लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में पार्किंग विवाद के बाद तीन लोगों की हत्या के मामले ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। सआदतगंज क्षेत्र के नौबस्ता स्थित ब्राह्मणी टोला में हुई इस वारदात के बाद पीड़ित परिवार का गुस्सा सामने आया। मृतकों की बेटी सुमेधा तिवारी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाते हुए आरोपी के मकान पर बुलडोजर चलाने, परिवार को आर्थिक सहायता देने और सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।
परिवार का कहना है कि इस घटना ने उनकी जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने प्रदर्शन किया। प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को मौके पर पहुंचकर परिवार से बातचीत करनी पड़ी। इस बीच 28 अक्टूबर को आई रिपोर्टों के अनुसार, मामले में छह आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है और आरोपी के मकान में कथित अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
पार्किंग विवाद में चली गोली, तीन लोगों की मौत
यह घटना सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्किंग और चबूतरे से जुड़े विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। गोलीबारी में एक ही परिवार के तीन लोगों—शिवाजी तिवारी, उनके भाई शंभू तिवारी और शिवाजी के बेटे सुयश तिवारी—की मौत हो गई।
घटना के बाद परिवार में मातम छा गया। खास तौर पर सुयश की शादी की तैयारियों के बीच हुई इस वारदात ने परिजनों को गहरे सदमे में डाल दिया। परिवार में शादी के कार्ड छपवाने और मेहमानों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन खुशियों की तैयारी देखते ही देखते शोक में बदल गई।
पुलिस मामले की जांच कर रही है। शुरुआती रिपोर्टों में विवाद की वजह पार्किंग बताई गई है। हालांकि, घटना के सभी पहलुओं और प्रत्येक आरोपी की भूमिका का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा।

बेटी ने रखीं सरकार के सामने कई मांगें
घटना के बाद सुमेधा तिवारी कैमरे के सामने आईं और मुख्यमंत्री से न्याय की अपील की। उन्होंने परिवार के लिए एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता, मां के लिए सरकारी नौकरी और अपनी पढ़ाई की जिम्मेदारी सरकार द्वारा उठाए जाने की मांग रखी।
सुमेधा ने परिवार के सदस्यों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उनके मुताबिक, घटना के बाद उन्हें, उनकी मां और परिवार की अन्य महिला सदस्यों को खतरा महसूस हो रहा है। उन्होंने सरकार से परिवार को दीर्घकालिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की।
उनकी भावुक अपील के बाद मामला केवल हत्या की जांच तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पीड़ित परिवार के पुनर्वास, आर्थिक सहायता और सुरक्षा की मांगें भी चर्चा के केंद्र में आ गईं।
अंतिम संस्कार से पहले प्रदर्शन, अधिकारियों से हुई बातचीत
पोस्टमार्टम के बाद जब तीनों के शव घर पहुंचे, तो परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश बढ़ गया। रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार ने कुछ समय तक अंतिम संस्कार रोककर विरोध प्रदर्शन किया। लोग आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
स्थिति बिगड़ने पर कई थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई। जिलाधिकारी विशाख जी. और पुलिस आयुक्त तरुण गाबा ने भी मौके पर पहुंचकर परिवार से बातचीत की। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने आरोपी के मकान में घुसने और वहां तोड़फोड़ करने की कोशिश भी की, जिसे पुलिस ने रोका।
बाद में उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और भाजपा नेता नीरज सिंह भी परिवार से मिले। रिपोर्टों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने कड़ी कार्रवाई और फास्ट ट्रैक सुनवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद परिवार अंतिम संस्कार के लिए राजी हुआ।
छह आरोपी गिरफ्तार, कथित अवैध निर्माण पर बुलडोजर कार्रवाई
28 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनमें मुख्य आरोपी बताए जा रहे ऋषभ शुक्ला के अलावा उसके परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल हैं। दो अन्य लोगों की तलाश किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
इसी दौरान लखनऊ विकास प्राधिकरण की टीम ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में आरोपी के मकान को सील किया और सड़क की जमीन पर किए गए कथित अवैध निर्माण को हटाने के लिए बुलडोजर चलाया। अधिकारियों के मुताबिक, निर्माण से संबंधित जरूरी दस्तावेज मौके पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके। नजूल भूमि पर कथित निर्माण को लेकर आगे की कार्रवाई की बात भी कही गई है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि रिपोर्ट में कार्रवाई को अवैध निर्माण हटाने और मकान सील करने के रूप में बताया गया है। इसे पूरे मकान को गिरा देने की कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
परिवार को नौकरी, शिक्षा और सुरक्षा का आश्वासन
परिवार की मांगों पर बातचीत के बाद सरकार की ओर से राहत के कई आश्वासन दिए जाने की खबर है। रिपोर्टों के मुताबिक, परिवार के एक सदस्य को नगर निगम में नौकरी देने, सुमेधा की पढ़ाई का खर्च उठाने और परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराने की बात कही गई है। आर्थिक सहायता का भी आश्वासन दिया गया है।
हालांकि, इन घोषणाओं के क्रियान्वयन, नौकरी की औपचारिक नियुक्ति और सहायता राशि के भुगतान की स्थिति की पुष्टि संबंधित सरकारी आदेशों से की जानी चाहिए।
इस मामले में परिवार की मुख्य मांग है कि आरोपियों के खिलाफ निष्पक्ष जांच हो और उन्हें कानून के तहत सजा मिले। अब जांच की प्रगति, अदालत में होने वाली सुनवाई और परिवार को दिए गए आश्वासनों के पालन पर नजर रहेगी।

