देश: की राजनीति में युवाओं के मुद्दों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर सक्रिय कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कांग्रेस के साथ अपने संबंधों को लेकर अहम बयान दिया है। उन्होंने साफ किया कि उनका संगठन किसी एक राजनीतिक दल के साथ खड़ा होने के बजाय स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में काम करना चाहता है। दीपके के मुताबिक, CJP का उद्देश्य किसी पार्टी की राजनीति करना नहीं, बल्कि युवाओं की आवाज उठाना और उन मुद्दों पर दबाव बनाना है जिन्हें संगठन जरूरी मानता है।
दीपके ने एक हालिया इंटरव्यू में कहा कि कांग्रेस और CJP को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में पेश करना सही नहीं है। उनके अनुसार, दोनों पक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपने-अपने तरीके से मुद्दे उठा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी मुद्दे पर समान विचार होने का अर्थ यह नहीं है कि दो संगठनों का राजनीतिक विलय हो गया है या वे औपचारिक गठबंधन में आ गए हैं।
उनके बयान से साफ है कि CJP फिलहाल अपनी अलग पहचान बनाए रखना चाहती है। हालांकि, संगठन की आगे की रणनीति को लेकर अंतिम घोषणा नहीं की गई है।
एक पार्टी के साथ खड़े होने से क्यों बच रही है CJP?
अभिजीत दीपके ने संगठन की स्वतंत्रता को अपनी रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनका कहना है कि CJP को युवाओं का समर्थन इसलिए मिला, क्योंकि लोग उसे किसी राजनीतिक दल के अधीन काम करने वाले संगठन के बजाय स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में देखते हैं।
दीपके ने इंटरव्यू में दावा किया कि करीब 2.5 करोड़ युवा CJP को फॉलो करते हैं। उनके मुताबिक, यदि संगठन कांग्रेस, आम आदमी पार्टी या किसी अन्य राजनीतिक दल के साथ औपचारिक रूप से जुड़ जाता है, तो उसकी स्वतंत्रता पर सवाल उठ सकते हैं और समर्थकों के बीच उसकी छवि प्रभावित हो सकती है।
उनका तर्क है कि किसी एक पार्टी का समर्थन करने के बाद भविष्य में राजनीतिक परिस्थितियां बदलने पर संगठन को अपने फैसले का जवाब देना पड़ सकता है। यदि आज जिस दल के साथ संगठन खड़ा है, वही कल सरकार में आकर कोई विवादित फैसला लेता है, तो समर्थक पूछ सकते हैं कि CJP ने उसका साथ क्यों दिया था।
इसी आशंका के कारण दीपके संगठन को किसी एक दल के साथ जोड़ने से बचना चाहते हैं। हालांकि, समर्थकों की संख्या से जुड़ा उनका आंकड़ा उनका अपना दावा है; इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।
क्या कांग्रेस को समर्थन देने से इनकार कर दिया?
दीपके ने कांग्रेस से हर तरह की दूरी बनाए रखने की बात नहीं कही। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी मुद्दे पर उद्देश्य समान होने पर CJP राजनीतिक दलों को समर्थन दे सकती है। यानी संगठन का रुख व्यक्ति या पार्टी के बजाय मुद्दे पर आधारित रहने की बात कही गई है।
उन्होंने राहुल गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब राहुल गांधी को हिरासत में लिया गया था, तब उन्होंने इस कार्रवाई के खिलाफ अपनी बात रखी थी। उनके मुताबिक, यदि किसी राजनीतिक दल या समूह का उद्देश्य उस मुद्दे से मेल खाता है जिसके लिए CJP काम कर रही है, तो संगठन उस मुद्दे पर साथ आ सकता है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि CJP ने कांग्रेस के साथ औपचारिक गठबंधन की घोषणा कर दी है। दीपके के बयान से संकेत मिलता है कि संगठन साझा मुद्दों पर समर्थन देने और किसी पार्टी का स्थायी राजनीतिक हिस्सा बनने के बीच अंतर रखना चाहता है।

ज्ञानेश कुमार को लेकर क्या है विवाद?
अभिजीत दीपके के बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का भी जिक्र आया। दीपके के अनुसार, विपक्षी दल और CJP चुनावी प्रक्रिया से जुड़े जिन सवालों को उठा रहे हैं, उनमें कुछ समानताएं हैं। उनका कहना है कि CJP भी इन्हीं मुद्दों पर अपनी लड़ाई लड़ रही है।
चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्षी दलों और कुछ समूहों ने सवाल उठाए हैं। इन मुद्दों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। हालांकि, किसी आरोप को प्रमाणित तथ्य मानने के लिए संबंधित दस्तावेजों, आधिकारिक जवाबों और स्वतंत्र जांच को देखना जरूरी है।
दीपके का रुख यह है कि समान उद्देश्य के लिए अलग-अलग समूहों का सक्रिय रहना लोकतंत्र में स्वाभाविक है। उनके मुताबिक, किसी आंदोलन का प्रभाव इस बात पर निर्भर नहीं होना चाहिए कि वह किसी राजनीतिक दल के साथ मंच साझा करता है या नहीं।
आंदोलन को आपस में लड़ाने की साजिश का आरोप
दीपके ने यह आरोप भी लगाया कि आंदोलन से जुड़े समूहों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उनका दावा है कि जब कोई आंदोलन मजबूत होने लगता है, तो उसे कमजोर करने के लिए उससे जुड़े संगठनों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास किया जा सकता है।
उन्होंने ब्रिटिश शासन का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग समूहों के बीच टकराव पैदा करना आंदोलन को नुकसान पहुंचाने का तरीका रहा है। दीपके ने आरोप लगाया कि CJP और कांग्रेस के बीच विवाद का नैरेटिव भी इसी तरह बनाया जा रहा है, ताकि चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों से ध्यान हट जाए।
यह दीपके का आरोप है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं है कि किसी पक्ष ने जानबूझकर ऐसा नैरेटिव तैयार करने की साजिश की है।
आगे क्या होगी CJP की रणनीति?
दीपके ने कहा कि संगठन के नेतृत्व के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि CJP आने वाले दिनों में किन कार्यक्रमों या आंदोलनों को प्राथमिकता देगी और राजनीतिक दलों के साथ मुद्दा-आधारित सहयोग का स्वरूप क्या होगा।
CJP की चुनौती यह होगी कि वह युवाओं के मुद्दों पर दबाव बनाए रखते हुए अपनी स्वतंत्र पहचान को कैसे कायम रखती है। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के साथ समान मुद्दों पर सहयोग की संभावना भी पूरी तरह खारिज नहीं की गई है।
राजनीतिक रूप से यह स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि किसी आंदोलन की ताकत केवल उसके समर्थकों की संख्या से नहीं, बल्कि उसकी विश्वसनीयता, स्पष्ट रणनीति और लगातार उठाए जाने वाले मुद्दों से भी तय होती है।

