नई दिल्ली। देश के करोड़ों नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) एक महत्वपूर्ण बचत और रिटायरमेंट सुरक्षा योजना है। हर महीने कर्मचारियों की सैलरी से एक निश्चित राशि PF खाते में जमा होती है, जबकि नियोक्ता भी इसमें अपना योगदान देता है। लेकिन EPFO से जुड़े सबसे आम सवालों में से एक यह है कि क्या पेंशन फंड यानी EPS (Employee Pension Scheme) में जमा राशि पर भी उसी तरह ब्याज मिलता है, जैसे EPF खाते पर मिलता है?
हाल ही में इस विषय पर वित्तीय विशेषज्ञों ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि कर्मचारियों को EPF और EPS के बीच का अंतर समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि दोनों योजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग है और इनके लाभ भी अलग हैं।
EPF और EPS में क्या अंतर है?
जब किसी कर्मचारी का PF कटता है तो उसकी पूरी कर्मचारी अंशदान राशि EPF खाते में जमा होती है। वहीं नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा EPF में और दूसरा हिस्सा EPS यानी कर्मचारी पेंशन योजना में जमा किया जाता है।
सरल शब्दों में कहें तो EPF एक बचत योजना है, जबकि EPS एक पेंशन योजना है। EPF में जमा राशि कर्मचारी के रिटायरमेंट या अन्य जरूरतों के लिए बचत के रूप में काम करती है, जबकि EPS भविष्य में मासिक पेंशन सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया है।
क्या EPS पर भी मिलता है ब्याज?
यही वह सवाल है जो अधिकांश कर्मचारियों को परेशान करता है।
वित्तीय विशेषज्ञ और पर्सनल CFO Consultant LLP के संस्थापक एवं सीईओ सुशील जैन के अनुसार, EPS खाते में जमा राशि पर किसी प्रकार का वार्षिक ब्याज नहीं दिया जाता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केवल EPF खाते में जमा राशि पर ब्याज देती है। EPS में जमा होने वाला पैसा पेंशन फंड का हिस्सा होता है, जो भविष्य में पेंशन निर्धारित करने के लिए उपयोग किया जाता है।
इसका मतलब यह है कि यदि आपके EPS खाते में वर्षों तक पैसा जमा होता रहता है, तब भी उस पर अलग से कोई ब्याज नहीं जोड़ा जाता।
फिर EPS का फायदा क्या है?
कई लोग यह सोचते हैं कि यदि EPS पर ब्याज नहीं मिलता तो इसका लाभ क्या है?
दरअसल EPS का उद्देश्य रिटायरमेंट के बाद नियमित आय सुनिश्चित करना है। यदि कोई कर्मचारी कम से कम 10 वर्षों तक EPFO के तहत सेवा करता है, तो वह मासिक पेंशन का पात्र बन जाता है।
पेंशन की राशि कर्मचारी की सेवा अवधि और निर्धारित पेंशन योग्य वेतन के आधार पर तय की जाती है।
इसलिए EPS को निवेश या बचत योजना के बजाय सामाजिक सुरक्षा योजना के रूप में देखा जाता है।
नियोक्ता कितना पैसा EPS में जमा करता है?
EPFO नियमों के अनुसार नियोक्ता के कुल योगदान का 8.33 प्रतिशत हिस्सा EPS खाते में जमा किया जाता है।
बाकी राशि EPF खाते में जमा होती है, जिस पर सरकार द्वारा घोषित वार्षिक ब्याज दर लागू होती है।
वर्तमान में EPFO ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ब्याज दर 8.25 प्रतिशत बनाए रखी है। यानी EPF खाते में जमा राशि पर कर्मचारियों को 8.25% वार्षिक ब्याज मिलेगा।
कब जमा होता है ब्याज?
EPFO हर वित्तीय वर्ष के लिए ब्याज दर घोषित करता है। आमतौर पर जून या जुलाई के दौरान खातों में ब्याज क्रेडिट किया जाता है।
हालांकि तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के कारण कभी-कभी इसमें देरी भी हो सकती है।
कर्मचारी अपने PF खाते का बैलेंस और ब्याज राशि EPFO पोर्टल, UMANG ऐप या मिस्ड कॉल सेवा के जरिए देख सकते हैं।
10 साल से कम नौकरी होने पर क्या होगा?
यदि किसी कर्मचारी की सेवा अवधि 10 साल से कम है तो वह EPS में जमा राशि को नियमों के अनुसार निकाल सकता है।
लेकिन यदि उसने 10 साल या उससे अधिक की सेवा पूरी कर ली है, तो वह पेंशन लाभ का पात्र बन जाता है और EPS राशि की निकासी नहीं कर सकता।
ऐसी स्थिति में रिटायरमेंट के बाद उसे मासिक पेंशन मिलती है।
क्यों जरूरी है EPF और EPS को समझना?
वित्तीय योजनाओं की बेहतर समझ कर्मचारियों को अपने भविष्य की तैयारी में मदद करती है। कई बार लोग यह मान लेते हैं कि EPS खाते में भी EPF की तरह ब्याज जुड़ रहा है, जबकि वास्तविकता इससे अलग है।
इसलिए नौकरीपेशा लोगों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि EPF बचत और ब्याज आधारित योजना है, जबकि EPS पेंशन आधारित सामाजिक सुरक्षा योजना है।