गुजरात: में स्थानीय निकाय चुनावों की हलचल के बीच राजकोट से एक दिलचस्प और चर्चा में रहने वाली उम्मीदवार सामने आई हैं—पूर्व रेडियो जॉकी और सोशल मीडिया पर लोकप्रिय चेहरा Abha Desai।
Rajkot नगर निगम के वार्ड 10 से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहीं RJ आभा इस बार अपने पहले ही चुनाव में सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर उनके प्रभाव और फॉलोइंग ने उन्हें एक ‘इन्फ्लूएंसर कैंडिडेट’ के रूप में पहचान दी है। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे-वैसे उनके सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं।
अफवाहों ने बढ़ाई मुश्किलें
चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में RJ आभा को एक बड़ी अफवाह का सामना करना पड़ा। सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर यह खबर फैलने लगी कि उन्होंने चुनाव से नाम वापस ले लिया है या वे अब मैदान में नहीं हैं।
इन खबरों ने उनके समर्थकों में भ्रम पैदा कर दिया। ऐसे में RJ आभा को खुद सामने आकर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट के जरिए स्पष्ट किया कि वे पूरी तरह से चुनाव मैदान में हैं और सक्रिय रूप से प्रचार कर रही हैं।
उन्होंने कहा—“मैंने सिर्फ अपना प्लेटफॉर्म बदला है, मेरा उद्देश्य नहीं। कृपया अफवाहों पर ध्यान न दें।”
रेडियो से राजनीति तक का सफर
RJ आभा का सफर भी काफी दिलचस्प रहा है। उन्होंने Radio City, Red FM और अन्य एफएम चैनलों पर काम किया है, जहां उनकी आवाज और स्टाइल ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया।
सोशल मीडिया पर भी उनकी अच्छी-खासी फैन फॉलोइंग है। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके हजारों फॉलोअर्स हैं, जिससे उन्हें चुनाव प्रचार में डिजिटल बढ़त मिल रही है।

युवा चेहरों पर दांव
गुजरात के इन स्थानीय निकाय चुनावों को 2027 विधानसभा चुनावों का ‘सेमीफाइनल’ माना जा रहा है। ऐसे में बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां युवा और नए चेहरों को आगे ला रही हैं।
RJ आभा इसी रणनीति का हिस्सा हैं। उनका दावा है कि उनका पूरा पैनल युवा, शिक्षित और बदलाव लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
गेमजोन हादसे की गूंज
राजकोट नगर निगम चुनावों में पिछले साल हुए ‘गेमजोन हादसे’ की गूंज भी सुनाई दे रही है। 25 मई 2024 को हुए इस हादसे में 27 लोगों की जान चली गई थी, जिसके बाद प्रशासन और नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे थे।
RJ आभा इस मुद्दे को भी अपने प्रचार में उठा रही हैं और बेहतर प्रशासन व जवाबदेही की बात कर रही हैं।
परिवार का भी मिल रहा साथ
RJ आभा के चुनाव प्रचार में उनके पति दुर्गेश देसाई भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। दोनों मिलकर घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रहे हैं और समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।
सोशल मीडिया बनाम जमीनी हकीकत
हालांकि RJ आभा की सोशल मीडिया पर मजबूत पकड़ है, लेकिन असली चुनौती वोटों में इस लोकप्रियता को बदलने की है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया की लोकप्रियता जरूरी नहीं कि चुनावी जीत में बदल जाए। इसके लिए जमीनी नेटवर्क, संगठन और स्थानीय मुद्दों पर पकड़ भी उतनी ही जरूरी होती है।
क्या जीत पाएंगी ‘इन्फ्लूएंसर कैंडिडेट’?
RJ आभा का चुनाव इस बार इसलिए भी खास है क्योंकि यह एक तरह से ‘नई राजनीति बनाम पारंपरिक राजनीति’ की लड़ाई बन गया है।
एक तरफ उनका युवा चेहरा और डिजिटल प्रभाव है, तो दूसरी तरफ अनुभवी उम्मीदवारों का जमीनी नेटवर्क।
अब देखना दिलचस्प होगा कि 26 अप्रैल को होने वाली वोटिंग और 28 अप्रैल को आने वाले नतीजे क्या कहानी लिखते हैं।
RJ आभा का चुनाव सिर्फ एक उम्मीदवार की कहानी नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य की झलक है। जहां सोशल मीडिया और युवा ऊर्जा राजनीति में नई दिशा दे रहे हैं, वहीं अफवाहें और जमीनी चुनौतियां अब भी बड़ी भूमिका निभाती हैं।