नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर जारी छात्र आंदोलन के बीच बुधवार को घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर संकेत दिया कि यदि सरकार छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई न करने का भरोसा देती है तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में चल रहा प्रदर्शन 33वें दिन में प्रवेश कर चुका है। तेज बारिश के बावजूद हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर डटे रहे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित विभिन्न मांगों को लेकर नारेबाजी करते रहे।
सरकार को लिखी चिट्ठी में क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने अपने पत्र में कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं के खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से भरोसा देने की अपील करते हुए कहा कि यदि ऐसा आश्वासन मिलता है तो वे अपना अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल समाप्त करने को तैयार हैं।
हालांकि अभी तक केंद्र सरकार की ओर से इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
हाईकोर्ट का बड़ा निर्देश
इसी बीच दिल्ली हाईकोर्ट में प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों से मारपीट को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई हुई। अदालत ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि घटना से जुड़े सभी CCTV फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखे जाएं, ताकि जांच या आगे की न्यायिक प्रक्रिया में उनका उपयोग किया जा सके।
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि याचिका प्रचार पाने के उद्देश्य से दायर की गई है। इस पर हाईकोर्ट ने सवाल उठाते हुए पूछा कि बिना पर्याप्त आधार के किसी याचिका को केवल प्रचार का माध्यम कैसे कहा जा सकता है।

CJP ने सरकार की बातचीत की पेशकश ठुकराई
उधर CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने दावा किया कि सरकार की ओर से बातचीत का प्रस्ताव मिला था, लेकिन संगठन ने इसे वर्तमान स्वरूप में स्वीकार नहीं किया।
उन्होंने कहा कि आंदोलनकारी किसी मंत्री के आवास या सरकारी कार्यालय में बातचीत के लिए नहीं जाएंगे। यदि सरकार संवाद चाहती है तो वह जंतर-मंतर या उसके आसपास किसी तटस्थ स्थान पर आकर बातचीत करे।
अभिजीत दीपके ने की वांगचुक से अपील
सीजेपी से जुड़े अभिजीत दीपके ने भी सार्वजनिक रूप से सोनम वांगचुक से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए अनशन समाप्त करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को वांगचुक जैसे लोगों की जरूरत है और आंदोलन उनके अनशन समाप्त करने के बाद भी शांतिपूर्ण ढंग से जारी रहेगा।
दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई गई
आंदोलन को देखते हुए राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। सुरक्षा कारणों से कई मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से प्रभावित किया गया तथा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान एक RAF जवान पर कथित हमले और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज करने की भी जानकारी दी है। दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहा और पुलिस ने बल प्रयोग किया।
मंच पर दिखी प्रतीकात्मक झलक
जंतर-मंतर स्थित आंदोलन स्थल पर संविधान की प्रति, चरखा, विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और महापुरुषों की तस्वीरें रखी गईं। आयोजकों का कहना है कि इसका उद्देश्य आंदोलन को लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और सर्वधर्म समभाव के संदेश से जोड़ना है।
तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र, युवा और समर्थक पूरे दिन प्रदर्शन स्थल पर मौजूद रहे। कई सामाजिक संगठनों ने प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था भी की।
आगे क्या?
अब सभी की निगाहें दो अहम घटनाक्रमों पर टिकी हैं—पहला, क्या केंद्र सरकार सोनम वांगचुक के पत्र पर कोई औपचारिक जवाब देती है और दूसरा, क्या सरकार एवं आंदोलनकारियों के बीच वार्ता का कोई रास्ता निकल पाता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई और जांच प्रक्रिया भी इस पूरे आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
सोनम वांगचुक द्वारा सरकार को लिखे गए पत्र ने लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच संवाद की संभावना जरूर पैदा की है, लेकिन आंदोलनकारी संगठनों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय होने तक विरोध जारी रहेगा। वहीं हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद पुलिस कार्रवाई से जुड़े साक्ष्यों के सुरक्षित रहने से मामले की निष्पक्ष जांच की उम्मीद भी बढ़ी है।

