नई दिल्ली। डिजिटल दौर में साइबर अपराध लगातार नए रूप ले रहे हैं। खासतौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल ने ऑनलाइन ठगी के तरीकों को और अधिक खतरनाक बना दिया है। अब ठग AI तकनीक के जरिए किसी भी व्यक्ति की आवाज की हूबहू नकल तैयार कर रहे हैं और उसी आवाज में फोन कर लोगों से पैसे, बैंक डिटेल्स या अन्य संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
इसी चुनौती से निपटने के लिए Google ने एक नया AI-बेस्ड “फेक कॉल डिटेक्शन” फीचर पेश किया है। यह फीचर विशेष रूप से उन स्कैम कॉल्स को पहचानने के लिए तैयार किया गया है, जिनमें कॉलर किसी परिचित व्यक्ति की आवाज या पहचान का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी करने की कोशिश करता है।
AI वॉयस क्लोनिंग से बढ़ा खतरा
पिछले कुछ वर्षों में AI वॉयस क्लोनिंग तकनीक काफी एडवांस हो चुकी है। कुछ सेकंड की ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर किसी व्यक्ति की आवाज की लगभग सटीक कॉपी तैयार की जा सकती है।
साइबर अपराधी इसी तकनीक का फायदा उठाकर लोगों को फोन करते हैं और खुद को परिवार का सदस्य, दोस्त या परिचित बताकर पैसे ट्रांसफर करने की मांग करते हैं। कई मामलों में लोग भावनात्मक दबाव में आकर ठगी का शिकार भी हो चुके हैं।
Google का नया फीचर ऐसे ही फ्रॉड को रोकने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
कैसे काम करेगा नया फेक कॉल डिटेक्शन फीचर?
Google के अनुसार, जब कोई व्यक्ति कॉल करेगा तो उसका Pixel स्मार्टफोन रिसीवर के Pixel फोन पर एक विशेष और साइलेंट वेरिफिकेशन सिग्नल भेजेगा। यह सिग्नल यह पुष्टि करेगा कि कॉल वास्तव में उसी व्यक्ति के डिवाइस से की जा रही है, जिसका नंबर स्क्रीन पर दिखाई दे रहा है।
यदि कोई स्कैमर किसी परिचित व्यक्ति का नंबर स्पूफ करके कॉल करता है, तो उसके पास यह वेरिफिकेशन सिग्नल मौजूद नहीं होगा। ऐसी स्थिति में रिसीवर का फोन स्वतः जांच करेगा कि संबंधित डिवाइस से वास्तव में कॉल की जा रही है या नहीं।
यदि जांच में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो यूजर की स्क्रीन पर तुरंत चेतावनी संदेश दिखाई देगा और उसे सावधान रहने या कॉल समाप्त करने की सलाह दी जाएगी।

कॉल रिसीव करने के बाद भी जारी रहेगी जांच
Google ने बताया कि यह सुरक्षा प्रक्रिया केवल कॉल आने तक सीमित नहीं रहेगी। कॉल रिसीव होने के बाद भी बैकग्राउंड में सिस्टम लगातार वेरिफिकेशन करता रहेगा।
अगर बातचीत के दौरान यह पता चलता है कि कॉल स्पूफ की गई है या उसमें किसी तरह की धोखाधड़ी की आशंका है, तो फोन तुरंत अलर्ट जारी करेगा। इससे यूजर समय रहते सतर्क हो सकेगा और किसी बड़े नुकसान से बच जाएगा।
फिलहाल Pixel यूजर्स को मिलेगा फायदा
Google ने इस फीचर को फिलहाल केवल Pixel स्मार्टफोन यूजर्स के लिए जारी किया है। इसका लाभ उठाने के लिए दोनों पक्षों के पास Pixel डिवाइस होना आवश्यक है।
साथ ही फोन में Android 12 या उससे नया ऑपरेटिंग सिस्टम होना चाहिए। कंपनी ने इसे डिफॉल्ट रूप से एक्टिव रखा है, इसलिए अधिकांश यूजर्स को अलग से कोई सेटिंग बदलने की जरूरत नहीं होगी।
हालांकि जो लोग इस फीचर का उपयोग नहीं करना चाहते, वे इसे सेटिंग्स में जाकर बंद भी कर सकते हैं।
प्राइवेसी को लेकर Google का दावा
AI और डेटा सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच Google ने स्पष्ट किया है कि यह पूरी प्रक्रिया एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के तहत होगी।
कंपनी का कहना है कि वेरिफिकेशन के दौरान कोई निजी बातचीत रिकॉर्ड या स्टोर नहीं की जाएगी। उपयोगकर्ता की गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।
यूजर्स को क्या होंगे फायदे?
Google के नए फेक कॉल डिटेक्शन फीचर के कई बड़े फायदे हैं:
- AI द्वारा तैयार नकली आवाज की पहचान करने में मदद।
- कॉलर ID स्पूफिंग फ्रॉड से सुरक्षा।
- परिवार और दोस्तों के बीच सुरक्षित संवाद।
- रियल टाइम अलर्ट और चेतावनी।
- बिना किसी अतिरिक्त ऐप या सेटअप के ऑटोमैटिक सुरक्षा।
- साइबर अपराध के नए तरीकों से बचाव।
साइबर सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में AI आधारित साइबर अपराध तेजी से बढ़ सकते हैं। ऐसे में Google का यह कदम स्मार्टफोन सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
यदि यह फीचर सफल रहता है, तो भविष्य में इसे अन्य Android डिवाइसों और अधिक देशों में भी उपलब्ध कराया जा सकता है। इससे करोड़ों यूजर्स को AI-जनित धोखाधड़ी से सुरक्षा मिल सकेगी।
AI वॉयस क्लोनिंग और फेक कॉल्स आज के डिजिटल दौर की सबसे बड़ी साइबर चुनौतियों में से एक बन चुके हैं। Google का नया फेक कॉल डिटेक्शन फीचर इन खतरों से निपटने की दिशा में एक मजबूत पहल है। रियल टाइम वेरिफिकेशन और स्मार्ट अलर्ट सिस्टम के जरिए यह तकनीक यूजर्स को संभावित धोखाधड़ी से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।