नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026। देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर जारी बहस के बीच ECINET सॉफ्टवेयर का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में गलतियों और विसंगतियों की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर का नाम और उसका वर्जन सार्वजनिक करने से इनकार कर दिया है। आयोग के इस जवाब के बाद कांग्रेस ने पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।
इस पूरे विवाद में सबसे अहम सवाल यह है कि मतदाता सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में तकनीक का इस्तेमाल किस तरह किया गया, संभावित गलतियों की पहचान कैसे हुई और किसी मतदाता के नाम से जुड़ा अंतिम फैसला किसके अधिकार क्षेत्र में रहा। फिलहाल आयोग के जवाब, RTI कानून के प्रावधानों और कांग्रेस के आरोपों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
RTI आवेदन में क्या जानकारी मांगी गई थी?
तेलंगाना के करीमनगर में रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए. मुजीब अय्यूब ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत चुनाव आयोग से कई सवाल पूछे थे। उनका आवेदन मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण में इस्तेमाल किए गए डिजिटल सिस्टम और संभावित स्वचालित प्रक्रियाओं से जुड़ा था।
आवेदन में उस सॉफ्टवेयर, एप्लिकेशन या AI प्लेटफॉर्म का नाम और वर्जन बताने की मांग की गई थी, जिसका इस्तेमाल मतदाता रिकॉर्ड में गलतियों या विसंगतियों की पहचान के लिए किया गया। इसके अलावा यह भी पूछा गया था कि क्या सिस्टम अपने आप संदिग्ध रिकॉर्ड को जांच, सुधार या नाम हटाने के लिए चिह्नित करता है।
आवेदन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग और प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स जैसी तकनीकों के संभावित इस्तेमाल के बारे में भी जानकारी मांगी गई। साथ ही यह जानने की मांग की गई कि यदि सिस्टम किसी सही मतदाता के रिकॉर्ड को गलती से संदिग्ध बता दे, तो ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या सुरक्षा उपाय मौजूद हैं।
चुनाव आयोग ने जानकारी देने से क्यों किया इनकार?
16 अक्टूबर को दिए गए जवाब में आयोग ने सॉफ्टवेयर का नाम और वर्जन बताने से इनकार कर दिया। इसके लिए सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8(1)(d) का हवाला दिया गया। इस प्रावधान के तहत व्यावसायिक विश्वास, व्यापारिक रहस्य और बौद्धिक संपदा से संबंधित कुछ सूचनाओं को सार्वजनिक करने से छूट मिल सकती है, खासकर जब उनके खुलासे से किसी तीसरे पक्ष की प्रतिस्पर्धी स्थिति प्रभावित होने की आशंका हो।
AI, मशीन लर्निंग, स्वचालित तरीके से रिकॉर्ड चिह्नित करने और गलत पहचान से बचाव के उपायों से जुड़े सवालों पर आयोग ने कहा कि मांगी गई जानकारी स्पष्टीकरण के रूप में है और RTI अधिनियम की धारा 2(f) के तहत सूचना की परिभाषा में इस तरह के स्पष्टीकरण शामिल नहीं माने जा सकते।
एक अन्य सवाल में यह पूछा गया था कि सिस्टम द्वारा चिह्नित विसंगतियों की समीक्षा या मंजूरी कौन देता है। इस पर आयोग ने धारा 8(1)(g) का हवाला दिया। यह प्रावधान कुछ ऐसी सूचनाओं को सार्वजनिक करने से छूट देता है, जिनके खुलासे से किसी व्यक्ति की सुरक्षा को खतरा हो सकता है या गोपनीय स्रोत से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है।
इस जवाब से सॉफ्टवेयर के नाम और वर्जन की जानकारी तो सार्वजनिक नहीं हुई, लेकिन मतदाता सूची तैयार करने में तकनीक की भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो गई।

आयोग ने सॉफ्टवेयर को लेकर क्या सफाई दी?
