नई दिल्ली। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि वह स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र के समर्थन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। फिलीपींस की राजधानी मनीला में आयोजित क्वाड (QUAD) देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री सहयोग और आसियान (ASEAN) की केंद्रीय भूमिका को भारत की विदेश नीति का महत्वपूर्ण आधार बताया।
इस बैठक में भारत के अलावा अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्रियों ने भाग लिया। चारों देशों ने साझा बयान जारी कर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता, आर्थिक सहयोग और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मनीला में हुई अहम रणनीतिक बैठक
क्वाड विदेश मंत्रियों की यह बैठक ऐसे समय हुई है जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और भू-राजनीतिक गतिविधियां लगातार चर्चा में हैं। बैठक में क्षेत्रीय हालात की समीक्षा की गई और नई दिल्ली में हुई पिछली बैठक के निर्णयों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि भारत का उद्देश्य एक ऐसा हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना है, जहां सभी देशों की संप्रभुता, अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री स्वतंत्रता का सम्मान हो।
जयशंकर ने क्या कहा?
बैठक के बाद सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए जयशंकर ने कहा कि मनीला में हुई क्वाड बैठक सकारात्मक और रचनात्मक रही।
उन्होंने कहा कि चारों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की और हाल के घटनाक्रमों पर विस्तार से चर्चा की। साथ ही उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के साथ-साथ आसियान की केंद्रीय भूमिका को पूरी मजबूती से समर्थन देता है।
आसियान की भूमिका पर विशेष जोर
बैठक में दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के संगठन आसियान (ASEAN) की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताया गया। संयुक्त बयान में कहा गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता और विकास के लिए आसियान की एकता और नेतृत्व आवश्यक है।
चारों देशों ने यह भी कहा कि वे आसियान के सदस्य देशों के साथ सहयोग को और अधिक मजबूत करेंगे ताकि क्षेत्रीय विकास, व्यापार और सुरक्षा को नई गति मिल सके।

किन मुद्दों पर हुई चर्चा?
बैठक में कई अहम वैश्विक और क्षेत्रीय विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल रहे—
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा
- समुद्री कानून और नौवहन की स्वतंत्रता
- आर्थिक सहयोग
- महत्वपूर्ण एवं उभरती प्रौद्योगिकियां
- साइबर सुरक्षा
- मानवीय सहायता एवं आपदा राहत
- आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत बनाना
- क्षेत्रीय साझेदारी का विस्तार
चारों देशों ने इन क्षेत्रों में आपसी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
संयुक्त बयान में क्या कहा गया?
बैठक के बाद जारी संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि क्वाड देश नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए एकजुट हैं।
बयान में कहा गया कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति और स्थिरता केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास और सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।
साथ ही समुद्री क्षेत्र में कानून के शासन, मुक्त व्यापार और सभी देशों की संप्रभुता का सम्मान करने पर भी बल दिया गया।
भारत की विदेश नीति को मिलेगा मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि क्वाड मंच पर भारत की सक्रिय भूमिका उसकी वैश्विक कूटनीतिक स्थिति को और मजबूत कर रही है।
भारत लगातार यह संदेश देता रहा है कि वह किसी टकराव की राजनीति का समर्थक नहीं है, बल्कि सहयोग, संतुलन और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में विश्वास रखता है। ऐसे में मनीला की यह बैठक भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मनीला में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के समर्थन में मजबूती से खड़ा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आसियान की केंद्रीय भूमिका को रेखांकित करते हुए क्षेत्रीय सहयोग, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को भविष्य की प्राथमिकता बताया। आने वाले समय में क्वाड देशों के बीच बढ़ता सहयोग हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

