अहमदाबाद: गुजरात में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत अपनी राजनीतिक मुहिम को आगे बढ़ाया। मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 को अहमदाबाद और राजकोट में पदयात्राएं निकाली गईं। अहमदाबाद में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा तथा उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी शामिल हुए। बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने।
इस अभियान के केंद्र में चुनावी प्रक्रिया, निर्वाचन आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर चल रही राजनीतिक बहस है। भाजपा का कहना है कि विपक्ष चुनावी संस्थाओं के बारे में सवाल उठाकर लोगों के बीच अविश्वास पैदा कर रहा है। वहीं, मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विपक्ष की आपत्तियां भी इस बहस का अहम हिस्सा हैं।
अहमदाबाद में कहां से कहां तक निकली पदयात्रा?
अहमदाबाद में भाजपा की पदयात्रा नवा वाडज क्षेत्र में व्यासवाड़ी चौराहे के पास भगवान परशुराम की प्रतिमा से शुरू होकर सुभाष ब्रिज तक निकाली गई। इसमें मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और जेपी नड्डा के साथ हर्ष संघवी सहित पार्टी के कई नेता शामिल हुए।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया और चुनावी व्यवस्था तथा संवैधानिक संस्थाओं को लेकर पार्टी का पक्ष रखा। पदयात्रा को राज्य में चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा बताया गया, जिसके जरिए अलग-अलग शहरों और जिलों में लोगों तक राजनीतिक संदेश पहुंचाने की योजना है।
आयोजन के कारण अहमदाबाद के कुछ मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव भी किया गया। ऐसे कार्यक्रमों के दौरान वाहन चालकों को प्रशासन की ओर से जारी यातायात संबंधी निर्देशों का ध्यान रखने की जरूरत होती है।
जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर लगाए आरोप
पदयात्रा के दौरान जेपी नड्डा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष चुनाव में जीत मिलने पर परिणाम को जनादेश मानता है, लेकिन हारने के बाद निर्वाचन आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाता है।
नड्डा ने चुनावी संस्थाओं की विश्वसनीयता का समर्थन करते हुए कहा कि चुनाव से जुड़ी शिकायतों को साक्ष्यों के साथ संबंधित अधिकारियों के सामने रखा जाना चाहिए। उन्होंने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का भी बचाव किया।
भाजपा नेताओं का तर्क है कि मतदाता सूची में दोहरी प्रविष्टियों, मृत मतदाताओं और दूसरी वजहों से अपात्र हो चुके नामों की पहचान के लिए सत्यापन आवश्यक है। हालांकि, SIR को लेकर उठने वाली आपत्तियों और उसके प्रभाव का आकलन संबंधित आधिकारिक आंकड़ों, नियमों तथा शिकायतों के आधार पर किया जाना चाहिए।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि कांग्रेस और विपक्ष के बारे में नड्डा के बयान भाजपा का राजनीतिक पक्ष हैं। इन बयानों को अपने आप में विपक्ष के आरोपों या आशंकाओं का निर्णायक खंडन नहीं माना जा सकता।

राजकोट में भी मार्च, कांग्रेस ने किया विरोध
भाजपा ने इसी अभियान के तहत राजकोट में भी पदयात्रा आयोजित की। यहां प्रदेश भाजपा प्रभारी तरुण चुग, प्रदेश अध्यक्ष जगदीश विश्वकर्मा और केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया समेत कई नेता मौजूद रहे। सांसदों, स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी इसमें भाग लिया।
राजकोट में पदयात्रा के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान पुलिस और कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तनाव की स्थिति बनी तथा कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
इस घटनाक्रम से साफ है कि अभियान केवल भाजपा के जनसंपर्क कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके मुद्दों को लेकर राजनीतिक विरोध भी सामने आया। हालांकि, विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई घटनाओं के सभी पहलुओं को समझने के लिए पुलिस और संबंधित पक्षों के विस्तृत बयानों की पुष्टि आवश्यक है।
क्या है SIR, जिस पर केंद्रित है राजनीतिक बहस?
SIR का पूरा नाम Special Intensive Revision यानी विशेष गहन पुनरीक्षण है। यह निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची की व्यापक जांच और अद्यतन करने की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य पात्र मतदाताओं के नामों की शुद्धता सुनिश्चित करना और सूची में मौजूद त्रुटियों की पहचान करना है।
भाजपा इस प्रक्रिया को मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाने की कवायद बताती है। दूसरी ओर, SIR पर बहस में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि पात्र मतदाता सूची से बाहर न रह जाएं, लोगों को अपने विवरण सही कराने का उचित अवसर मिले और दावे-आपत्तियों का निष्पक्ष तरीके से निपटारा हो।
इसलिए SIR पर किसी भी निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए केवल राजनीतिक भाषण पर्याप्त नहीं हैं। निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश, प्रकाशित आंकड़े, दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया और संबंधित मामलों में की गई कार्रवाई भी महत्वपूर्ण हैं।
गुजरात के दूसरे शहरों तक पहुंचेगा अभियान
भाजपा ने ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान के तहत गुजरात के विभिन्न शहरों और जिलों में पदयात्राओं, प्रेस कॉन्फ्रेंस और जनसंपर्क कार्यक्रमों की योजना बनाई है। अभियान का उद्देश्य पार्टी के अनुसार चुनावी प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति भरोसा मजबूत करना है।
ऐसे कार्यक्रम राजनीतिक दलों को अपने विचार जनता तक पहुंचाने का अवसर देते हैं। साथ ही, लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की भूमिका, चुनावी पारदर्शिता और नागरिकों की शिकायतों पर सुनवाई जैसे विषयों पर सार्वजनिक चर्चा भी जरूरी रहती है।

