अहमदाबाद के BJ मेडिकल कॉलेज में फर्स्ट-ईयर रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ रैगिंग का मामला सामने आया

अहमदाबाद के प्रतिष्ठित बीजे मेडिकल कॉलेज (BJ Medical College) में रैगिंग का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद कॉलेज प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग हरकत में आ गया है। कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर तीन सेकंड-ईयर पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्रों को छह महीने से लेकर एक वर्ष तक के लिए निलंबित कर दिया गया है। आरोप है कि इन छात्रों ने फर्स्ट-ईयर रेजिडेंट डॉक्टरों के साथ रैगिंग की और उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने गुरुवार को इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि राज्य सरकार रैगिंग जैसी घटनाओं को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

एंटी-रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी ने मामले की विस्तृत जांच की थी। जांच में रैगिंग के आरोप सही पाए जाने के बाद तीन वरिष्ठ छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।

मंत्री के अनुसार, कॉलेज प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि परिसर में किसी भी छात्र को डर, दबाव या मानसिक उत्पीड़न का सामना न करना पड़े। छात्रों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता है।

13 जूनियर डॉक्टरों ने की शिकायत

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब जानकारी सामने आई कि फर्स्ट-ईयर के कई रेजिडेंट डॉक्टर रैगिंग का शिकार हुए थे। शिकायत में आरोप लगाया गया कि वरिष्ठ छात्रों ने नए छात्रों के साथ अनुचित व्यवहार किया और उन्हें मानसिक रूप से परेशान किया।

हालांकि जांच रिपोर्ट में सभी आरोपों का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया है, लेकिन प्रशासन ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना और तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।

भावनगर मेडिकल कॉलेज में भी सामने आया मामला

इसी बीच गुजरात के भावनगर स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में भी रैगिंग की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि ऑर्थोपेडिक्स विभाग के छह सेकंड-ईयर पोस्टग्रेजुएट छात्रों ने 13 फर्स्ट-ईयर छात्रों के साथ रैगिंग की।

इस मामले को भी स्वास्थ्य विभाग ने गंभीरता से लिया है। मंत्री प्रफुल्ल पानशेरिया ने कॉलेज के डीन और एंटी-रैगिंग कमेटी को विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।

सरकार ने अपनाया सख्त रुख

गुजरात सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मेडिकल कॉलेजों में रैगिंग के लिए कोई जगह नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि मेडिकल शिक्षा का उद्देश्य छात्रों को बेहतर डॉक्टर बनाना है, न कि उन्हें भय और अपमान के माहौल में पढ़ाई करने के लिए मजबूर करना।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में अन्य छात्र भी दोषी पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों से की विशेष अपील

स्वास्थ्य मंत्री ने छात्रों से आपसी सम्मान, सहयोग और सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेजों में सीनियर और जूनियर के बीच स्वस्थ संबंध होने चाहिए ताकि सीखने और विकास का माहौल बन सके।

रैगिंग जैसी गतिविधियां न केवल छात्रों के आत्मविश्वास को प्रभावित करती हैं बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर डाल सकती हैं।

मेडिकल संस्थानों में रैगिंग पर बढ़ती चिंता

देशभर के कई शिक्षण संस्थानों में समय-समय पर रैगिंग के मामले सामने आते रहे हैं। मेडिकल कॉलेजों में लंबे और चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण के दौरान छात्रों पर पहले से ही काफी दबाव होता है। ऐसे में रैगिंग की घटनाएं उनके मानसिक तनाव को और बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि एंटी-रैगिंग नियमों को और प्रभावी बनाने के साथ-साथ छात्रों के लिए काउंसलिंग और शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *