खरगे के घर में रातभर चला सत्ता का मंथन! कौन बनेगा मंत्री, किसे मिलेगा झटका? कर्नाटक कैबिनेट पर टिकीं सबकी नजरें

नई दिल्ली/बेंगलुरु। कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन से पहले दिल्ली राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बन गई है। मुख्यमंत्री-नामित डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण से ठीक पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर लगातार बैठकों का दौर जारी है। इन बैठकों में नई कैबिनेट की संरचना, मंत्री पदों का बंटवारा, उपमुख्यमंत्री पद और संगठनात्मक संतुलन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले कुछ घंटे कर्नाटक की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं। कांग्रेस नेतृत्व ऐसी कैबिनेट तैयार करना चाहता है जो क्षेत्रीय, जातीय और राजनीतिक संतुलन को साधते हुए आने वाले चुनावों की नींव भी मजबूत करे।

खरगे के घर पर जुटे कांग्रेस के दिग्गज

दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई बैठक में मुख्यमंत्री-नामित डीके शिवकुमार, कार्यवाहक मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, राहुल गांधी और कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए।

सूत्रों के अनुसार बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकार गठन के साथ किसी प्रकार की नाराजगी या असंतोष सामने न आए। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि सत्ता हस्तांतरण का संदेश एकजुटता और स्थिरता के साथ जनता तक पहुंचे।

मंत्री पदों के लिए दिल्ली में तेज हुई लॉबिंग

नई सरकार के गठन से पहले मंत्री पदों को लेकर दावेदारों की संख्या लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। कई विधायक और वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंचकर अपनी दावेदारी मजबूत करने में जुटे हुए हैं।

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस नेतृत्व पहले चरण में सीमित संख्या में मंत्रियों को शपथ दिला सकता है। इसके बाद परिषद और राज्यसभा चुनावों के पश्चात दूसरे चरण में मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है।

इसी संभावना को देखते हुए कई नेता अपने राजनीतिक अनुभव, सामाजिक समीकरण और संगठनात्मक योगदान को आधार बनाकर हाईकमान के सामने अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं।

सिद्धारमैया की ‘ब्रेकफास्ट पॉलिटिक्स’ चर्चा में

दिल्ली में चल रही राजनीतिक हलचल के बीच सिद्धारमैया की एक तस्वीर भी चर्चा का विषय बन गई। शपथ ग्रहण से पहले वह दिल्ली के प्रसिद्ध सरवणा भवन रेस्तरां पहुंचे, जहां उन्होंने कई विधायकों और नेताओं के साथ नाश्ता किया।

इस दौरान सतीश जारकीहोली, एमसी सुधाकर समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की अनौपचारिक मुलाकातें अक्सर राजनीतिक संदेश देने और समर्थन जुटाने का माध्यम बनती हैं।

यही कारण है कि इस ‘ब्रेकफास्ट मीटिंग’ को भी सत्ता संतुलन के नजरिए से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कौन-कौन है मंत्री पद की दौड़ में?

कांग्रेस विधायक अजय सिंह ने खुलकर दावा किया है कि उन्हें इस बार मंत्रिमंडल में जगह मिलने की उम्मीद है। उनका कहना है कि पार्टी अनुभवी नेताओं और नए चेहरों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में काम कर रही है।

वहीं विधायक एआर कृष्णमूर्ति ने भी संकेत दिए हैं कि अंतिम निर्णय राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान की मंजूरी के बाद ही लिया जाएगा।

दूसरी ओर वरिष्ठ नेता केजे जॉर्ज ने भरोसा जताया है कि मंत्रिमंडल को लेकर अंतिम फैसला जल्द हो जाएगा। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व जो भी निर्णय करेगा, वह सभी को स्वीकार होगा।

प्रियंक खरगे और यतींद्र की भूमिका पर नजर

दिल्ली में प्रियंक खरगे की सक्रियता भी राजनीतिक चर्चाओं का विषय बनी हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से उनकी मुलाकात के बाद कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।

इसी बीच सिद्धारमैया के पुत्र यतींद्र सिद्धारमैया का बयान भी चर्चा में है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी ने उन्हें पहले ही मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने का आश्वासन दिया था।

इससे संकेत मिल रहे हैं कि नई सरकार में युवा नेताओं और प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों के प्रतिनिधियों को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है।

क्या कुछ मौजूदा मंत्री होंगे बाहर?

कांग्रेस के भीतर यह चर्चा भी तेज है कि कुछ मौजूदा मंत्रियों को इस बार मंत्रिमंडल से बाहर रखा जा सकता है। पार्टी नेतृत्व नए चेहरों को अवसर देकर सरकार की छवि को और मजबूत करना चाहता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कांग्रेस केवल वर्तमान सरकार नहीं बना रही, बल्कि 2028 के विधानसभा चुनावों की रणनीतिक तैयारी भी कर रही है। ऐसे में मंत्रिमंडल गठन को भविष्य की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

3 जून को शपथ लेंगे डीके शिवकुमार

मुख्यमंत्री-नामित डीके शिवकुमार 3 जून को बेंगलुरु के लोक भवन में शाम 4 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले कांग्रेस हाईकमान सभी महत्वपूर्ण राजनीतिक समीकरणों को अंतिम रूप देने में जुटा हुआ है।

पार्टी का प्रयास है कि सरकार गठन के समय किसी भी प्रकार का असंतोष सार्वजनिक रूप से सामने न आए और सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो।

कर्नाटक में नई कांग्रेस सरकार के गठन से पहले दिल्ली में राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर चल रही बैठकों से यह तय होगा कि नई सरकार में किसे मंत्री पद मिलेगा, कौन उपमुख्यमंत्री बनेगा और किन नेताओं को इंतजार करना पड़ेगा। डीके शिवकुमार के शपथ ग्रहण से पहले कांग्रेस नेतृत्व हर समीकरण को साधने की कोशिश में जुटा है। आने वाले घंटों में कर्नाटक की नई सत्ता संरचना की तस्वीर पूरी तरह साफ हो सकती है।

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