नई दिल्ली: समुद्र के रास्ते दूसरे देशों तक माल पहुंचाने वाले नाविकों की जिंदगी अक्सर परिवार से दूर और मुश्किल परिस्थितियों में गुजरती है। लेकिन जब घर लौटने का तय समय बीत जाए और वापसी की कोई स्पष्ट तारीख भी सामने न हो, तो इंतजार परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन जाता है। ऐसा ही मामला पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पर फंसे छह भारतीय नाविकों का सामने आया है। इन नाविकों में उत्तर प्रदेश के प्रयागराज निवासी विनीत किशोर मिश्रा भी शामिल हैं। उनके परिवार का कहना है कि वे लंबे समय से उनकी सुरक्षित वापसी की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन अब तक कोई स्पष्ट समाधान नहीं मिला है।
परिवार के मुताबिक, जहाज पर बिजली की आपूर्ति बंद होने, खाने-पीने की व्यवस्था में परेशानी और घर लौटने की अनिश्चितता ने चिंता बढ़ा दी है। विनीत की पत्नी और बच्चे उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं। परिवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से हस्तक्षेप करने की अपील की है।
फरवरी में जहाज पर सवार हुए थे विनीत मिश्रा
परिजनों के अनुसार, विनीत किशोर मिश्रा 25 फरवरी को केवर नाम के जनरल कार्गो जहाज पर चीफ ऑफिसर के रूप में सवार हुए थे। जहाज ईरान और ओमान के समुद्री रास्तों से गुजरने के बाद 17 अप्रैल को पाकिस्तान के कराची बंदरगाह पहुंचा। इसके बाद से विनीत और उनके साथ मौजूद पांच अन्य भारतीय नागरिक वहीं फंसे हुए हैं।
परिवार के अनुसार, विनीत छह महीने के अनुबंध पर काम कर रहे थे। यह अनुबंध अगस्त में समाप्त हो गया, लेकिन इसके बाद भी उनकी घर वापसी नहीं हो सकी। परिजनों का दावा है कि उनका वीजा और अनुबंध दोनों समाप्त हो चुके हैं, इसके बावजूद उन्हें जहाज से आधिकारिक रूप से उतरने यानी साइन ऑफ करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
नाविकों की वापसी को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने से परिवार की बेचैनी लगातार बढ़ रही है। हालांकि, जहाज से उतरने में देरी और वापसी की मौजूदा स्थिति के संबंध में संबंधित अधिकारियों की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना जरूरी है।

बच्चों का सवाल—मम्मा, पापा कब आएंगे?
इस पूरे मामले का सबसे भावुक पहलू विनीत के परिवार की चिंता है। उनकी पत्नी नेहा मिश्रा के मुताबिक, उनके दोनों बच्चे बार-बार पूछते हैं कि उनके पिता घर कब लौटेंगे। बच्चों के इस सवाल का जवाब देना उनके लिए आसान नहीं है। वह उन्हें भरोसा दिलाती हैं कि पापा वापस आ जाएंगे, लेकिन खुद उन्हें भी वापसी की तारीख का पता नहीं है।
परिवार के अनुसार, विनीत से बातचीत करना भी आसान नहीं है। नेहा का दावा है कि उन्हें लगभग 15 से 20 दिनों में एक बार पति से बात करने का मौका मिलता है और बातचीत भी महज एक-दो मिनट तक सीमित रहती है। इतनी कम बातचीत में वह न तो पति की स्थिति विस्तार से जान पाती हैं और न ही घर लौटने की कोई पक्की जानकारी हासिल कर पाती हैं।
लंबे समय तक परिवार से दूर रहना और वापसी को लेकर अनिश्चितता नाविकों के साथ-साथ उनके परिजनों के लिए भी मानसिक तनाव का कारण बन रही है।
जहाज पर तीन महीने से बिजली नहीं होने का दावा
विनीत के परिवार ने जहाज पर बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। नेहा मिश्रा के अनुसार, पिछले तीन महीनों से जहाज पर बिजली की आपूर्ति नहीं है। परिवार का कहना है कि नाविकों को अंधेरे में रहना पड़ रहा है और भोजन की व्यवस्था भी नियमित या पर्याप्त नहीं होने की शिकायत है।
विनीत के पिता ललित किशोर मिश्रा के मुताबिक, उनके बेटे ने बताया कि सुबह नाश्ते में दो बिस्कुट मिलते हैं, दोपहर का खाना शाम करीब चार बजे दिया जाता है और रात का भोजन लगभग 11 बजे पहुंचता है। परिवार को आशंका है कि ऐसी परिस्थितियों में लंबे समय तक रहना नाविकों की सेहत और सुरक्षा पर असर डाल सकता है।
ये बातें परिवार की ओर से किए गए दावे हैं। जहाज पर मौजूदा सुविधाओं, भोजन की वास्तविक उपलब्धता और बिजली आपूर्ति बंद होने के कारणों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी आवश्यक है। फिर भी, यदि ये स्थितियां बनी हुई हैं, तो नाविकों की बुनियादी जरूरतों और सुरक्षा को लेकर तत्काल स्पष्टता बेहद जरूरी है।
जहाज जब्त होने के पीछे क्या है विवाद?
परिवार के अनुसार, जहाज के कराची पहुंचने के बाद एक ईरानी कंपनी और बंदरगाह अधिकारियों के बीच विवाद हुआ था। परिजनों का दावा है कि इसी विवाद के बाद जहाज को जब्त कर लिया गया। परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि जहाज की बिजली आपूर्ति बंद कर दी गई और नाविकों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए।
यदि जहाज से जुड़ा व्यावसायिक या कानूनी विवाद नाविकों की वापसी में बाधा बन रहा है, तो यह महत्वपूर्ण सवाल है कि उसमें काम कर रहे कर्मचारियों की जिम्मेदारी कौन उठा रहा है। नाविक जहाज पर अपनी ड्यूटी निभाने के लिए जाते हैं, लेकिन किसी कंपनी या जहाज के प्रबंधन से जुड़े विवाद के कारण उनकी घर वापसी अनिश्चितकाल तक लंबित रहना गंभीर चिंता का विषय है।
इस मामले में जहाज के मालिकाना हक, जब्ती के कानूनी आधार और पासपोर्ट से संबंधित दावों पर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
सरकार से मदद की गुहार, परिवार को कार्रवाई का इंतजार
विनीत की पत्नी नेहा और उनके ससुर ललित किशोर मिश्रा का कहना है कि वे कई राज्य और केंद्रीय अधिकारियों से संपर्क कर चुके हैं। परिवार के अनुसार, उन्हें आश्वासन तो मिले, लेकिन नाविकों को वापस लाने के लिए ठोस कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली।
परिजनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, राष्ट्रपति कार्यालय और विदेश मंत्रालय तक अपनी बात पहुंचाने का दावा किया है। परिवार ने पाकिस्तान स्थित भारतीय राजनयिक मिशन के सामने भी यह मुद्दा उठाने की बात कही है। अब वे दिल्ली पहुंचकर अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
परिवार की मुख्य मांग है कि छह भारतीय नाविकों की स्थिति की तत्काल जानकारी ली जाए, उनकी सुरक्षा और जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं और कानूनी तथा राजनयिक प्रक्रियाओं के जरिए उनकी सुरक्षित वापसी का रास्ता निकाला जाए।

