रांची। झारखंड की राजनीति में गुरुवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव के परिणामों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उम्मीदवार बैजनाथ राम और NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवाणी विजयी घोषित हुए हैं, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा।
इस परिणाम को कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग और वोट रद्द होने की घटनाओं ने परिणाम को और भी रोचक बना दिया।
कैसा रहा चुनावी गणित?
झारखंड विधानसभा की 81 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए मतदान कराया गया। मतदान सुबह 9 बजे शुरू हुआ और शाम 4 बजे तक चला। सभी 81 विधायकों ने मतदान कर शत-प्रतिशत वोटिंग सुनिश्चित की।
मतगणना शाम 5 बजे शुरू हुई, जिसके बाद परिणाम सामने आए।
अंतिम परिणाम के अनुसार—
- बैजनाथ राम (JMM) : 31 वोट
- परिमल नथवाणी (NDA समर्थित निर्दलीय) : 28 वोट
- प्रणव झा (कांग्रेस) : 19 वोट
चुनाव के दौरान भाजपा के दो और सत्ता पक्ष के एक वोट को अमान्य घोषित कर दिया गया।
कांग्रेस की रणनीति क्यों हुई फेल?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस ने राज्यसभा की दूसरी सीट जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। पार्टी को उम्मीद थी कि इंडिया गठबंधन के संयुक्त समर्थन के दम पर वह जीत दर्ज करेगी, लेकिन परिणाम उसके पक्ष में नहीं आए।
कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को केवल 19 वोट मिलना यह संकेत देता है कि पार्टी को अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं।
हालांकि अभी तक किसी विधायक के खिलाफ आधिकारिक तौर पर क्रॉस वोटिंग की पुष्टि नहीं हुई है।
परिमल नथवाणी की जीत क्यों खास है?
परिमल नथवाणी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे, लेकिन उन्हें NDA का समर्थन प्राप्त था। मतदान से पहले ही उन्होंने दावा किया था कि उन्हें सभी दलों के विधायकों का समर्थन मिलेगा।
उनकी जीत ने यह साबित कर दिया कि उन्होंने विधानसभा में व्यापक समर्थन हासिल किया।
परिमल नथवाणी ने मतदान से पहले कहा था—
“मुझे सभी विधायकों पर भरोसा है। यदि अवसर मिला तो मैं झारखंड की सेवा के लिए पूरी निष्ठा से काम करूंगा।”
उनकी जीत ने NDA खेमे में उत्साह का माहौल पैदा कर दिया है।
बैजनाथ राम की जीत पहले से तय मानी जा रही थी
झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। विधानसभा में JMM और उसके सहयोगियों की संख्या को देखते हुए उनके लिए जीत का रास्ता अपेक्षाकृत आसान था।
31 वोट हासिल कर उन्होंने राज्यसभा की पहली सीट पर कब्जा किया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मतदान के दौरान सभी गठबंधन विधायकों के साथ रणनीतिक बैठकें भी की थीं। हालांकि दूसरी सीट पर कांग्रेस को जीत नहीं दिला पाने से गठबंधन के भीतर सवाल खड़े हो सकते हैं।
मतदान के दौरान दिखा राजनीतिक माहौल
राज्यसभा चुनाव के दौरान विधानसभा परिसर में राजनीतिक गतिविधियां पूरे दिन जारी रहीं।
भाजपा विधायक एक साथ बस से विधानसभा पहुंचे जबकि कांग्रेस विधायक बीएनआर होटल से समूह में मतदान के लिए पहुंचे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन भी मतदान करने विधानसभा पहुंचे। मतदान से पहले उन्होंने गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक की।
वहीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने दावा किया था कि झारखंड अपने आत्मसम्मान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करेगा।
कांग्रेस के लिए बढ़ी चुनौती
राज्यसभा चुनाव परिणाम ऐसे समय सामने आए हैं जब राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन को कई राज्यों में राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
झारखंड में भी यह परिणाम पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े कर सकता है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस को अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए गंभीर रणनीति बनानी होगी।
NDA को मिला मनोवैज्ञानिक बढ़त
परिमल नथवाणी की जीत को NDA के लिए बड़ी राजनीतिक सफलता माना जा रहा है। यह परिणाम विपक्षी गठबंधन के भीतर संभावित मतभेदों की ओर भी संकेत करता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस जीत से NDA को आगामी चुनावी मुकाबलों में मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सकती है।