गांधीनगर: बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को खत्म करने और बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने के उद्देश्य से गुजरात में एक नई पहल शुरू की गई है। राज्य सरकार के मंत्रियों ने गांधीनगर में ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अभियान का मकसद लोगों को बाल विवाह के दुष्परिणामों, बच्चों की शिक्षा के महत्व और इस प्रथा को रोकने वाले कानूनी प्रावधानों के बारे में जागरूक करना है।
गुजरात ने वर्ष 2030 तक राज्य को बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। ऐसे में यह अभियान केवल जागरूकता तक सीमित नहीं, बल्कि समुदायों को इस सामाजिक समस्या के खिलाफ सक्रिय रूप से जोड़ने की कोशिश भी है।
किन मंत्रियों ने दिखाई हरी झंडी?
27 अक्टूबर 2026 को गांधीनगर के टाउनहॉल परिसर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गुजरात के शिक्षा मंत्री डॉ. प्रद्युम्न वाजा और महिला एवं बाल विकास मंत्री डॉ. मनीषा वकील ने ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ को रवाना किया।
यह कार्यक्रम गुजरात राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की ओर से आयोजित ‘बाल सुरक्षा सेवा संकल्प’ कार्यक्रम के तहत हुआ। इस मौके पर आयोग की अध्यक्ष धर्मिष्ठाबेन गज्जर, बाल अधिकारों के क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और सरकारी अधिकारी भी मौजूद रहे।
यह पहल बाल अधिकारों की रक्षा और बाल विवाह रोकने के लिए सरकार तथा सामाजिक संगठनों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
क्या करेगा ‘बाल विवाह मुक्ति रथ’?
‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ एक मोबाइल जागरूकता अभियान है, जो गुजरात के अलग-अलग इलाकों में पहुंचकर लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करेगा। रथ पर बाल विवाह के विरोध में संदेश देने वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इसके अलावा लाउडस्पीकर के जरिए भी लोगों तक जागरूकता संदेश पहुंचाए जाएंगे।
इस अभियान का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि कम उम्र में विवाह बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, मानसिक विकास और भविष्य पर गंभीर असर डाल सकता है। खासकर उन इलाकों में जागरूकता बढ़ाना जरूरी है, जहां सामाजिक दबाव, पारिवारिक परंपराओं या आर्थिक परिस्थितियों के कारण कम उम्र में विवाह की घटनाएं सामने आती हैं।
अभियान के जरिए लोगों को यह भी बताया जाएगा कि बाल विवाह रोकना केवल सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। परिवार, समुदाय, पंचायत, स्कूल और सामाजिक संस्थाएं भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती हैं।
1,500 लोगों ने लिया बाल अधिकारों की रक्षा का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान करीब 1,500 प्रतिभागियों ने बाल विवाह, बाल तस्करी, बच्चों के शोषण और बाल मजदूरी के खिलाफ काम करने की शपथ ली। प्रतिभागियों ने बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने और उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य, सम्मान तथा समान अवसरों की रक्षा करने का संकल्प भी लिया।
यह पहल इसलिए अहम है, क्योंकि बाल विवाह की समस्या को केवल कानून बनाकर समाप्त नहीं किया जा सकता। इसके लिए समाज की सोच में बदलाव, समय पर शिकायत और जरूरतमंद बच्चों को सहायता उपलब्ध कराना भी जरूरी है।
यदि किसी परिवार या समुदाय में कम उम्र में विवाह की तैयारी हो रही हो, तो समय रहते संबंधित अधिकारियों तक सूचना पहुंचाना बच्चे को संभावित नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है।
गुजरात को 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने का लक्ष्य
‘जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन’ (JRC) की पहल से शुरू हुआ यह अभियान गुजरात को वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य से जुड़ा है। संगठन बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए काम करता है और गुजरात में अपने सहयोगी संगठनों के साथ राज्य के सभी 34 जिलों में सक्रिय होने की जानकारी देता है।
संगठन के राष्ट्रीय संयोजक रविकांत ने गुजरात से बाल विवाह समाप्त करने की दिशा में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की अपील की। उनका संदेश है कि हर बच्चे को अपना बचपन जीने, शिक्षा हासिल करने और अपने सपनों को पूरा करने का अवसर मिलना चाहिए।
इस अभियान को केंद्र सरकार के ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ कार्यक्रम के तहत चलाए जा रहे जागरूकता प्रयासों से भी जोड़कर देखा जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर इस पहल का उद्देश्य समुदायों को जागरूक करना, बाल विवाह की समय पर सूचना देने को प्रोत्साहित करना और संबंधित अधिकारियों की भूमिका मजबूत करना है।
बाल विवाह पर क्या कहता है कानून?
भारत में बाल विवाह रोकने के लिए बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 लागू है। सामान्य कानूनी परिभाषा के अनुसार, 18 वर्ष से कम उम्र की लड़की और 21 वर्ष से कम उम्र के लड़के को बाल विवाह के संदर्भ में नाबालिग माना जाता है। कानून में बाल विवाह कराने, बढ़ावा देने या उसमें शामिल होने से संबंधित परिस्थितियों के लिए दंडात्मक प्रावधान हैं।
बाल विवाह की आशंका होने पर लोग संबंधित प्रशासन, पुलिस या बाल विवाह निषेध अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं। संकट में फंसे बच्चों की सहायता के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 भी उपलब्ध है।
हालांकि, कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ परिवारों और समुदायों की भागीदारी भी आवश्यक है। बच्चों की पढ़ाई जारी रखने, परिवारों को सहायता देने और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने से इस समस्या को जड़ से खत्म करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
क्या जागरूकता अभियान गुजरात को बाल विवाह मुक्त बना पाएगा?
‘बाल विवाह मुक्ति रथ’ की शुरुआत ने गुजरात में बाल विवाह के खिलाफ अभियान को नई गति देने की कोशिश की है। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जागरूकता संदेश कितने लोगों तक पहुंचते हैं, शिकायतों पर कितनी तत्परता से कार्रवाई होती है और जोखिम में रहने वाले बच्चों को समय पर संरक्षण मिल पाता है या नहीं।
राज्य का 2030 का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है। इसे हासिल करने के लिए सरकार, प्रशासन, पंचायतों, स्कूलों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों को मिलकर काम करना होगा।

