जम्मू-कश्मीर: के पर्वतीय इलाकों में मौसम लगातार खतरनाक रूप लेता जा रहा है। किश्तवाड़, डोडा और रियासी जिलों में पिछले चार दिनों के भीतर चार अलग-अलग स्थानों पर बादल फटने की घटनाओं ने प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। भारी बारिश, भूस्खलन और सड़क मार्गों के क्षतिग्रस्त होने के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन श्री मचैल माता और श्री मिंधल माता यात्रा को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया है।
प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम सामान्य होने तक किसी भी प्रकार का जोखिम नहीं लिया जाएगा।
लगातार बारिश से बढ़ा खतरा
किश्तवाड़ और आसपास के पहाड़ी क्षेत्रों में बीते कुछ दिनों से लगातार बारिश हो रही है। कई जगहों पर पहाड़ों से मलबा गिरने और सड़कें फिसलन भरी होने की खबरें सामने आई हैं। मौसम विभाग ने भी अगले कुछ दिनों तक खराब मौसम बने रहने की संभावना जताई है।
प्रशासन के अनुसार, बादल फटने की घटनाओं के कारण नदी-नाले उफान पर हैं और कई मार्गों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में हजारों श्रद्धालुओं की आवाजाही सुरक्षित नहीं मानी जा रही।
पिछले साल की त्रासदी अभी भी ताजा
मचैल यात्रा मार्ग पर पिछले वर्ष चिशोती क्षेत्र में बादल फटने की एक भयावह घटना हुई थी। इस हादसे में एक पुल बह गया था और लगभग 65 श्रद्धालुओं की जान चली गई थी। यह हादसा जम्मू-कश्मीर के हालिया इतिहास की सबसे दर्दनाक तीर्थ दुर्घटनाओं में से एक माना जाता है।
चिंता की बात यह है कि जिस पुल के बहने से यह हादसा हुआ था, उसका स्थायी निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो सका है। वर्तमान में वाहन अस्थायी मार्ग और नाले से होकर गुजरते हैं, जो भारी बारिश के दौरान बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
इसी खतरे को देखते हुए प्रशासन ने नाले से वाहनों की आवाजाही भी फिलहाल बंद कर दी है।

मिंधल माता यात्रा मार्ग भी जोखिम में
केवल मचैल यात्रा ही नहीं, बल्कि मिंधल माता यात्रा मार्ग पर भी कई संवेदनशील स्थान हैं। यहां अनेक छोटे-बड़े नाले, संकरे रास्ते और पहाड़ी मोड़ मौजूद हैं, जहां भारी बारिश के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार हो रही बारिश से मिट्टी कमजोर हो जाती है, जिससे भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
जिला प्रशासन ने स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। लोगों को नदी-नालों, पहाड़ी ढलानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जब तक मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाता और मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जम्मू में लू, पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी
दिलचस्प बात यह है कि जम्मू-कश्मीर में मौसम अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग रूप दिखा रहा है। जहां कश्मीर घाटी और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में कहीं-कहीं बर्फबारी और बारिश हो रही है, वहीं जम्मू के मैदानी क्षेत्रों में भीषण गर्मी और लू का असर देखने को मिल रहा है।
मौसम विभाग ने जम्मू क्षेत्र में 9 जून से हीटवेव की चेतावनी भी जारी की है।
सुरक्षा को प्राथमिकता
प्रशासन का कहना है कि यात्रा रोकने का फैसला केवल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। जैसे ही मौसम की स्थिति बेहतर होगी और मार्गों का निरीक्षण पूरा हो जाएगा, यात्रा बहाल करने पर विचार किया जाएगा।
अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़, डोडा और रियासी जिलों में लगातार हो रही भारी बारिश और बादल फटने की घटनाओं ने हालात को संवेदनशील बना दिया है। पिछले वर्ष हुई बड़ी त्रासदी को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने समय रहते मचैल माता और मिंधल माता यात्रा पर रोक लगाकर सुरक्षा को प्राथमिकता दी है। मौसम सामान्य होने के बाद ही यात्रा दोबारा शुरू किए जाने का फैसला लिया जाएगा।