फिल्म अभिनेता: Vivek Oberoi एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार मामला धार्मिक नगरी Vrindavan से जुड़ा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक पुराने वीडियो को लेकर अभिनेता पर वृंदावन को बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया गया है।
विवाद तब शुरू हुआ जब अभिनेता का एक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में विवेक ओबराय कथित तौर पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि करीब 20 साल पहले जब वे वृंदावन आए थे, तब उन्हें यहां छोटी बच्चियों के शोषण से जुड़ी बातें पता चली थीं।
इस बयान के सामने आते ही वृंदावन के कई सामाजिक और धार्मिक संगठनों में नाराजगी फैल गई। समाजसेवी कपिलदेव उपाध्याय ने अभिनेता के बयान को “धार्मिक नगरी को बदनाम करने की कोशिश” बताया है।
“अगर ऐसा देखा था तो कार्रवाई क्यों नहीं की?”
समाजसेवी कपिलदेव उपाध्याय ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि अगर अभिनेता ने वास्तव में ऐसी कोई घटना देखी थी तो उन्होंने उस समय पुलिस या प्रशासन को सूचना क्यों नहीं दी।
उन्होंने कहा कि वृंदावन करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और बिना प्रमाण के ऐसे आरोप शहर की छवि खराब करने वाले हैं।
कपिलदेव ने कहा—
“अगर कोई इतनी गंभीर बात जानता था तो तुरंत शिकायत करनी चाहिए थी। अब 20 साल बाद अचानक यह मुद्दा उठाना समझ से परे है। इससे ऐसा लगता है कि जानबूझकर वृंदावन की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है।”
एनजीओ को हाईलाइट करने का आरोप
समाजसेवी ने यह भी आरोप लगाया कि अभिनेता अपनी सामाजिक संस्था और गतिविधियों को चर्चा में लाने के लिए ऐसे संवेदनशील विषयों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि पहले भी कई चर्चित हस्तियां वृंदावन के बारे में भ्रामक बयान देकर विवाद खड़ा करती रही हैं।
हालांकि, अभी तक विवेक ओबराय की ओर से इस पूरे विवाद पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

सोशल मीडिया पर बंटे लोग
विवाद सामने आने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया है। कुछ लोग अभिनेता के बयान का समर्थन करते हुए कह रहे हैं कि अगर कहीं गलत हो रहा है तो उस पर खुलकर बात होनी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ बड़ी संख्या में लोग इसे वृंदावन की छवि खराब करने की कोशिश बता रहे हैं।
कई यूजर्स ने सवाल किया कि इतने साल बाद इस तरह की बात सार्वजनिक करने के पीछे आखिर मकसद क्या है।
वृंदावन की धार्मिक पहचान पर बहस
Vrindavan देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर में भगवान श्रीकृष्ण की नगरी के रूप में प्रसिद्ध है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन और भक्ति के लिए पहुंचते हैं।
ऐसे में किसी भी विवादित बयान का असर सीधे शहर की छवि और पर्यटन पर पड़ सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया के दौर में बिना तथ्यों के फैलने वाली बातें धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करती हैं।
पहले भी हो चुके हैं विवाद
यह पहली बार नहीं है जब किसी सेलिब्रिटी के बयान को लेकर वृंदावन में विवाद हुआ हो। इससे पहले भी कई फिल्मी और सोशल मीडिया हस्तियों पर धार्मिक नगरी को गलत तरीके से पेश करने के आरोप लग चुके हैं।
हालांकि, कई सामाजिक कार्यकर्ता यह भी मानते हैं कि अगर कहीं शोषण या अपराध जैसी घटनाएं होती हैं तो उन्हें दबाने के बजाय सामने लाना जरूरी है।
क्या बोले स्थानीय लोग?
स्थानीय व्यापारियों और संत समाज के लोगों ने कहा कि वृंदावन की पहचान भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिकता से है। कुछ isolated घटनाओं के आधार पर पूरे शहर को कटघरे में खड़ा करना गलत है।
उनका कहना है कि अगर किसी के पास ठोस जानकारी है तो उसे कानूनी एजेंसियों के पास जाना चाहिए, न कि वर्षों बाद सोशल मीडिया पर बयान देकर विवाद पैदा करना चाहिए।
विवाद के पीछे क्या है असली सवाल?
यह मामला अब सिर्फ एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रह गया है। यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या सेलिब्रिटी अपने पुराने अनुभवों को सार्वजनिक करते समय सामाजिक और धार्मिक प्रभावों का पर्याप्त ध्यान रखते हैं?
वहीं दूसरी ओर, यह बहस भी तेज हो गई है कि गंभीर सामाजिक मुद्दों पर बोलना जरूरी है या नहीं।
विवेक ओबराय के वायरल बयान ने वृंदावन में नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर समाजसेवी और स्थानीय लोग इसे धार्मिक नगरी को बदनाम करने की कोशिश बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे सामाजिक मुद्दों पर खुलकर बोलने की जरूरत मान रहे हैं। अब सभी की नजर अभिनेता की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी है।