गुजरात: में रविवार को लोकतंत्र का बड़ा उत्सव शुरू हो गया, जब राज्यभर में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए मतदान प्रक्रिया शुरू हुई। सुबह 7 बजे से शुरू हुई वोटिंग शाम 6 बजे तक चलेगी। इस चुनाव में राज्य की 393 स्वशासनिक संस्थाओं के लिए मतदाता अपने प्रतिनिधियों का चयन कर रहे हैं।
राज्य के प्रमुख शहरों जैसे अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट सहित कई इलाकों में सुबह से ही मतदान केंद्रों पर लंबी कतारें देखने को मिलीं। गर्मी को ध्यान में रखते हुए बड़ी संख्या में मतदाता सुबह जल्दी मतदान केंद्रों पर पहुंच गए।
इस चुनाव में कुल 4.18 करोड़ से अधिक मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इसके लिए पूरे राज्य में लगभग 50,000 मतदान केंद्र बनाए गए हैं। चुनाव आयोग ने शांतिपूर्ण और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए हैं।
गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव में इस बार कुल 9,992 सीटों पर मतदान हो रहा है। नामांकन वापसी के बाद भी 20,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, जिससे मुकाबला काफी दिलचस्प और बहुकोणीय हो गया है।
इस चुनाव में प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है। भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और आम आदमी पार्टी समेत कई निर्दलीय उम्मीदवार मैदान में हैं। वर्तमान में बीजेपी का अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा और राजकोट जैसे प्रमुख नगर निगमों पर मजबूत नियंत्रण है, जिसे वह बरकरार रखने की कोशिश करेगी।
इस चुनाव की खास बात यह भी है कि यह संशोधित आरक्षण नियमों के तहत हो रहा है। अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू किया गया है। इसके अलावा अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिलाओं के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था लागू है। इन बदलावों के कारण कई क्षेत्रों में परिसीमन और वार्डों का पुनर्गठन किया गया है।
गुजरात के 15 नगर निगमों में से 9—नवसारी, गांधीधाम, मोरबी, वापी, आनंद, नाडियाद, मेहसाणा, पोरबंदर और सुरेंद्रनगर—में पहली बार चुनाव हो रहे हैं। इसके अलावा 84 नगरपालिकाओं, 34 जिला पंचायतों और 260 तालुका पंचायतों में भी वोटिंग जारी है।
राजनीतिक दृष्टि से यह चुनाव बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसे आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों से पहले एक ‘सेमीफाइनल’ के रूप में देखा जा रहा है। चुनाव परिणाम यह संकेत देंगे कि राज्य में किस पार्टी की पकड़ मजबूत है और जनता का मूड किस दिशा में जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि शहरी क्षेत्रों में जहां बीजेपी की पकड़ मजबूत रही है, वहीं विपक्षी दल ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में इस बार का मुकाबला काफी रोचक हो सकता है।
मतगणना 28 अप्रैल को होगी, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि गुजरात की जनता ने किस पार्टी को अपना समर्थन दिया है। चुनाव परिणाम राज्य की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव केवल प्रतिनिधियों के चयन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह आने वाले बड़े चुनावों की दिशा तय करने वाला अहम पड़ाव भी हैं। अब सभी की नजरें 28 अप्रैल को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं।