पंजाब: में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज होने लगी हैं। चुनाव में अभी वक्त है, लेकिन सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी ने अपनी तैयारियों को धार देना शुरू कर दिया है। पार्टी के भीतर अब सबसे बड़ा सवाल उम्मीदवारों के चयन और टिकटों के बंटवारे को लेकर है। किस मौजूदा विधायक को दोबारा मौका मिलेगा और किस सीट पर नया चेहरा उतारा जाएगा, इस पर नेतृत्व स्तर पर मंथन शुरू हो गया है।
इसी सिलसिले में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की अहम बैठक हुई। इसमें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान समेत शीर्ष नेताओं के शामिल होने की जानकारी सामने आई। बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों, संभावित उम्मीदवारों और चुनाव प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।
किसे मिलेगा टिकट, किसका कटेगा पत्ता?
इस बार पंजाब चुनाव में टिकटों का बंटवारा पार्टी के लिए बेहद अहम रहने वाला है। आम आदमी पार्टी उन नेताओं को प्राथमिकता देने पर विचार कर सकती है जिनका अपने विधानसभा क्षेत्र में मजबूत जनाधार है और जिन्होंने पहले भी चुनाव जीतकर पार्टी को मजबूती दी है।
राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, दो बार विधानसभा चुनाव जीत चुके कुछ विधायकों को लगातार तीसरी बार मौका देने पर विचार किया जा सकता है। वहीं, जिन सीटों पर मौजूदा विधायकों का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं माना जा रहा, वहां नए चेहरों को उतारने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा है।
हालांकि, अभी तक पार्टी ने किसी विधायक का टिकट काटने या किसी नए उम्मीदवार को अंतिम रूप से चुनने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। इसलिए टिकट कटने और नए चेहरों को मौका मिलने से जुड़ी चर्चाओं को फिलहाल संभावनाओं के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
नवंबर में आ सकती है उम्मीदवारों की पहली सूची
AAP की रणनीति इस बार दूसरे राजनीतिक दलों से पहले उम्मीदवारों की घोषणा करने की हो सकती है। इससे पार्टी प्रत्याशियों को अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में प्रचार के लिए पर्याप्त समय मिल सकेगा।
पहली उम्मीदवार सूची नवंबर के पहले सप्ताह में जारी होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अलग-अलग राजनीतिक रिपोर्टों में सूची जारी होने की समय-सीमा को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं। पार्टी की ओर से अभी तक कोई पक्की तारीख घोषित नहीं की गई है।
जल्दी उम्मीदवार घोषित करने का फायदा यह हो सकता है कि प्रत्याशी समय रहते स्थानीय मुद्दों पर काम शुरू कर सकें, कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर सकें और मतदाताओं के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत बना सकें।

117 सीटों पर संगठन मजबूत करने में जुटी पार्टी
पंजाब विधानसभा में कुल 117 सीटें हैं और आम आदमी पार्टी के पास फिलहाल 94 विधायक हैं। पार्टी की कोशिश है कि चुनाव से पहले सभी विधानसभा क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया जाए।
इसके लिए अलग-अलग सीटों पर हलका प्रभारियों की नियुक्ति की जा रही है। इन प्रभारियों के जरिए स्थानीय नेताओं, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से फीडबैक जुटाया जा रहा है। पार्टी यह जानने की कोशिश कर रही है कि किस क्षेत्र में सरकार के कामकाज को लेकर लोगों की क्या राय है और किन मुद्दों पर जनता की नाराजगी या समर्थन दिखाई दे रहा है।
इसके अलावा विधानसभा क्षेत्रों में सेक्टर प्रभारियों की व्यवस्था भी बनाई गई है। इनका काम स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क करना और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन तथा पार्टी के प्रदर्शन से जुड़ी जानकारी वरिष्ठ नेतृत्व तक पहुंचाना है।
महिला मतदाताओं पर भी AAP की नजर
चुनावी रणनीति में महिला मतदाताओं की भूमिका को देखते हुए पार्टी एक नवंबर से विशेष अभियान शुरू करने की तैयारी में है। इसके तहत महिला नेताओं और कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर महिलाओं से संपर्क करने की जिम्मेदारी दी गई है।
पार्टी की योजना है कि सरकारी योजनाओं और खासकर मावां-धीयां सत्कार योजना से जुड़ी जानकारी लोगों तक पहुंचाई जाए। महिला कार्यकर्ताओं के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंच बनाने और महिलाओं के बीच समर्थन मजबूत करने की कोशिश होगी।
यह अभियान चुनाव से पहले पार्टी के जनसंपर्क कार्यक्रम का अहम हिस्सा माना जा रहा है। इसके जरिए AAP महिलाओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहती है।
भगवंत मान भी मैदान में सक्रिय, रैलियों की तैयारी
मुख्यमंत्री भगवंत मान भी पंजाब के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में जाकर लोगों से मुलाकात कर रहे हैं। उनकी लोक मिलनी कार्यक्रमों के जरिए जनता से सीधे संवाद बनाने की कोशिश है।
आने वाले दिनों में पार्टी बड़ी रैलियां और जनसभाएं आयोजित करने की तैयारी भी कर सकती है। इन कार्यक्रमों में दिल्ली और पंजाब के वरिष्ठ नेताओं की भागीदारी रहने की संभावना है। पार्टी की कोशिश है कि चुनावी अभियान शुरू होने से पहले ही हर क्षेत्र में संगठन और कार्यकर्ताओं को सक्रिय कर दिया जाए।
क्या मौजूदा विधायकों के लिए आसान नहीं होगी राह?
AAP के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन का आकलन करना है। पार्टी को यह तय करना होगा कि किन नेताओं को उनके काम और स्थानीय लोकप्रियता के आधार पर दोबारा मौका दिया जाए और किन सीटों पर बदलाव जरूरी है।
ऐसे में टिकट वितरण केवल राजनीतिक समीकरणों तक सीमित नहीं रहेगा। स्थानीय फीडबैक, संगठन की रिपोर्ट, जनता के बीच विधायक की छवि और चुनाव जीतने की संभावना जैसे पहलू भी अहम हो सकते हैं।
फिलहाल पार्टी की ओर से अंतिम उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और संगठनात्मक गतिविधियों से तस्वीर और साफ हो सकती है।

