सगे दादा और चचेरे भाई ने नाबालिग को बनाया हवस का शिकार।

महाराष्ट्र: के बीड जिले से एक ऐसी दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक रिश्तों को पूरी तरह से तार-तार कर दिया है। जिस घर को एक बेटी के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित कोना माना जाता है, उसी चारदीवारी के भीतर एक 15 साल की मासूम को अपनों की ही हैवानियत का शिकार होना पड़ा। आरोप किसी बाहरी पर नहीं, बल्कि पीड़िता के सगे दादा और चचेरे भाई पर लगे हैं। इस खौफनाक वारदात ने पूरे बीड जिले को झकझोर कर रख दिया है। फिलहाल, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।

खेत से लेकर घर तक… मासूम पर ढहाया गया जुल्म

पीड़िता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के मुताबिक, यह घिनौना खेल लंबे समय से चल रहा था। चचेरा भाई उसे अक्सर उस वक्त निशाना बनाता था जब वह खेत में बकरियां चराने जाती थी। वह मासूम को अकेला पाकर उसके साथ जबरदस्ती करता था। हद तो तब हो गई जब घर के सबसे बुजुर्ग सदस्य, यानी सगे दादा ने भी पोती की मजबूरी का फायदा उठाया। जब भी लड़की घर में अकेली होती, दादा उसके साथ दरिंदगी करता था।

शिकायत में एक बेहद खौफनाक वाकये का जिक्र करते हुए बताया गया कि एक बार चचेरे भाई ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। उसने पीड़िता के हाथ बांध दिए और उसके मुंह में रुमाल ठूंस दिया ताकि उसकी चीखें बाहर न जा सकें। इसके बाद उसके साथ हैवानियत की गई।

धमकी का खौफ और डॉक्टर के सामने खुला राज

आरोपियों ने मासूम को इस कदर डरा-धमका रखा था कि वह किसी से कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रही थी। आरोपियों ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी, जिसके चलते वह लंबे समय तक इस दर्द, मानसिक प्रताड़ना और घुटने वाले माहौल को चुपचाप सहती रही। लेकिन पाप का घड़ा एक दिन भरता ही है।

लगातार हो रहे शारीरिक शोषण के कारण जब मासूम के शरीर की तकलीफ असहनीय हो गई, तो उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया। वहां, डॉक्टर के सामने पीड़िता का बांध टूट गया। उसने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। डॉक्टर भी मासूम की दास्तां सुनकर हैरान रह गए, जिसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई और इस पूरे मामले का भंडाफोड़ हुआ।

थाने में कटी रात, सुबह 5 बजे दर्ज हुई FIR

इस खौफनाक खुलासे के बाद पीड़िता का परिवार न्याय की गुहार लगाने के लिए स्थानीय पुलिस स्टेशन पहुंचा। न्याय की आस में पीड़ित परिवार को पूरी रात थाने में ही बितानी पड़ी। गहन पूछताछ और कागजी कार्रवाई के बाद, अगली सुबह करीब 5 बजे पुलिस ने आधिकारिक तौर पर एफआईआर (FIR) दर्ज की। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों (सगे दादा और चचेरे भाई) को गिरफ्तार कर लिया है।

स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही: 10 घंटे तक तड़पती रही पीड़िता

एक तरफ जहां पुलिस कार्रवाई में जुटी थी, वहीं दूसरी तरफ सिस्टम की संवेदनहीनता ने पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़िता को मेडिकल जांच के लिए सुबह करीब 11 बजे सब-डिस्ट्रिक्ट अस्पताल ले जाया गया।

हैरानी की बात यह है कि अस्पताल पहुंचने पर परिवार को बताया गया कि वहां कोई महिला स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) मौजूद नहीं है। इसके बाद पीड़िता और उसका परिवार सुबह 11 बजे से लेकर रात के 9 बजे तक (लगभग 10 घंटे) अस्पताल के चक्कर काटता रहा, लेकिन कोई जिम्मेदार डॉक्टर नहीं मिला। स्वास्थ्य विभाग की इस घोर लापरवाही को देखकर स्थानीय लोगों और पीड़िता के परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया।

बीड की यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि हमारे सामाजिक ताने-बाने और नैतिक पतन को भी उजागर करती है। जब घर के बुजुर्ग और भाई ही भक्षक बन जाएं, तो बेटियां कहां सुरक्षित रहेंगी? इसके साथ ही, मेडिकल जांच में हुई 10 घंटे की देरी यह दर्शाती है कि संवेदनशील मामलों में भी हमारा प्रशासनिक ढांचा कितना सुस्त है। जरूरत इस बात की है कि आरोपियों को फास्ट-ट्रैक कोर्ट के जरिए सख्त से सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई ऐसी हैवानियत करने की जुर्रत न कर सके।

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