
2027 के चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए क्या मायने?
उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए आगामी विधानसभा चुनाव राजनीतिक रूप से अहम हैं। पार्टी नेतृत्व में बदलाव के बाद कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा पैदा करना और संगठन के भीतर एकजुटता बनाए रखना महत्वपूर्ण होगा।
पदभार ग्रहण समारोह में हुआ हंगामा पार्टी के लिए असहज स्थिति जरूर है, लेकिन आगे की दिशा इस बात से तय होगी कि नया नेतृत्व मतभेदों को किस तरह संभालता है और संगठन को चुनावी तैयारी के लिए कितना प्रभावी बनाता है।
फिलहाल आराधना मिश्रा ने औपचारिक रूप से प्रदेश अध्यक्ष का पदभार ग्रहण कर लिया है। अब पार्टी की नजर संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय और आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों पर रहेगी।

