देश: में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। लगातार आठ दिनों में तीसरी बार ईंधन के दाम बढ़ने के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार “किस्तों में जनता की कमाई लूट रही है” और आम लोगों की जेब पर लगातार बोझ बढ़ाया जा रहा है।
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए खरगे ने कहा कि देश नेतृत्व संकट से गुजर रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब दुनिया के कई देश अपने नागरिकों को ईंधन पर राहत दे रहे हैं, तब भारत में भाजपा सरकार लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा रही है।
लगातार तीसरी बार बढ़े ईंधन के दाम
देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हाल के दिनों में लगातार बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली समेत कई शहरों में पेट्रोल की कीमत 100 रुपये प्रति लीटर के करीब पहुंच चुकी है, जबकि कुछ राज्यों में यह आंकड़ा पहले ही पार कर चुका है।
तेल कंपनियों ने हाल ही में:
- पेट्रोल के दाम में 87 पैसे प्रति लीटर तक बढ़ोतरी
- डीजल के दाम में 91 पैसे प्रति लीटर तक इजाफा
किया है। यह पिछले आठ दिनों में तीसरी बढ़ोतरी है, जिससे आम लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
खरगे ने केंद्र सरकार पर क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सरकार जनता की मेहनत की कमाई को “किस्तों में लूट” रही है। उन्होंने दावा किया कि केंद्र सरकार पेट्रोल और डीजल पर रोजाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का टैक्स वसूल रही है।
खरगे ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम थीं, तब सरकार ने उसका फायदा जनता तक नहीं पहुंचाया। इसके बजाय टैक्स बढ़ाकर आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया गया।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा:
“जब पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे हालात बने हुए हैं और दुनिया के कई देश अपने नागरिकों को राहत दे रहे हैं, तब भारत में भाजपा सरकार लगातार पेट्रोल-डीजल महंगा कर रही है।”

अंतरराष्ट्रीय हालात का असर
विशेषज्ञों के मुताबिक मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर भारत पर भी पड़ रहा है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में हलचल का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर दिखाई देता है।
हालांकि विपक्ष का आरोप है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय हालात का बहाना बनाकर टैक्स वसूली जारी रखे हुए है।
आम जनता पर क्या असर पड़ेगा?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का सबसे बड़ा असर आम आदमी की जेब पर पड़ता है। निजी वाहन चलाने वालों का मासिक खर्च बढ़ जाता है। वहीं डीजल महंगा होने से:
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ता है
- फल-सब्जियों की कीमतें बढ़ती हैं
- दूध और जरूरी सामान महंगे होते हैं
- महंगाई का दबाव बढ़ता है
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी जारी रही, तो इसका असर पूरे बाजार पर दिखाई देगा।
भाजपा सरकार की क्या दलील?
सरकार और तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव हो रहा है। इसके अलावा पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने की आशंका है।
सरकार का यह भी कहना है कि टैक्स से मिलने वाली राशि का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास योजनाओं में किया जाता है।
विपक्ष ने तेज किया हमला
ईंधन कीमतों को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल लगातार सरकार को घेर रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि:
- महंगाई चरम पर है
- बेरोजगारी बढ़ रही है
- आम आदमी की आय नहीं बढ़ रही
- लेकिन सरकार टैक्स बढ़ाकर राहत देने के बजाय बोझ बढ़ा रही है
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईंधन कीमतों का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा विषय बन सकता है।
लगातार बढ़ती पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे लेकर केंद्र सरकार पर बड़ा हमला बोला है और जनता की कमाई “किस्तों में लूटने” का आरोप लगाया है। अंतरराष्ट्रीय हालात और घरेलू टैक्स नीति के बीच अब यह मुद्दा सियासी बहस का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है।