यमन: में जारी संघर्ष के बीच सरकारी सेना ने हूती विद्रोहियों के खिलाफ सैन्य अभियान तेज करने का दावा किया है। सेना के अनुसार, ‘डॉन ऑफ यमन’ (Dawn of Yemen) अभियान के तहत पिछले 24 घंटों में हूती ठिकानों को निशाना बनाते हुए कुल 753 सैन्य हमले किए गए। इस कार्रवाई में लगभग 218 हूती लड़ाकों और मैदानी कमांडरों को निष्क्रिय करने का दावा भी किया गया है।
यमनी सेना के सैन्य प्रवक्ता के मुताबिक, इन हमलों का उद्देश्य हूती विद्रोहियों की सैन्य क्षमता कमजोर करना, उनके कमांड नेटवर्क को बाधित करना और मोर्चों तक पहुंचने वाली रसद तथा अतिरिक्त सैनिकों की आपूर्ति रोकना था। सेना ने यह भी दावा किया कि कार्रवाई के दौरान 78 सैन्य वाहनों, हथियारों और अन्य सैन्य उपकरणों को नष्ट किया गया या उन्हें इस्तेमाल करने लायक नहीं छोड़ा गया।
हालांकि, इन आंकड़ों को अभी सेना के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टों में हताहतों की संख्या और सैन्य नुकसान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
यमनी सेना के अनुसार, अभियान के दौरान हूती विद्रोहियों के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें अग्रिम मोर्चों पर मौजूद कमांड और कंट्रोल सेंटर, सैन्य किलेबंदी, फायरिंग पोजिशन, सैनिकों के जमावड़े, अतिरिक्त बलों की तैनाती और आपूर्ति से जुड़े वाहन शामिल थे।
सेना का कहना है कि इन स्थानों पर हमले करने का उद्देश्य हूती लड़ाकों की गतिविधियों को सीमित करना और उन्हें अलग-अलग मोर्चों पर अतिरिक्त सैनिक तथा सैन्य सामग्री भेजने से रोकना था। इसके अलावा, कार्रवाई से सरकारी बलों को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ने और विरोधी पक्ष की सैन्य तैयारियों को बाधित करने में मदद मिलने का दावा किया गया है।
सैन्य प्रवक्ता ने यह भी कहा कि अभियान जारी है और सेना हूती संगठन की दोबारा संगठित होने तथा नए सिरे से सैन्य ताकत जुटाने की क्षमता को कमजोर करने की कोशिश कर रही है।
218 लड़ाकों को निष्क्रिय करने का क्या मतलब है?
इस सैन्य कार्रवाई में सबसे अधिक चर्चा 218 हूती लड़ाकों और मैदानी कमांडरों को निष्क्रिय करने के दावे की हो रही है। लेकिन यहां इस्तेमाल किए गए ‘निष्क्रिय’ शब्द को सीधे 218 लोगों की मौत के रूप में समझना सही नहीं होगा।
सैन्य बयानों में इस तरह के शब्द का इस्तेमाल अलग-अलग परिस्थितियों में किया जा सकता है। इसमें मारे गए, घायल हुए, पकड़े गए या लड़ाई जारी रखने में असमर्थ हुए लड़ाके शामिल हो सकते हैं। इस मामले में यमनी सेना ने इन 218 लोगों का विस्तृत वर्गीकरण सार्वजनिक नहीं किया है।
इसी वजह से यह स्पष्ट नहीं है कि कथित रूप से निष्क्रिय किए गए लड़ाकों में कितने लोगों की मौत हुई, कितने घायल हुए और कितनों को किसी अन्य तरीके से लड़ाई से बाहर किया गया। इस आंकड़े की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है।

‘डॉन ऑफ यमन’ अभियान का उद्देश्य क्या है?