आयोग ने अपने जवाब में यह भी कहा कि SIR प्रक्रिया के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया था। आयोग के अनुसार, संबंधित विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन की जिम्मेदारी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी यानी Electoral Registration Officer (ERO) की होती है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी मतदाता का नाम सूची में शामिल करने या हटाने का निर्णय तथ्यों और रिकॉर्ड के आधार पर संबंधित अधिकारी लेते हैं। इसका अर्थ है कि आयोग के आधिकारिक जवाब के अनुसार, अंतिम निर्णय की वैधानिक जिम्मेदारी संबंधित ERO की है।
हालांकि, डिजिटल सिस्टम किस तरह काम करता है, वह किन रिकॉर्ड को जांच के लिए चिह्नित करता है और अधिकारियों को सिस्टम में कितनी स्वतंत्रता मिलती है—ये ऐसे प्रश्न हैं जिन पर पारदर्शिता की मांग उठ रही है। किसी रिकॉर्ड का सिस्टम द्वारा चिह्नित होना और किसी मतदाता का नाम हटाने का अंतिम निर्णय होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं।
जयराम रमेश ने क्या सवाल उठाए?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस मामले को लेकर चुनाव आयोग की आलोचना की है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ECINET सॉफ्टवेयर और तकनीक के इस्तेमाल के बारे में जरूरी जानकारी साझा नहीं कर रहा है। कांग्रेस का दावा है कि इस तरह की जानकारी सार्वजनिक होने से SIR प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की जांच और समझ बेहतर हो सकती है।
जयराम रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि ECINET को किस कंपनी ने विकसित किया, इस बारे में जानकारी जनता को चुनाव आयोग के बजाय दूसरी जगह से क्यों मिली। उन्होंने तकनीक के इस्तेमाल और मतदाता सूची में संभावित विसंगतियों की पहचान के तरीके पर अधिक स्पष्टता की मांग की।
कांग्रेस ने SIR प्रक्रिया में कथित केंद्रीयकृत हेराफेरी के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों को साबित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। सॉफ्टवेयर का नाम या वर्जन सार्वजनिक न होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि मतदाता सूची में हेराफेरी हुई है। इसके लिए स्वतंत्र जांच और ठोस प्रमाण जरूरी होंगे।
ECINET क्या है और इस पर पहले भी सवाल क्यों उठे?
ECINET चुनाव आयोग का एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जिसे चुनाव से संबंधित कई एप्लिकेशन और सेवाओं को एकीकृत करने के उद्देश्य से जनवरी 2026 में शुरू किया गया था। इसका मकसद चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़ी डिजिटल सेवाओं को एक साझा व्यवस्था के तहत लाना है।
इस प्लेटफॉर्म को लेकर पहले भी सिस्टम तक अधिकारियों की पहुंच, तकनीकी नियंत्रण और मतदाता सूची में बदलाव करने की प्रक्रिया से संबंधित चिंताएं रिपोर्ट की गई हैं। कुछ चुनाव आयुक्तों ने भी डिजिटल सिस्टम के संचालन और अधिकारियों की वैधानिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन को लेकर सवाल उठाए थे। इन चिंताओं के बीच तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा और स्वतंत्र विशेषज्ञता की भूमिका पर भी चर्चा हुई है।
इन मुद्दों का महत्व इसलिए है क्योंकि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने का सीधा संबंध नागरिकों के मतदान के अधिकार से है। यदि तकनीक किसी रिकॉर्ड को संदिग्ध चिह्नित करती है, तो यह स्पष्ट होना चाहिए कि उसके बाद जांच किस तरह होती है और संबंधित मतदाता को अपना पक्ष रखने का अवसर कैसे मिलता है।
अब आगे क्या हो सकता है?
इस विवाद में आगे की दिशा RTI के जवाब के खिलाफ उपलब्ध अपील प्रक्रिया, आयोग की ओर से अतिरिक्त स्पष्टीकरण और डिजिटल सिस्टम की समीक्षा जैसे कदमों पर निर्भर कर सकती है। सूचना मांगने वाला व्यक्ति कानून के तहत सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपील कर सकता है, जहां यह जांचा जा सकता है कि जानकारी रोकने के लिए दिए गए कारण लागू प्रावधानों के अनुरूप हैं या नहीं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग के लिए भी यह महत्वपूर्ण होगा कि वह तकनीकी सुरक्षा और व्यावसायिक गोपनीयता बनाए रखते हुए मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया के बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराए। पारदर्शिता का अर्थ हर तकनीकी विवरण को बिना किसी सीमा के सार्वजनिक करना नहीं है, लेकिन मतदाता के अधिकारों को प्रभावित करने वाली प्रक्रिया को समझने और उसकी जवाबदेही तय करने के लिए स्पष्ट जानकारी जरूरी है।

