पुणे, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के पिंपरी-चिंचवड़ स्थित यशवंतराव चव्हाण मेमोरियल अस्पताल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। अस्पताल के पोस्टमार्टम विभाग में शराब पीने से जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन ने मेडिकल अधिकारी डॉ. वैभव म्हासके को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। मामले में विभागीय जांच भी शुरू की गई है। इस घटना ने अस्पताल की कार्यप्रणाली, ड्यूटी के दौरान कर्मचारियों की जिम्मेदारी और मृतकों के परिजनों को मिलने वाली सेवाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
डेथ सर्टिफिकेट के लिए रातभर इंतजार करता रहा व्यक्ति
मामला उस समय सामने आया, जब एक व्यक्ति अपने परिजन का मृत्यु प्रमाणपत्र लेने के लिए अस्पताल पहुंचा था। रिपोर्टों के मुताबिक, वह रातभर इंतजार करता रहा। जब उसने पोस्टमार्टम रूम के अंदर झांककर देखा, तो वहां कथित तौर पर शराब पीने से जुड़ी गतिविधियां नजर आईं।
इसके बाद उस व्यक्ति ने वीडियो रिकॉर्ड किया। वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया और अस्पताल प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। किसी परिजन की मृत्यु के बाद परिवार पहले ही दुख और तनाव से गुजर रहा होता है। ऐसे समय में आवश्यक दस्तावेजों के लिए लंबे समय तक इंतजार करना और संबंधित सेवाओं में देरी होना परिवार की परेशानी बढ़ा सकता है।
हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली गतिविधियों और ड्यूटी में हुई संभावित लापरवाही के सभी पहलुओं की पुष्टि विभागीय जांच के निष्कर्षों से होगी।
वीडियो में क्या दिखाई दिया?
वायरल वीडियो में पोस्टमार्टम विभाग के भीतर एक मेज पर बोतल, खाने-पीने की चीजें और भोजन की प्लेटें दिखाई देने की खबर है। वीडियो में एक व्यक्ति को सोफे पर लेटे हुए भी देखा गया। रिपोर्टों के अनुसार, आरोप है कि संबंधित मेडिकल अधिकारी शराब के नशे में थे।
वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और नगर निगम के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया। इसके बाद प्रशासन ने मेडिकल अधिकारी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि वायरल वीडियो अपने आप में घटना के हर पहलू का अंतिम प्रमाण नहीं होता। किस समय क्या हुआ, कौन-कौन मौजूद था और मरीजों से जुड़ी सेवाओं पर कितना असर पड़ा, इसकी पुष्टि जांच के आधार पर की जानी चाहिए।

डॉ. वैभव म्हासके सस्पेंड, विभागीय जांच शुरू
पिंपरी-चिंचवड़ महानगरपालिका प्रशासन ने मेडिकल अधिकारी डॉ. वैभव म्हासके को निलंबित कर दिया। अधिकारियों के मुताबिक, ड्यूटी के दौरान कथित तौर पर शराब के प्रभाव में रहने और इससे आवश्यक अस्पताल सेवाओं में बाधा पड़ने को गंभीरता से लिया गया।
प्रशासन ने महाराष्ट्र सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए कार्रवाई की। संबंधित अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने की मंजूरी भी दी गई है। रिपोर्टों के अनुसार, 15 दिनों के भीतर आरोपपत्र जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
निलंबन के दौरान अधिकारी को निर्धारित मुख्यालय से बाहर जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। विभागीय जांच में आरोपों, संबंधित कर्मचारियों की भूमिका और ड्यूटी के दौरान हुई घटनाओं की पड़ताल की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद ही मामले में आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट होगी।
अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
इस घटना के बाद अस्पताल में निगरानी और अनुशासन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पोस्टमार्टम विभाग अस्पताल का संवेदनशील हिस्सा होता है, जहां मृतकों के परिजन कानूनी प्रक्रिया, शव की सुपुर्दगी और मृत्यु प्रमाणपत्र जैसे जरूरी कामों के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे विभाग में कर्मचारियों की समय पर उपलब्धता और जिम्मेदारी निभाना बेहद जरूरी है। यदि ड्यूटी के दौरान लापरवाही के कारण परिवारों को अनावश्यक इंतजार करना पड़े, तो इससे अस्पताल की सेवाओं पर लोगों का भरोसा प्रभावित हो सकता है।
मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि अस्पताल परिसर में कर्मचारियों की निगरानी कैसे की जाती है और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या व्यवस्था मौजूद है। हालांकि, किसी व्यापक प्रशासनिक विफलता का निष्कर्ष निकालने से पहले जांच के नतीजों और अस्पताल की आधिकारिक प्रतिक्रिया को देखना जरूरी होगा।
अब जांच में क्या होगा?
प्रशासन की ओर से शुरू की गई विभागीय जांच में वीडियो की परिस्थितियों, संबंधित अधिकारी की ड्यूटी, अन्य कर्मचारियों की भूमिका और आवश्यक सेवाओं पर संभावित असर की पड़ताल की जाएगी। आरोपपत्र जारी होने के बाद संबंधित अधिकारी को अपना पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जा सकती है। फिलहाल इस मामले में सबसे अहम सवाल यह है कि अस्पताल के संवेदनशील विभाग में ऐसी स्थिति कैसे बनी और भविष्य में इसे रोकने के लिए कौन से कदम उठाए जाएंगे।