‘डॉन ऑफ यमन’ यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में चलाया जा रहा सैन्य अभियान है। अक्टूबर 2026 में इस अभियान के तहत सरकारी बलों ने विभिन्न मोर्चों पर हूती ठिकानों और उनकी सैन्य गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की जानकारी दी है।
सरकारी पक्ष का व्यापक उद्देश्य हूती विद्रोहियों के कब्जे वाले क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करना, सैन्य आपूर्ति मार्गों पर दबाव बढ़ाना और राजधानी सना सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर नियंत्रण दोबारा स्थापित करना है। हालांकि, किसी क्षेत्र पर वास्तविक नियंत्रण स्थापित करना केवल हवाई या अन्य सैन्य हमलों पर निर्भर नहीं करता। इसके लिए जमीनी लड़ाई, आपूर्ति व्यवस्था, स्थानीय परिस्थितियों और विरोधी पक्ष की जवाबी कार्रवाई भी अहम होती है।
इसलिए 753 हमलों का दावा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि हूती संगठन की सैन्य क्षमता पूरी तरह समाप्त हो गई है या सरकारी सेना ने निर्णायक जीत हासिल कर ली है। इसके वास्तविक असर का आकलन आगे के घटनाक्रम और स्वतंत्र रूप से सत्यापित जानकारी के आधार पर ही किया जा सकेगा।
यमन में संघर्ष की पृष्ठभूमि
यमन में लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता और सशस्त्र संघर्ष जारी है। हूती आंदोलन ने वर्ष 2014 में राजधानी सना और देश के कई अन्य क्षेत्रों पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसके बाद मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार के समर्थन में सैन्य हस्तक्षेप किया।
वर्षों से जारी संघर्ष ने देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और आम नागरिकों के जीवन पर गंभीर असर डाला है। अलग-अलग इलाकों में नियंत्रण को लेकर लड़ाई, सैन्य अभियान और जवाबी कार्रवाई इस संकट को लगातार जटिल बनाते रहे हैं।
हूती संगठन यमन के उत्तर और पश्चिम के बड़े हिस्सों पर नियंत्रण रखता है, जबकि सरकारी बलों और उनके सहयोगियों की मौजूदगी दक्षिण तथा पूर्व के कई क्षेत्रों में है। अलग-अलग मोर्चों पर बदलती परिस्थितियों के कारण किसी एक सैन्य कार्रवाई से पूरे संघर्ष का भविष्य तय हो जाना आसान नहीं है।
आम नागरिकों की सुरक्षा भी बड़ी चिंता
यमन में तेज होती सैन्य कार्रवाई के बीच नागरिकों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया कि सेना वैध सैन्य ठिकानों को निशाना बना रही है और नागरिकों तथा नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं।
हालांकि, इन दावों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कार्रवाई के दौरान नागरिकों को कोई नुकसान नहीं हुआ। उपलब्ध जानकारी में इस अभियान के दौरान नागरिक हताहतों की स्थिति का स्पष्ट और स्वतंत्र रूप से सत्यापित विवरण सामने नहीं आया है।
संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में सैन्य ठिकानों के आसपास रहने वाले लोगों के लिए हमलों, विस्थापन और आवश्यक सेवाओं में रुकावट का जोखिम बना रहता है। इसलिए आगे की कार्रवाई के साथ-साथ नागरिक नुकसान से जुड़ी विश्वसनीय जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।
आगे क्या हो सकता है?
यमनी सेना ने संकेत दिया है कि ‘डॉन ऑफ यमन’ अभियान जारी रहेगा। यदि सरकारी बल हूती विद्रोहियों की आपूर्ति व्यवस्था, कमांड सेंटरों और अतिरिक्त सैनिकों की आवाजाही को प्रभावी ढंग से बाधित कर पाते हैं, तो इससे कुछ मोर्चों पर सैन्य संतुलन प्रभावित हो सकता है।
दूसरी ओर, हूती संगठन की संभावित जवाबी कार्रवाई और जमीनी स्तर पर बदलते हालात भी संघर्ष की दिशा तय करेंगे। अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि हालिया हमलों से युद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है।
आने वाले दिनों में सबसे अहम सवाल यही रहेगा कि क्या सेना के दावों के अनुरूप हूती विद्रोहियों की सैन्य गतिविधियों में वास्तविक गिरावट आती है और क्या सरकारी बल जमीनी स्तर पर अपने नियंत्रण का विस्तार कर पाते हैं।

