नई दिल्ली: भारतीय मुक्केबाजी के लिए यह गर्व का क्षण है। ताजा वर्ल्ड बॉक्सिंग रैंकिंग में भारत की स्टार मुक्केबाज जैस्मीन लम्बोरिया ने महिला 57 किलोग्राम वर्ग में दुनिया की नंबर-1 मुक्केबाज बनकर इतिहास रच दिया है। उनके इस शानदार प्रदर्शन ने न केवल भारतीय बॉक्सिंग को नई ऊंचाई दी है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की ताकत को भी साबित किया है।
जैस्मीन के अलावा एशियाई चैंपियनशिप के स्वर्ण पदक विजेता प्रिया घंघास और विश्वनाथ सुरेश ने भी अपने-अपने भार वर्ग में शीर्ष-3 में जगह बनाकर भारतीय मुक्केबाजी की बढ़ती ताकत का परिचय दिया है। नई रैंकिंग में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा साफ दिखाई दे रहा है।
जैस्मीन लम्बोरिया बनीं दुनिया की नंबर-1 मुक्केबाज
महिला 57 किग्रा वर्ग में जैस्मीन लम्बोरिया ने एक स्थान की छलांग लगाते हुए शीर्ष रैंक हासिल की। हाल ही में उन्होंने एशियाई चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता था।
लगातार बेहतरीन प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में सफलता ने उन्हें विश्व रैंकिंग के शीर्ष स्थान तक पहुंचाया। यह उपलब्धि भारतीय महिला मुक्केबाजी के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय मानी जा रही है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि जैस्मीन की यह सफलता आने वाली युवा पीढ़ी को भी प्रेरित करेगी और भारत में महिला बॉक्सिंग को नई दिशा देगी।
मीनाक्षी ने बरकरार रखा नंबर-1 स्थान
भारतीय मुक्केबाजी की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि महिला 48 किग्रा वर्ग में मीनाक्षी ने अपना विश्व नंबर-1 स्थान कायम रखा।
लगातार शानदार प्रदर्शन के दम पर मीनाक्षी लंबे समय से शीर्ष रैंकिंग में बनी हुई हैं। उनकी निरंतरता भारतीय महिला बॉक्सिंग के मजबूत आधार को दर्शाती है।

प्रिया घंघास और विश्वनाथ सुरेश टॉप-3 में
एशियाई चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरने वाली प्रिया घंघास ने महिला 60 किग्रा वर्ग में टॉप-3 में अपनी जगह पक्की कर ली है।
वहीं पुरुष 50 किग्रा वर्ग में विश्वनाथ सुरेश ने भी शीर्ष तीन मुक्केबाजों में स्थान बनाकर बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
दोनों खिलाड़ियों की सफलता इस बात का संकेत है कि भारत अब केवल कुछ चुनिंदा वर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग हर श्रेणी में मजबूत चुनौती पेश कर रहा है।
प्रीति पवार की शानदार छलांग
महिला 54 किग्रा वर्ग में प्रीति पवार ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पांच स्थान की छलांग लगाई है।
अब वह विश्व रैंकिंग में तीसरे स्थान पर पहुंच गई हैं। उनकी इस उपलब्धि को भारतीय मुक्केबाजी के लिए भविष्य की बड़ी उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है।
कई भारतीय महिला मुक्केबाज टॉप-2 में
भारतीय महिला मुक्केबाजों का दबदबा केवल शीर्ष स्थान तक सीमित नहीं है।
विश्व कप पदक विजेता अरुंधति चौधरी (70 किग्रा), अनुभवी मुक्केबाज पूजा रानी (80 किग्रा) और नूपुर (+80 किग्रा) अपनी-अपनी श्रेणियों में दूसरे स्थान पर काबिज हैं।
इन खिलाड़ियों की लगातार सफलता भारतीय महिला बॉक्सिंग की गहराई और गुणवत्ता को दर्शाती है।
निकहत जरीन और लवलीना की स्थिति
दो बार की विश्व चैंपियन निकहत जरीन महिला 51 किग्रा वर्ग में एक स्थान नीचे खिसककर चौथे नंबर पर पहुंच गई हैं।
हालांकि निकहत अभी भी दुनिया की सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाजों में शामिल हैं और आगामी प्रतियोगिताओं में वापसी की पूरी क्षमता रखती हैं।
वहीं ओलंपिक पदक विजेता लवलीना बोरगोहेन महिला 75 किग्रा वर्ग में सातवें स्थान पर बनी हुई हैं। उनकी मौजूदगी भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच पर एक मजबूत उम्मीद बनी हुई है।
रैंकिंग में भारत का दबदबा
ताजा रैंकिंग की सबसे खास बात यह है कि महिला वर्ग की 10 में से 9 और पुरुष वर्ग की 10 में से 8 भार श्रेणियों में भारतीय मुक्केबाज टॉप-10 में शामिल हैं।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत अब विश्व मुक्केबाजी के सबसे मजबूत देशों में शामिल हो चुका है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बेहतर प्रशिक्षण, अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर और युवा खिलाड़ियों की मेहनत का परिणाम अब विश्व रैंकिंग में साफ दिखाई दे रहा है।
वर्ल्ड बॉक्सिंग रैंकिंग में जैस्मीन लम्बोरिया का नंबर-1 बनना भारतीय खेल जगत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। प्रिया घंघास, विश्वनाथ सुरेश, मीनाक्षी, प्रीति पवार और अन्य भारतीय मुक्केबाजों की सफलता यह साबित करती है कि भारत वैश्विक मुक्केबाजी में तेजी से उभरती हुई महाशक्ति बन चुका है। आने वाले वर्षों में भारतीय बॉक्सिंग से और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा सकती है।