गुजरात: के स्थानीय निकाय चुनावों के बीच आम आदमी पार्टी (AAP) में अंदरूनी हलचल तेज हो गई है। चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में पार्टी को बड़ा झटका तब लगा, जब कई वरिष्ठ नेताओं के पार्टी छोड़ने की खबर सामने आई। इस घटनाक्रम पर दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “गद्दारी” करार दिया।
अहमदाबाद और सौराष्ट्र क्षेत्र में चुनाव प्रचार कर रहे सिसोदिया ने कहा कि जब एक तरफ पार्टी के कार्यकर्ता गुजरात में अपनी जान जोखिम में डालकर मेहनत कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ नेताओं ने निजी स्वार्थ के लिए पार्टी छोड़ दी। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने “खून-पसीने की कमाई का सौदा” किया है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में राघव चड्ढा समेत कई राज्यसभा सांसदों के पार्टी छोड़ने की खबर है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चड्ढा के अलावा संदीप पाठक, राजेंद्र गुप्ता, हरभजन सिंह, स्वाती मालीवाल, विक्रम साहनी और अशोक मित्तल जैसे नेताओं के नाम भी सामने आए हैं, जिन्होंने पार्टी से दूरी बनाई।
सिसोदिया ने सोशल मीडिया पर भी अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि जो नेता आज दबाव, डर या लालच में आकर बीजेपी के सामने झुक गए हैं, वे पंजाब और देश की जनता के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पंजाब की जनता ऐसे “गद्दारों” को कभी माफ नहीं करेगी।

इस घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, खासकर उस समय जब गुजरात में चुनाव प्रचार अपने चरम पर था। आम आदमी पार्टी ने पिछले कुछ वर्षों में गुजरात में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है और खासतौर पर सूरत को अपनी एंट्री पॉइंट बनाया था।
गुजरात में 15 नगर निगमों, 84 नगरपालिकाओं और कुल 393 स्थानीय निकायों के लिए चुनाव हो रहे हैं। मतदान 26 अप्रैल को होना है, जबकि नतीजे 28 अप्रैल को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले पार्टी में आई इस दरार को AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह घटनाक्रम आम आदमी पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े कर सकता है। जहां बीजेपी और कांग्रेस जैसी पार्टियां पहले से ही मजबूत स्थिति में हैं, वहीं AAP को अपने संगठन को संभालने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
हालांकि, पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि यह केवल अस्थायी संकट है और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का समर्थन अभी भी पार्टी के साथ बना हुआ है। उनका दावा है कि चुनाव परिणामों में इसका बड़ा असर नहीं पड़ेगा।
दूसरी ओर, विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर AAP पर लगातार निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि पार्टी के अंदर असंतोष बढ़ रहा है और यही कारण है कि वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह साफ कर दिया है कि गुजरात चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति के समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है।