मणिपुर: में एक बार फिर तनाव की स्थिति गंभीर होती दिखाई दे रही है। कांगपोकपी जिले में लापता हुए दो युवकों के शव मिलने के बाद लोगों में भारी आक्रोश है। घटना के विरोध में प्रदर्शन तेज हो गए हैं और इलाके में झड़पों की खबरें सामने आई हैं। हालात को देखते हुए कुकी समुदाय के संगठन कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (CoTU) ने जिले में जारी बंद को 48 घंटे के लिए और बढ़ा दिया है। सुरक्षा बलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है और प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
दो युवकों की मौत ने पहले से संवेदनशील मणिपुर में तनाव को और बढ़ा दिया है। इस घटना के साथ ही पड़ोसी नॉनी जिले में तीन अन्य लोगों की गोलीबारी में मौत की खबर ने भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
28 अक्टूबर से लापता थे दोनों युवक
मृतकों की पहचान पाओगिनलाल हैंगशिंग और टिंगिनलुन चोंगलोई के रूप में हुई है। दोनों ताफू कुकी गांव के रहने वाले थे। उनकी उम्र को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में 20 और 21 वर्ष का उल्लेख किया गया है। जानकारी के मुताबिक, दोनों युवक 28 अक्टूबर को लापता हो गए थे। बताया गया कि वे हेंगबुंग और ताफू कुकी गांव के बीच यात्रा कर रहे थे, तभी कथित तौर पर उनका अपहरण कर लिया गया।
दोनों के लापता होने के बाद स्थानीय लोगों और संगठनों ने उनकी सुरक्षित रिहाई की मांग शुरू कर दी थी। इसी मामले को लेकर कांगपोकपी जिले में बंद का आह्वान किया गया। सुरक्षा एजेंसियों ने भी उनकी तलाश के लिए अभियान चलाया।
संयुक्त अभियान में मिले दोनों के शव
मणिपुर पुलिस के कंट्रोल रूम के अनुसार, युवकों के लापता होने के बाद कई तलाशी अभियान चलाए गए। 1 नवंबर को मणिपुर पुलिस, कोबरा, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), असम राइफल्स और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की संयुक्त टीम ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 के पूर्वी क्षेत्र में सेनापति-फाइबुंग रोड के आसपास तलाशी अभियान चलाया।
इसी अभियान के दौरान दोनों युवकों के शव बरामद किए गए। शव मिलने की पुष्टि के बाद कांगपोकपी में आक्रोश फैल गया। पुलिस ने कहा कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान तथा गिरफ्तारी के लिए तलाशी अभियान जारी रहेगा।
फिलहाल पुलिस ने सार्वजनिक रूप से आरोपियों की पहचान नहीं की है। हत्या के पीछे की परिस्थितियों और घटना में शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
शव मिलने के बाद प्रदर्शन, सुरक्षा बलों से झड़प
दोनों युवकों के शव मिलने की खबर फैलते ही कांगपोकपी में बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई और आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। स्थिति बिगड़ने पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की खबरें सामने आईं।
भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा कर्मियों ने आंसू गैस के गोले छोड़े। कुछ स्थानों पर पथराव और अवरोध की भी सूचना मिली। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, झड़पों में कम से कम तीन प्रदर्शनकारी घायल हुए। प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर आवाजाही भी प्रभावित हुई।
पुलिस और सुरक्षा बलों ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई है, ताकि हिंसा आगे न फैले और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
CoTU ने 48 घंटे के लिए और बढ़ाया बंद
दोनों युवकों की मौत के बाद कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी ने 2 नवंबर को कांगपोकपी जिले में बंद को एक बार फिर 48 घंटे के लिए बढ़ाने का ऐलान किया। संगठन ने राज्य सरकार पर मामले में ठोस और समयबद्ध कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है।
CoTU ने कहा है कि केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा और युवकों की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई तो समुदाय की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को छूट दी गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, चिकित्सा सेवाएं, शैक्षणिक संस्थान, मीडिया और हवाई अड्डे से जुड़ी यात्रा को छूट की श्रेणी में रखा गया है। हालांकि, सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों और यातायात पर इसका असर पड़ सकता है।

संगठन की पांच मांगों से बढ़ा राजनीतिक दबाव
CoTU ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें दोनों युवकों के अपहरण और हत्या में शामिल लोगों की तत्काल गिरफ्तारी, मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपना और ताफू कुकी गांव को सेनापति पुलिस क्षेत्राधिकार से हटाकर कांगपोकपी के अंतर्गत लाना शामिल है।
संगठन ने सेनापति जिले के ओकलोंग क्षेत्र में NSCN-IM की हुतरोंग ब्रिगेड के शिविर को हटाने और उपमुख्यमंत्री लोसीई दिखो को पद से हटाने की मांग भी की है। ये संगठन की ओर से रखी गई मांगें हैं। इन पर सरकार की ओर से अंतिम निर्णय या कार्रवाई की स्थिति अलग से स्पष्ट होना बाकी है।
नॉनी जिले में तीन लोगों की मौत से भी बढ़ी चिंता
मणिपुर में तनाव केवल कांगपोकपी तक सीमित नहीं है। इससे एक दिन पहले नॉनी जिले के केक्रू नागा गांव में दो अज्ञात सशस्त्र समूहों के बीच गोलीबारी की घटना सामने आई थी। इस घटना में तीन कुकी पुरुषों की मौत हुई। पुलिस ने इस मामले की भी जांच शुरू की है।
दोनों घटनाओं के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, लगातार सामने आ रही हिंसक घटनाओं ने पहाड़ी जिलों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
प्रशासन के सामने शांति बहाल करने की चुनौती
मणिपुर में पहले से जातीय तनाव और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में दो युवकों की हत्या और उसके बाद हुए विरोध-प्रदर्शन ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। सुरक्षा बलों का प्रयास है कि भीड़ को नियंत्रित रखा जाए, राजमार्गों पर आवाजाही बहाल हो और किसी भी नई हिंसक घटना को रोका जा सके।
फिलहाल दोनों युवकों की हत्या के आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी जांच का अहम हिस्सा है। कांगपोकपी में बंद जारी रहने के बीच लोगों की नजर सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन संगठन की मांगों पर क्या कदम उठाता है और इलाके में सामान्य स्थिति कब तक बहाल हो पाती है।

