उत्तर प्रदेश: में चल रही जनगणना के दौरान कई ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं, जिन्होंने प्रगणकों को भी हैरान कर दिया है। मुरादाबाद समेत कई जिलों में लोग अपने घरों, संपत्तियों और सुविधाओं की जानकारी देने से बच रहे हैं। स्थिति यह है कि तीन मंजिला मकानों में रहने वाले परिवार यह दावा कर रहे हैं कि उनके पास टीवी, बाइक या यहां तक कि साइकिल तक नहीं है।
जनगणना में लगे प्रगणकों का कहना है कि लोगों का रवैया सहयोगात्मक नहीं है। कई घरों में दरवाजा तक नहीं खोला जा रहा, जबकि कुछ लोग सवाल पूछे जाने पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
22 मई से शुरू हुई गणना प्रक्रिया
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जिले में 22 मई से घरों की गणना शुरू हुई है, जो 22 जून तक चलेगी। इस कार्य के लिए करीब सात हजार प्रगणक लगाए गए हैं। प्रत्येक प्रगणक को 120 से 180 घरों का सर्वे कर उनका पूरा विवरण दर्ज करना है।
इस प्रक्रिया के दौरान प्रगणक लोगों से 33 अलग-अलग बिंदुओं पर सवाल पूछ रहे हैं। इन सवालों में मकान की स्थिति, घर में मौजूद सुविधाएं, वाहन, डिजिटल उपकरण और परिवार के सदस्यों से जुड़ी जानकारी शामिल है।
लेकिन सबसे बड़ी चुनौती लोगों से सही जानकारी लेना बन गई है।
तीन मंजिला मकान… लेकिन TV नहीं!
मुरादाबाद के नवाबपुरा इलाके का एक मामला सबसे ज्यादा चर्चा में है। यहां एक तीन मंजिला मकान में तीन भाइयों का परिवार रहता है और मकान में छह दुकानें भी हैं। बावजूद इसके परिवार ने दावा किया कि उनके पास न टीवी है, न बाइक और न ही साइकिल।
प्रगणकों का कहना है कि इस तरह के कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां लोग अपनी वास्तविक संपत्ति और सुविधाओं को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।
कुछ मोहल्लों में तो करीब 90 प्रतिशत घरों में टीवी और इंटरनेट सेवा न होने की जानकारी दी गई है, जिसने अधिकारियों को भी चौंका दिया है।

लोग पूछ रहे अजीब सवाल
प्रगणकों के मुताबिक कई लोग सवाल पूछे जाने पर उल्टे सवाल करने लगते हैं। कुछ लोग कहते हैं — “हम क्यों बताएं?”, “इससे हमें क्या मिलेगा?”, “किचन दो हैं तो क्या सरकार कुछ देगी?”
कई लोग अपने मकान, कमरों की संख्या, एलपीजी कनेक्शन, वाहन और मोबाइल नंबर तक साझा करने से बच रहे हैं।
प्रगणकों का कहना है कि लोगों में यह डर भी देखने को मिल रहा है कि कहीं यह जानकारी टैक्स या किसी अन्य सरकारी कार्रवाई के लिए इस्तेमाल न हो जाए।
किन-किन बातों की ली जा रही जानकारी?
जनगणना के दौरान प्रगणक मकान, परिवार और सुविधाओं से जुड़े कई सवाल पूछते हैं।
मकान से जुड़े सवाल
- मकान नंबर
- दीवार, छत और फर्श किस सामग्री से बने हैं
- मकान की स्थिति कैसी है
- मकान का उपयोग किस काम में होता है
परिवार से जुड़े सवाल
- घर में रहने वाले लोगों की संख्या
- परिवार के मुखिया का नाम
- मकान अपना है या किराये का
- कितने कमरे हैं
- कितने शादीशुदा जोड़े रहते हैं
सुविधा से जुड़े सवाल
- पानी की व्यवस्था
- शौचालय और रसोई की सुविधा
- बिजली और रोशनी का साधन
- एलपीजी या पीएनजी कनेक्शन
डिजिटल और वाहन संबंधी सवाल
- टीवी, रेडियो, इंटरनेट
- मोबाइल, लैपटॉप, कंप्यूटर
- साइकिल, बाइक, कार या अन्य वाहन
क्यों जरूरी है सही जानकारी?
विशेषज्ञों के अनुसार जनगणना केवल आबादी गिनने का काम नहीं है, बल्कि इससे सरकार को लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति समझने में मदद मिलती है।
इसी डेटा के आधार पर भविष्य की सरकारी योजनाएं, शहरी विकास, सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा से जुड़ी नीतियां तैयार की जाती हैं।
अगर लोग गलत जानकारी देंगे, तो योजनाओं की वास्तविक जरूरतों का सही अनुमान लगाना मुश्किल हो जाएगा।
प्रगणकों के सामने बड़ी चुनौती
प्रगणकों का कहना है कि उन्हें कई जगहों पर घंटों इंतजार करना पड़ता है। कुछ लोग बार-बार आने को कहते हैं, जबकि कई लोग सीधे जानकारी देने से मना कर देते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि लोगों को यह समझाने की जरूरत है कि जनगणना की जानकारी गोपनीय रखी जाती है और इसका उद्देश्य केवल सरकारी आंकड़े तैयार करना होता है।
प्रशासन ने की अपील
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे जनगणना में सहयोग करें और सही जानकारी दें। अधिकारियों का कहना है कि यह देश के विकास और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के लिए बेहद जरूरी प्रक्रिया है।
उत्तर प्रदेश में चल रही जनगणना ने समाज की एक अलग तस्वीर सामने रख दी है। जहां एक ओर लोग आधुनिक सुविधाओं का उपयोग कर रहे हैं, वहीं सरकारी सर्वे में उन्हें छिपाने की कोशिश भी कर रहे हैं। अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों का भरोसा जीतकर सही जानकारी जुटाने की है, ताकि भविष्य की योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुसार बनाई जा सकें।